फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Electoral Reform bill allowing voluntary Aadhaar-Voter ID linking, know important things related to electoral reforms which can have a direct impact on you

Electoral Reforms: चुनाव सुधार से जुड़ी ये तीन अहम बातें, जो आप पर सीधा असर डाल सकती हैं

Sat, 18 Dec 2021 01:41 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 18 Dec 2021 01:41 PM IST
विज्ञापन
सार
चुनाव सुधारों की मांग को लेकर चुनाव आयोग लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। अपने प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए इसी साल जनवरी में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को चिट्ठी लिखी थी। 
loader
Electoral  Reform bill allowing voluntary Aadhaar-Voter ID linking, know  important things related to electoral reforms which can have a direct impact on you
एक चुनाव में मतदान के लिए कतार में लगे लोग (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को चुनावी सुधारों से संबंधित एक विधेयक को मंजूरी दी है। सुधारों में सबसे अहम स्वैच्छिक आधार पर मतदाता सूची को आधार से जोड़ना शामिल है ताकि एक ही नाम को कई जगह जोड़े जाने की समस्या को समाप्त किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ 18 साल के युवाओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के अब साल में चार बार मौके मिल सकते हैं।


प्रस्तावित विधेयक में स्कूलों को मतदान केंद्र के रूप में लेने की आपत्ति खारिज करते हुए चुनाव आयोग को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे चुनाव संचालन के लिए किसी भी परिसर को चुनावों तक ले सकते हैं। चुनाव सुधारों से संबंधित विधेयक को मौजूदा शीतकालीन सत्र में ही पेश किए जाने की संभावना है। 


इसी साल मार्च में, तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा को एक लिखित उत्तर में बताया था कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को आधार के साथ जोड़ने का प्रस्ताव किया है, ताकि एक ही व्यक्ति, विभिन्न स्थानों पर वोटर लिस्ट में अपना नाम नहीं जुड़वा सके। इससे एक ही वोटर के नाम के दोहराव और फर्जी वोटर्स को रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए चुनावी कानूनों में संशोधन की जरूरत होगी।

किरेन रिजिजू
किरेन रिजिजू - फोटो : social media
बाद में अगस्त में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में अपने लिखित जवाब में कहा था ‘सरकार चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने के बाद, आयोग ने चुनावी सुधारों के विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए अपनी 244 वीं और 255 वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ, आरोप तय करने पर चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने, चुनाव वित्त और जनमत सर्वेक्षण का विनियमन, पेड न्यूज पर प्रतिबंध आदि शामिल हैं’। 

चुनाव आयोग सरकार से यह मांग कर रहा था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन किया जाए जिससे चुनाव आयोग को मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वालों और पहले से ही मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा चुके लोगों से आधार नंबर लेने का अधिकार मिल सके।

चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
अगस्त 2019 में भेजा था प्रस्ताव
आयोग ने इस बात का प्रस्ताव सरकार को अगस्त 2019 में भेजा था। जिसमें यह मांग की गई थी कि चुनावी पंजीकरण अधिकारियों को यह अधिकार दिया जाए कि वे पुराने मतदाताओं के साथ-साथ नए मतदाता से भी उनका आधार नंबर ले सकें।

अगस्त 2015 में, आधार पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने मतदाता डेटा को आधार के साथ जोड़ने के लिए चुनाव आयोग की योजना पर ब्रेक लगा दिया था और कहा कि आधार नंबर लेने के लिए कानून जरूरी है। उस समय आयोग राष्ट्रीय मतदाता सूची शुद्धिकरण और प्रमाणीकरण कार्यक्रम (एनईआरपीएपी) के हिस्से के रूप में लोगों का आधार संख्या ले रहा था। मतदाता सूची में कई आवेदनों की जांच करने और उन्हें त्रुटि मुक्त बनाने के लिए तब चुनाव आयोग ने आधार संख्या को चुनावी डेटा से जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी।

चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार संख्या एकत्र करने के लिए कानून की मंजूरी आवश्यक है इसलिए आयोग ने चुनावी कानून में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। संसद से यह विधेयक पारित होने के बाद चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए किसी भी आधार संख्या को अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाएगा।
 

गाजियाबाद के नेहरु स्टेडियम में चुनाव पर चर्चा करते हुए युवा।
गाजियाबाद के नेहरु स्टेडियम में चुनाव पर चर्चा करते हुए युवा। - फोटो : अमर उजाला
18 साल का होने पर साल में चार बार युवाओं को मिलेगा वोटर बनने का मौका 
प्रस्तावित विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अब युवा चाहें तो हर साल चार अलग-अलग तिथियों पर मतदाता के रूप में अपना नामांकन करा सकते हैं। अब तक, हर साल एक जनवरी को या उससे पहले 18 साल के होने वालों को ही मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति है। ऐसे में कई युवा साल के बीच में 18 साल का होने के बाद भी एक जनवरी का इंतजार करते हैं और यदि उस साल चुनाव हो जाएं तो वे 18 साल का होने के बाद भी वोट नहीं कर पाते हैं। 

चुनाव आयोग लंबे समय से इस बात की मांग कर रहा था कि योग्य लोगों को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए कई तारीखें होनी चाहिए, क्योंकि केवल एक तारीख होने से युवाओं का एक विशेष वर्ष उस साल होने वाले चुनावों में हिस्सा लेने से वंचित रह जाता है।  

भारतीय सेना (फाइल फोटो)
भारतीय सेना (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
सर्विस वोटर्स के लिए कानून होगा जेंडर न्यूट्रल
विधेयक में सर्विस वोटर्स के लिए चुनावी कानून को जेंडर न्यूट्रल भी बनाने की बात कही गई है।  अभी सेना के एक जवान की पत्नी को सर्विस वोटर के रूप में नामांकित होने का हकदार है, लेकिन एक महिला सैन्य अधिकारी के पति को यह अधिकार नहीं है। विधेयक में अब बदलाव किया गया है। चुनाव सुधार से संबंधित पैनल ने कानून मंत्रालय से कहा है कि सर्विस वोटर्स से संबंधित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान में कानून ‘पत्नी’ शब्द को ‘जीवनसाथी’ शब्द में बदलने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed