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ECI: तमिलनाडु में अगले हफ्ते शुरू होगा मतदाता सूची पुनरीक्षण, चुनाव आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट को दी जानकारी
Sat, 25 Oct 2025 12:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:05 PM IST
सार
चुनाव आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच को बताया कि बिहार की तरह ही यह प्रक्रिया तमिलनाडु में भी हफ्ते भर के अंदर शुरू की जाएगी।
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निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु में एसआईआर पर मद्रास हाईकोर्ट को दी जानकारी
- फोटो : ANI
विस्तार
बिहार के बाद अब तमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेसिव रिवीजन) कराने की तैयारियां कर ली गई हैं। निर्वाचन आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि वह तमिलनाडु समेत चुनावी राज्यों में एसआईआर का अभियान अगले हफ्ते से शुरू करेगा।
चुनाव आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच को बताया कि बिहार की तरह ही यह प्रक्रिया तमिलनाडु में भी हफ्ते भर के अंदर शुरू की जाएगी।
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चुनाव आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच को बताया कि बिहार की तरह ही यह प्रक्रिया तमिलनाडु में भी हफ्ते भर के अंदर शुरू की जाएगी।
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एआईएडीएमके नेता की शिकायत को भी देखा जाएगा
हाईकोर्ट को ईसी की तरफ से यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है, जब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) पार्टी के पूर्व विधायक बी. सत्यनारायणन की याचिका पर सुनवाई जारी है। पूर्व विधायक का आरोप है कि चेन्नई के टी. नगर निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव अधिकारियों ने लगभग 13,000 एआईएडीएमके समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, 1998 में क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 2,08,349 थी, जबकि 2021 तक यह केवल 36,656 बढ़ी। उन्होंने कहा कि जनसंख्या और मतदाता संख्या में बड़ा अंतर है।
उनका यह भी आरोप है कि जहां 13,000 समर्थकों के नाम हटा दिए गए हैं, वहीं मृत व्यक्तियों के नाम अब भी सूची में बने हुए हैं।” सत्यनारायण का आरोप है कि इससे द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) को फायदा हुआ। पूर्व विधायक ने अदालत से अपील की कि 2026 विधानसभा चुनावों से पहले टी. नगर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची का पूर्ण पुनरीक्षण किया जाए और गलत एंट्रीज को हटाकर अंतिम सूची जारी की जाए।
हाईकोर्ट को ईसी की तरफ से यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है, जब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) पार्टी के पूर्व विधायक बी. सत्यनारायणन की याचिका पर सुनवाई जारी है। पूर्व विधायक का आरोप है कि चेन्नई के टी. नगर निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव अधिकारियों ने लगभग 13,000 एआईएडीएमके समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, 1998 में क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 2,08,349 थी, जबकि 2021 तक यह केवल 36,656 बढ़ी। उन्होंने कहा कि जनसंख्या और मतदाता संख्या में बड़ा अंतर है।
उनका यह भी आरोप है कि जहां 13,000 समर्थकों के नाम हटा दिए गए हैं, वहीं मृत व्यक्तियों के नाम अब भी सूची में बने हुए हैं।” सत्यनारायण का आरोप है कि इससे द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) को फायदा हुआ। पूर्व विधायक ने अदालत से अपील की कि 2026 विधानसभा चुनावों से पहले टी. नगर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची का पूर्ण पुनरीक्षण किया जाए और गलत एंट्रीज को हटाकर अंतिम सूची जारी की जाए।
निर्वाचन आयोग ने दिया एसआईआर के जरिए जांच का भरोसा
निर्वाचन आयोग ने अदालत को भरोसा दिया कि प्रस्तावित एसआईआर के दौरान याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी और आयोग को निर्देश दिया कि बिहार एसआईआर से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी पेश की जाए।
अन्य वीडियो
निर्वाचन आयोग ने अदालत को भरोसा दिया कि प्रस्तावित एसआईआर के दौरान याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी और आयोग को निर्देश दिया कि बिहार एसआईआर से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी पेश की जाए।
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पहले चरण में 10 से 15 राज्य होंगे शामिल?
सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में 10 से 15 राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू होगी। इनमें वे राज्य शामिल होंगे जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जैसे असम, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल। हालांकि, जिन राज्यों में इस समय स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या होने वाले हैं, वहां फिलहाल यह प्रक्रिया नहीं होगी, क्योंकि स्थानीय स्तर का प्रशासन चुनावी कामकाज में व्यस्त रहेगा।
राज्यों में पुरानी सूची बनेगी आधार
हर राज्य में पिछली बार हुए एसआईआर को कटऑफ वर्ष माना जाएगा। जैसे बिहार में 2003 की सूची को आधार बनाया गया था, वैसे ही अन्य राज्यों में भी पिछली एसआईआर सूची को मानक के रूप में अपनाया जाएगा। ज्यादातर राज्यों में पिछला एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुआ था। अब वर्तमान मतदाताओं की तुलना उसी समय की सूची से की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि कौन से नाम हटाने या सत्यापित करने की जरूरत है।
सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में 10 से 15 राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू होगी। इनमें वे राज्य शामिल होंगे जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जैसे असम, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल। हालांकि, जिन राज्यों में इस समय स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या होने वाले हैं, वहां फिलहाल यह प्रक्रिया नहीं होगी, क्योंकि स्थानीय स्तर का प्रशासन चुनावी कामकाज में व्यस्त रहेगा।
राज्यों में पुरानी सूची बनेगी आधार
हर राज्य में पिछली बार हुए एसआईआर को कटऑफ वर्ष माना जाएगा। जैसे बिहार में 2003 की सूची को आधार बनाया गया था, वैसे ही अन्य राज्यों में भी पिछली एसआईआर सूची को मानक के रूप में अपनाया जाएगा। ज्यादातर राज्यों में पिछला एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुआ था। अब वर्तमान मतदाताओं की तुलना उसी समय की सूची से की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि कौन से नाम हटाने या सत्यापित करने की जरूरत है।