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कश्मीर में पाक परस्त तंत्र खत्म करने की कवायद तेज, अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के साथ हाई अलर्ट

Sat, 23 Feb 2019 09:38 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sat, 23 Feb 2019 09:38 PM IST
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efforts to end Pakistan favoring system in Kashmir, High Alert

केंद्र सरकार ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पड़ोसी मुल्क पर चौतरफा दबाव बनाने के लिए घाटी में मौजूद पाकिस्तान परस्त तंत्र को खत्म करने की कवायद तेज कर दी है। अलगाववादियों, जमात-ए-इस्लामी और पत्थरबाजों के खिलाफ सख्ती उसी का नतीजा है। इन पर पाकिस्तान से आने वाले आतंकियों को मदद पहुंचने, शरण देने के साथ ही स्थानीय युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का आरोप है।

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सरकार अब पाक आतंकियों के मददगारों को किसी भी सूरत में छोड़ने के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पूरे कश्मीर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहीं, हाल के वर्षों की सबसे अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। पाकिस्तान और उसके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत को चीन को छोड़कर अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस समेत लगभग सभी देशों का समर्थन मिल गया है। 
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सूत्रों के अनुसार, हालात भारत के पक्ष में हैं, लेकिन पाकिस्तान को कब सबक सिखाया जाएगा, कैसे और किस तरह से, यह पूरी तरह गुप्त रखा जा रहा है। वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सर्जिकल स्ट्राइक से भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इस बार पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक से बचने के कदम उठा चुका है। 
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विशेषज्ञों मानना है कि भारत के पास पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान पहुंचाने की पूरी क्षमता है। हमारी थलसेना, वायुसेना और जलसेना पाकिस्तान से कहीं बेहतर व मजबूत हैं। हमारे हवाई जहाज 15-20 मिनट के नोटिस पर पाकिस्तान के अंदर हमले कर सुरक्षित वापस लौटने में समर्थ हैं। 

श्रीनगर में तैनात की गई बीएसएफ, जवानों की छुट्टियां रद्द

पाकिस्तान से लगती सीमा की सुरक्षा में तैनात बीएसएफ को श्रीनगर में तैनात किया गया है। नब्बे के दशक के बाद पहली बार इसकी तैनाती की गई है। अभी तक श्रीनगर में सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के पास था। इसके साथ ही कश्मीर में तैनात सभी जवानों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, रिजर्व सैनिकों को अल्प नोटिस पर कूच करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

जरूरी सामानों का भंडार करने का निर्देश

हालात को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने संभावित दिक्कतों से बचने के लिए लोगों को जरूरी दवा और राशन इकट्ठा करने को कहा है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। राशन की दुकानों को रविवार को खुले रखने को कहा गया है। प्रशासन के आदेश के बाद अनहोनी की आशंका के चलते लोगों की भीड़ पेट्रोल पंप स्टेशनों, दुकानों और बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ पड़ी। 

खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को संपर्क में रहने का निर्देश

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पूरी घाटी में अफवाहें फैलाकर अशांति फैलाने की कोशिश की जा सकती है। लिहाजा सरकार ने खुफिया एजेंसियों को सकर्त रहते हुए सुरक्षाबलों से लगातार संपर्क में रहने को कहा है।

जेट विमानों ने देर रात भरी उड़ान, दहशत में आए लोग

वायुसेना के जेट विमानों ने शनिवार तड़के 1.30 बजे तक आसमान में उड़ान भरी। इसके चलते लोग लड़ाई छिड़ने के डर से दहशत में आ गए। हालांकि, वायुसेना अधिकारियों ने इसे नियमित अभ्यास बताया।

अभी कहां किसकी तैनाती

नियत्रंण रेखा - सेना
अंतरराष्ट्रीय सीमा - बीएसएसफ 
जम्मू-कश्मीर के अंदर - सीआरपीएफ 

क्या है अनुच्छेद-35ए

अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर को राज्य के रूप में विशेष अधिकार देता है इसके तहत दिए गए अधिकार स्थायी निवासियों से जुड़े हुए हैं, इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के समय दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दे अथवा नहीं दे।

कब जुड़ा अनुच्छेद-35ए

14 मई 1954 : अनुच्छेद 35ए को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35ए जोड़ दिया गया।

नहीं खरीद सकते जमीन

अनुच्छेद 35ए अनुच्छेद 370 का ही हिस्सा है। इसके कारण दूसरे राज्यों का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में न तो संपत्ति खरीद सकता है और न ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है।

जम्मू-कश्मीर का संविधान

जम्मू कश्मीर का संविधान 1956 में बनाया गया था। इसके मुताबिक स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है, जो 14 मई, 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो। साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो। स्थायी नागरिकों को विधानसभा चुनाव लड़ने व मतदान करने की अनुमति है। बाहरी व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती है ।

खत्म हो जाते हैं लड़कियों के अधिकार

अनुच्छेद 35ए के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर की लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

क्यों उठी हटाने की मांग

अनुच्छेद 35ए को हटाने के लिए दलील दी जा रही है कि इसे संसद के जरिये लागू नहीं कराया गया था। दूसरी दलील है कि देश के विभाजन के वक्त बड़ी तादाद में पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आए। इनमें लाखों की तादाद में शरणार्थी जम्मू-कश्मीर में भी रह रहे हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने अनुच्छेद-35ए के जरिये इन सभी भारतीय नागरिकों को सूबे के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया। इन वंचितों में 80 फीसदी लोग पिछड़े और दलित हिंदू समुदाय से हैं। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में विवाह कर बसने वाली महिलाओं और अन्य भारतीय नागरिकों के साथ भी राज्य सरकार अनुच्छेद-35ए की आड़ में भेदभाव करती है। 

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