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Maharashtra CM: अमर उजाला की खबर पर लगी मुहर, एकनाथ शिंदे बने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री
Thu, 30 Jun 2022 07:52 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 30 Jun 2022 07:52 PM IST
सार
फडणवीस के एलान से पहले हर कोई कयास लगा रहा था कि वे ही मुख्यमंत्री पद ग्रहण करेंगे और उपमुख्यमंत्री पद एकनाथ शिंदे को सौंपेंगे। हालांकि, अमर उजाला ने पहले ही खुलासा कर दिया था कि भाजपा शिंदे को ही राज्य का सीएम पद सौंपना तय कर चुकी है।
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अमर उजाला की खबर पर मुहर।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद गुरुवार को राजनीतिक तस्वीर काफी साफ हो गई है। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया। फडणवीस के इस एलान से पहले हर कोई कयास लगा रहा था कि वे ही मुख्यमंत्री पद ग्रहण करेंगे और उपमुख्यमंत्री पद एकनाथ शिंदे को सौंपेंगे। हालांकि, अमर उजाला ने पहले ही खुलासा कर दिया था कि भाजपा शिंदे को ही राज्य का सीएम पद सौंपना तय कर चुकी है। इस बीच हम आपको वह वजह भी बता रहे हैं, जिसके चलते भाजपा ने बागी विधायकों के गुट को समर्थन देते हुए एकनाथ शिंदे को शीर्ष पद सौंपने का फैसला किया।
क्यों भाजपा ने मुख्यमंत्री पद शिंदे को सौंपा?
2019 के चुनाव के बाद जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकी तो पार्टी ने राकांपा से बगावत करने वाले अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला किया। हालांकि, भाजपा की यह तरकीब फेल हो गई थी। ऐसे में इस बार पहले से ही एकनाथ शिंदे के हाथ में पूरी लगाम दिखाई दी। भाजपा भी लंबे समय तक सत्ता से बाहर रही है, इसलिए पद पर उसका दावा कमजोर रहा है।
चूंकि एकनाथ शिंदे जानते थे कि सरकार बनाने की चाभी उनके पास थी। इसलिए भाजपा ने भी उनसे ज्यादा तोलमोल नहीं किया। इतना ही नहीं खुद भाजपा ऑपरेशन लोटस के जरिए इस सरकार को गिराने का कलंक अपने सिर नहीं लेना चाहती थी। फडणवीस का मत रहा है कि भाजपा अगर खुद चुनाव जीतकर आती तो ही वे सीएम बनते। ऐसे में शिंदे गुट का पलड़ा भारी रहने की वजह से उद्धव ने यह पद शिंदो को सौंप दिया।
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फडणवीस की क्या भूमिका होगी?
मुमकिन है कि देवेंद्र फडणवीस आगे गठबंधन में बिल्कुल वैसी ही भूमिका निभाएंगे, जैसी महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शरद पवार निभा रहे थे। यानी परदे के पीछे से वे ही सरकार के बड़े फैसले लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का भी कहना है कि सरकार पलटने का श्रेय फडणवीस को दिया जाएगा। लेकिन बागी गुट के सत्ता की चाभी बनने की वजह से फडणवीस फिलहाल सीएम पद से दूर रहें।
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क्यों भाजपा ने मुख्यमंत्री पद शिंदे को सौंपा?
2019 के चुनाव के बाद जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकी तो पार्टी ने राकांपा से बगावत करने वाले अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला किया। हालांकि, भाजपा की यह तरकीब फेल हो गई थी। ऐसे में इस बार पहले से ही एकनाथ शिंदे के हाथ में पूरी लगाम दिखाई दी। भाजपा भी लंबे समय तक सत्ता से बाहर रही है, इसलिए पद पर उसका दावा कमजोर रहा है।
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चूंकि एकनाथ शिंदे जानते थे कि सरकार बनाने की चाभी उनके पास थी। इसलिए भाजपा ने भी उनसे ज्यादा तोलमोल नहीं किया। इतना ही नहीं खुद भाजपा ऑपरेशन लोटस के जरिए इस सरकार को गिराने का कलंक अपने सिर नहीं लेना चाहती थी। फडणवीस का मत रहा है कि भाजपा अगर खुद चुनाव जीतकर आती तो ही वे सीएम बनते। ऐसे में शिंदे गुट का पलड़ा भारी रहने की वजह से उद्धव ने यह पद शिंदो को सौंप दिया।
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फडणवीस की क्या भूमिका होगी?
मुमकिन है कि देवेंद्र फडणवीस आगे गठबंधन में बिल्कुल वैसी ही भूमिका निभाएंगे, जैसी महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शरद पवार निभा रहे थे। यानी परदे के पीछे से वे ही सरकार के बड़े फैसले लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का भी कहना है कि सरकार पलटने का श्रेय फडणवीस को दिया जाएगा। लेकिन बागी गुट के सत्ता की चाभी बनने की वजह से फडणवीस फिलहाल सीएम पद से दूर रहें।