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Varanasi Lok Sabha: पीएम मोदी से पहले ये मुख्यमंत्री भी रहे यहां से सांसद, ऐसा है वाराणसी सीट का सियासी इतिहास

Thu, 29 Feb 2024 06:20 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 29 Feb 2024 06:20 PM IST
सार

Varanasi Lok Sabha: 1957 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट अस्तित्व में आई थी। यहां हुए पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। 2014 और 2019 चुनावों में यह सीट काफी चर्चा में रही। अमर उजाला की खास चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में जानते हैं यहां का पूरा सियासी गणित...

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Election 2024: Varanasi lok sabha seat Profile And History
वाराणसी लोकसभा सीट - फोटो : Amar ujala

विस्तार

न मुझे किसे ने भेजा है, न मैं यहां आया हूं, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया…2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी लोकसभा सीट पर नामांकन करने करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ये बातें कही थीं। यहां से जीतकर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। पीएम मोदी लगातार दो बार वाराणसी सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं।  
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वाराणसी लोकसभा सीट भी कई मायनों में खास है। अमर उजाला की खास चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात इसी वाराणसी की करेंगे…। 

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कभी कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट लंबे समय ये भाजपा के पास है। वाराणसी सीट का सियासी गणित कैसा है? इस सीट का इतिहास क्या कहता है? अब तक जितने लोकसभा चुनाव हुए उसमें यहां कब क्या हुआ? कैसे वाराणसी कांग्रेस के गढ़ से भाजपा के गढ़ में बदल गई। कभी लेफ्ट जहां जीतता था वहां राइट ने कब दस्तक दी। आइये इन सभी सवाल के जवाब जानने की कोशिश करते हैं। 

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Election 2024: Varanasi lok sabha seat Profile And History
वाराणसी लोकसभा सीट - फोटो : Amar ujala
बनारस सीट का सियासी गणित क्या है?
पौराणिक रूप से वाराणसी संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक है। हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र नगरों में इसकी गिनती होती है। वारणसी को ‘बनारस’ और ‘काशी’ भी कहते हैं। वाराणसी की संस्कृति का श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर और गंगा नदी से अटूट रिश्ता है। ये शहर सहस्रों वर्षों से भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है।

वापस वाराणसी लोकसभा सीट के सियासी इतिहास की ओर लौटते हैं। साल 1957 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। 1951-52 में जब पहले आम चुनाव हुए थे तब वाराणसी जिले में बनारस पूर्व, बनारस पश्चिम और बनारस मध्य नाम से तीन लोकसभा सीटें थीं। 1957 में वाराणसी सीट अस्तित्व में आई। यहां हुए पहले आम चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस की तरफ से उतरे रघुनाथ सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार शिवमंगल राम को 71,926 वोट से शिकस्त दी थी। 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस के रघुनाथ सिंह फिर से जीतने में सफल रहे। उन्होंने इस बार जनसंघ उम्मीदवार रघुवीर को 45,907 वोटों से हराया। 

1967 का लोकसभा चुनाव वो पहला लोकसभा चुनाव था जब वाराणसी सीट पर गैर कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली। उस चुनाव में यहां से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की। भाकपा उम्मीदवार एसएन सिंह ने कांग्रेस के आर. सिंह को 18,167 मतों से हरा दिया। 

हालांकि, 1971 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने वाराणसी सीट पर जीत दर्ज की। पार्टी की तरफ से उतरे जाने-माने शिक्षाविद राजा राम शास्त्री ने यहां पार्टी को जीत दिलाई। शास्त्री ने भारतीय जनसंघ के कमला प्रसाद सिंह को 52,941 वोट से हराया। 

Election 2024: Varanasi lok sabha seat Profile And History
वाराणसी लोकसभा सीट - फोटो : Amar ujala
आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने गंवाई सीट 
1971 के चुनाव के बाद और अगले चुनाव से पहले देश ने आपातकाल का दौर देखा। आपातकाल खत्म हुआ तो 1977 में फिर से चुनाव हुए। जनता लहर में कांग्रेस बुरी तरह हारी। वाराणसी सीट भी पार्टी ने गंवा दी। यहां कांग्रेस के राजा राम को भारतीय लोक दल के चंद्रशेखर ने 1,71,854 वोट से करारी हार झेलनी पड़ी। 

