अमर उजाला विशेष: संक्रमण के बाद सूंघने की क्षमता लौटने में लग सकते हैं आठ माह
- शोध को फ्रांस के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ स्ट्रॉसबर्ग की मंजूरी
- 6 रोगियों के सूंघने और स्वाद की क्षमता काफी हद तक लौटी
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विस्तार
कोरोना को जब वर्ष 2020 में महामारी घोषित किया गया तो उस दौरान संक्रमण के कारण लोगों के सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता प्रभावित होने लगी थी। इस तकलीफ की तह तक जाने के लिए जून वैज्ञानिकों की एक टीम ने 2020 से मार्च 2021 तक कुल 97 मरीजों पर शोध किया तो जिसे अब फ्रांस की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ स्ट्रॉसबर्ग के एथिक्स कमेटी ने भी मंजूरी दे दी है।
- आखिर क्या पता चला?
- 97 मरीजों पर शोध जिनमें आरटी-पीसीआर से कोरोना की पुष्टि
- 7 दिन औसतन मरीजों को ओल्फैक्ट्री डिसऑर्डर से जुड़ी तकलीफ
- 17 मरीजों को चार महीने तक डॉक्टरों ने फॉॅलोअप में रखा
- 6 रोगियों के सूंघने और स्वाद की क्षमता काफी हद तक लौटी
- 7 मरीजों में सीमित सुधार देखा गया, 4 में कोई सुधार नहीं
किसको कैसी तकलीफ
- 97 में से 67 महिलाएं जिनकी औसत उम्र 38.8 वर्ष, इनमें सात दिन से अधिक समय तक स्वाद जाने की गंभीर तकलीफ
- 51 मरीजों के ओलफैक्ट्री जांच हुई, 46 मरीजों की चार माह बाद दोबारा विस्तार से जांच की गई और स्थिति देखी गई
- 51 में से 23 मरीज चार माह बाद पूरी तरह स्वस्थ पाए गए, उनके स्वाद और सूंघने की क्षमता सामान्य दिखी
- 27 मरीज (52.9) फीसदी रोगियों मे हल्का सुधार देखा गया था जबकि एक मरीज में कोई सुधार नहीं
- 8 मरीजों 15.7 फीसदी रोगियों को करीब आठ माह तक सूंघने संबंधी तकलीफ रही। छह और मरीजों में सामान्य सुधार।
आठ माह बाद सिर्फ दो में तकलीफ
वैज्ञानिकों के अनुसार संक्रमण के आठ माह बाद 51 में से 49 रोगी (96.1) फीसदी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गए थे।
- 1 मरीजों में एक साल से अधिक समय तक सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता प्रभावित दिखी जिसे हाइपोस्मिया कहते हैं।
- 1 मरीज में पारोस्मिया का पता चला जो एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी तकलीफ है। इसमें व्यक्ति गंध को लेकर भ्रमित रहता है।
ओलफैक्ट्री
ओल्फैक्ट्री सिस्टम मस्तिष्क के टेंपोरल लोब में रहता है जिसमें सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता होती है। वायरस से ओलफैक्ट्री न्यूरॉन्स को नुकसान होता है जिसके कारण स्वाद और सूंघने की क्षमता लंबे समय तक प्रभावित होती है।