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Elgar Parishad Case: गौतम नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत, फिर भी तीन सप्ताह तक नहीं लागू होगा फैसला

Tue, 19 Dec 2023 04:44 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 19 Dec 2023 04:44 PM IST
सार

Elgar Parishad Case: उच्च न्यायालय ने नवलखा को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। वह एल्गार परिषद मामले में सातवें आरोपी हैं जिन्हें जमानत दी गई है। 

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Elgar Parishad case: HC grants bail to Gautam Navlakha; stays order for 3 weeks
गौतम नवलखा (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कार्यकर्ता गौतम नवलखा को जमानत दे दी है। उन्हें एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति ए एस गडकरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि नवलखा की जमानत याचिका को स्वीकार किया जाता है।

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तीन सप्ताह तक लागू नहीं होगा आदेश
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत से छह सप्ताह की अवधि के लिए आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह किया। ताकि वह उच्चतम न्यायालय में अपील दायर कर सके। पीठ ने इस आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी।

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एक लाख के मुचलके पर मिली जमानत
नवलखा को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पिछले साल नवंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने नजबरबंद करने की अनुमति दी थी। वह अभी नवी मुंबई में रह रहे हैं। उच्च न्यायालय ने नवलखा को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। वह इस मामले में सातवें आरोपी हैं जिन्हें जमानत दी गई है। 

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विशेष अदालत ने जमानत देने से किया था इनकार
इस साल अप्रैल में एक विशेष अदालत ने नवलखा को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह दिखाने के लिए सबूत हैं कि वह प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के सक्रिय सदस्य हैं। 

नवलखा ने किया था उच्च न्यायालय का रुख
उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका में नवलखा ने कहा कि विशेष अदालत ने उन्हें जमानत न देकर गलत किया है। नियमित जमानत के लिए उच्च न्यायालय में नवलखा की अपील का यह दूसरा दौर है। विशेष एनआईए अदालत द्वारा पिछले साल सितंबर में नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद नवलखा ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।

एनआईए ने किया जमानत याचिका का विरोध
एनआईए ने तब नवलखा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि उनकी भर्ती के लिए उन्हें पाकिस्तान इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) जनरल से मिलवाया गया था, जो संगठन के साथ उनकी सांठगांठ को दिखाता है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने राय दी थी कि विशेष अदालत के आदेश में तर्क छिपा हुआ है और इसमें अभियोजन पक्ष के दृष्टिकोण के आधार पर सबूतों का विश्लेषण शामिल नहीं है। 

उच्च न्यायालय ने विशेष न्यायाधीश को दिया था निर्देश
उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि जमानत याचिका पर विशेष अदालत द्वारा नए सिरे से सुनवाई की जरूरत है और मामले को अदालत में वापस भेज दिया था। अदालत ने विशेष न्यायाधीश को चार सप्ताह के भीतर सुनवाई पूरी करने का भी निर्देश दिया था। इसके बाद नवलखा ने नियमित जमानत के लिए अपने मामले की फिर से सुनवाई के लिए विशेष अदालत का रुख किया था। विशेष अदालत ने तब उसी दलील पर फिर से सुनवाई की थी और जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वर्तमान अपील दायर की गई थी।

कहां से शुरू हुआ था मामला
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि अगले दिन राज्य के पश्चिमी शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी। इस मामले में 16 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से पांच फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे, वकील सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा और महेश राउत नियमित जमानत पर बाहर हैं। जबकि कवि वरवरा राव स्वास्थ्य आधार पर जमानत पर बाहर हैं। नवलखा इस मामले में जमानत पाने वाले सातवें आरोपी हैं। 

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