1980 के लोकसभा चुनाव एक बार फिर कांग्रेस ने वाराणसी सीट पर वापसी की। यहां कांग्रेस की तरफ से उतरे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने पार्टी को जीत दिलाई। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के प्रत्याशी राज नारायण के खिलाफ 24,735 मतों से जीत दर्ज की। 1984 में भी कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने में कामयाब रही। इस चुनाव में पार्टी के श्याम लाल यादव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रत्याशी ऊदल के मुकाबले 94,430 वोटों से जीते।

1989 के लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस के हाथ से यह सीट निकल गई। इस बार जनता दल के अनिल शास्त्री ने कांग्रेस उम्मीदवार श्याम लाल यादव को 1,71,603 वोटों से हरा दिया। 

भाजपा ने दी दस्तक और लगा दी जीत की हैट्रिक
साल 1991 के लोकसभा चुनाव में पहली बार वाराणसी सीट पर भाजपा को जीत मिली। भाजपा के शीश चंद्र दीक्षित ने माकपा के राजकिशोर को 40,439 मतों से शिकस्त दी। तब से यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। 1991 के बाद 1996 में भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल ने जीत दर्ज की। जायसवाल ने माकपा के राजकिशोर को 1,00,692 वोटों से हराया।

1998 में लोकसभा चुनाव में भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल ने लगातार दूसरी बार वाराणसी लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की। जायसवाल के खिलाफ माकपा से उतरे दीनानाथ सिंह यादव को 1,51,946 वोटों से करारी हार मिली। 

1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल ने जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने इस बार कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा को 52,859 मतों से हराया। 

कांग्रेस के लिए राजेश कुमार मिश्रा ने कराई वापसी 
2004 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी लोकसभा सीट पर 15 साल बाद कांग्रेस ने वापसी की। पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर हारने वाले राजेश कुमार मिश्रा ने अबकी बार यहां जीत दर्ज की और भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल को जीत के सिलसिले को भी थाम दिया। राजेश मिश्रा यह चुनाव 57,440 मतों से जीते। 

जब मुरली मनोहर जोशी ने मुख्तार अंसारी को हराया
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट एक बार फिर से देश की वीवीआईपी सीटों में शामिल हो गई। उस चुनाव में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी यहां से मैदान में थे। उनके मुकाबले बसपा ने बाहुबली मुख्तार अंसारी को उतार दिया था। जब नतीजे आए तो करीबी मुकाबले में जोशी जीत दर्ज करने में सफल रहे। भाजपा इस चुनाव में 17,211 वोटों से जीत गई। 

2014 में वाराणसी से जीत के बाद प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी
अब बारी थी 2014 के लोकसभा चुनाव की। चुनावों से पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दिया। वहीं, जब चुनाव लड़ने की बारी आई तो नरेंद्र मोदी ने वडोदरा के साथ-साथ वाराणसी सीट से भी नामांकन किया। उधर मोदी के खिलाफ आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल तो कांग्रेस से अजय राय मैदान में थे। उस चुनाव में वाराणसी देश की सबसे चर्चित सीट बन गई।  

इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर नरेंद्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले। वहीं दूसरे स्थान पर रहे केजरीवाल के पक्ष में 2,09,238 लोगों ने वोट किया। इस तरह से नरेंद्र मोदी 3,71,784 वोटों से चुनाव जीतने में सफल रहे। इसी जीत के साथ नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे और देश के प्रधानमंत्री भी बने। प्रधानमंत्री मोदी को वडोदरा सीट पर भी जीत मिली, उन्होंने प्रतिनिधित्व के लिए वाराणसी को चुना। 

वाराणसी से दूसरी बार नरेंद्र मोदी जीते और बने पीएम
अब बात करते हैं पिछले लोकसभा चुनाव की। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उतरे। उनके सामने कांग्रेस ने अजय राय और सपा ने शालिनी यादव को उतारा। नतीजे एक बार फिर भाजपा के पक्ष में रहे और यहां प्रधानमंत्री ने सपा की शालिनी यादव को 4,79,505 मतों से बड़े अंतर से शिकस्त दी। इस चुनाव में नरेंद्र मोदी को 6,74,664 वोट, सपा उम्मीदवार शालिनी को 1,95,159 और कांग्रेस के अजय राय को 1,52,548 वोट मिले। 

इस तरह से बतौर वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी एक बार फिर संसद पहुंचे। वहीं भाजपा ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। वाराणसी सांसद नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या तीसरी बार यहां से उम्मीदवार बनेंगे।
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