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चुनाव आयोग: डिजिटल प्रचार में कितनी रकम उड़ाई अब देनी होगी जानकारी, खर्च के कॉलम में हुआ ये अहम बदलाव

Tue, 18 Jan 2022 10:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 18 Jan 2022 10:28 PM IST
सार

चुनाव आयोग की ओर से किए गए बदलावों के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों को अलग कॉलम में अपने डिजिटल अभियान के खर्चों का ब्योरा देना होगा।

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Election Commission adds new column for candidates to mention expenditure on digital campaigning news and updates
चुनाव आयोग - फोटो : social media

विस्तार

चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों की ओर से किए प्रचार पर किए जा रहे अंधाधुंध खर्चे पर लगाम लगाने का फैसला किया है। दरअसल, आयोग अब तक प्रत्याशियों से रैलियों और रोडशो पर हुए खर्चों का ब्योरा निकाल लेता था। लेकिन डिजिटल प्रचार के लिए उम्मीदवार अलग से कोई जानकारी नहीं देते हैं, बल्कि यह कुल खर्चे का ही हिस्सा बना लिया जाता है। इसी के चलते अब आयोग ने उम्मीदवारों के खर्चे में एक और कॉलम बढ़ा दिया है। इसमें प्रत्याशियों को डिजिटल प्रचार में हुए खर्चों की अलग जानकारी देनी होगी। 
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चुनाव आयोग की ओर से किए गए बदलावों के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों को अलग कॉलम में अपने डिजिटल अभियान के खर्चों का ब्योरा देना होगा। गौरतलब है कि 
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कोविड-19 महामारी के कारण ईसी ने रैलियों, रोड शो, नुक्कड़ सभाओं समेत अन्य सभी तरह की भीड़ इकट्ठा करने वाले समारोह पर 22 जनवरी तक प्रतिबंध लगा रखा है। इसी वजह से फिलहाल सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के लिए डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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इस फैसले को लेकर एक अधिकारी ने कहा, "पार्टियां और उम्मीदवार इस तरह के खर्च का खुलासा खुद करते थे। डिजिटल वैन जैसी चीजों पर खर्च का ब्योरा देते थे। पर इस चुनाव में डिजिटल खर्चों को दर्ज करने के लिए एक अलग कॉलम बनाया गया है।" गौरतलब है कि जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा-10ए के तहत अगर कोई उम्मीदवार निर्धारित समय में चुनावी खर्च का ब्योरा देने में असफल रहता है, तो चुनाव आयोग उसे तीन साल की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर सकता है।


चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले ही निर्वाचन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार द्वारा चुनाव प्रचार में उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा में वृद्धि की गई थी। पांच राज्यों के चुनाव के लिए चुनाव आयोग के यही नियम लागी रहेंगे। 
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