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पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर की एडिटर्स गिल्ड ने की निंदा
Sat, 30 Jan 2021 02:58 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 30 Jan 2021 02:58 AM IST
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एडिटर्स गिल्ड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्टिंग करने पर वरिष्ठ संपादकों एवं पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के कदम की शुक्रवार को कड़ी निंदा की। गिल्ड ने कहा, यह मीडिया को डराने-धमकाने, प्रताड़ित करने और दबाने की कोशिश है।
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गिल्ड ने अपने बयान में कहा, एफआईआर फौरन वापस ली जाएं और मीडिया को बिना किसी डर के आजादी के साथ रिपोर्टिंग करने की इजाजत दी जाए। एक प्रदर्शनकारी की मौत से जुड़ी घटना की रिपोर्टिंग करने, घटनाक्रम की जानकारी अपने निजी सोशल मीडिया हैंडल पर और प्रकाशन समूहों को देने पर पत्रकारों को खासतौर पर निशाना बनाया गया।
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गिल्ड ने कहा, यह ध्यान रहे कि प्रदर्शन एवं कार्रवाई वाले दिन, घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों तथा पुलिस की ओर से अनेक सूचनाएं मिलीं। ऐसे में पत्रकारों के लिए यह स्वाभाविक बात थी कि वे इन जानकारियों की रिपोर्ट करें। यह पत्रकारिता के स्थापित नियमों के अनुरूप ही था। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश पुलिस के डराने-धमकाने के तरीके की कड़ी निंदा करता है, जिन्होंने किसानों की प्रदर्शन रैलियों और हिंसा की रिपोर्टिंग करने पर वरिष्ठ संपादकों एवं पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कीं।
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अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया था कि ट्रैक्टर परेड और उस दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में नोएडा पुलिस ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर और छह पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया है। जिन पत्रकारों के नाम प्राथमिकी में हैं, उनमें मृणाल पांडे, राजदीप सरदेसाई, विनोद जोस, जफर आगा, परेश नाथ और अनंत नाथ शामिल हैं। एक अनाम व्यक्ति के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।