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ED: 'मीठी नदी' से गाद निकालने में घोटाला, इंजीनियर ने दूसरे लोगों से मिलकर लगाया BMC को 65 करोड़ का चूना

Sat, 07 Jun 2025 09:13 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 07 Jun 2025 09:13 PM IST
सार

ईडी की जांच और उक्त तलाशी अभियान के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया संकेत देते हैं कि प्रशांत रामगुडे, भूपेंद्र पुरोहित, जय जोशी, केतन कदम, मेसर्स मैटप्रॉप टेक्निकल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी और अन्य ने मीठी नदी से गाद निकालने से संबंधित बीएमसी के टेंडरों में हेरफेर करने के इरादे से एक कार्टेल बनाने के लिए मिलीभगत की।

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ED Scam in removing silt from 'Mithi River', engineer along with other people defrauded BMC of Rs 65 crore
ईडी की कार्रवाई - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई जोनल कार्यालय ने 'मीठी नदी' से गाद निकासी घोटाले के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दर्ज धन शोधन मामले में चल रही जांच के संबंध में मुंबई, कोच्चि और त्रिशूर में 18 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसतलाशी अभियान में प्रशांत रामगुडे (बीएमसी इंजीनियर), भूपेंद्र पुरोहित (बीएमसी ठेकेदार), मेसर्स मैटप्रॉप टेक्निकल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, जय जोशी (मेसर्स विर्गो स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक), केतन कदम (मेसर्स वोडर इंडिया एलएलपी के नियंत्रक) और सैंटिनो रोक्को मोरिया/डिनो मोरिया (केतन कदम के करीबी सहयोगी) से जुड़े कार्यालय/आवासीय परिसर शामिल थे। ईडी ने बॉम्बे नगर निगम को 65 करोड़ रुपये से अधिक का गलत नुकसान पहुंचाने के आरोप में 13 व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। 

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ईडी की जांच और उक्त तलाशी अभियान के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया संकेत देते हैं कि प्रशांत रामगुडे, भूपेंद्र पुरोहित, जय जोशी, केतन कदम, मेसर्स मैटप्रॉप टेक्निकल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी और अन्य ने मीठी नदी से गाद निकालने से संबंधित बीएमसी के टेंडरों में हेरफेर करने के इरादे से एक कार्टेल बनाने के लिए मिलीभगत की। इस कार्रवाई ने मीठी नदी से गाद निकालने के ठेके देने में प्रभावी रूप से एकाधिकार प्रदान किया। गाद निकालने के कामों के लिए बढ़ी हुई दरों पर भुगतान किया गया। 
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इसके परिणामस्वरूप ठेकेदारों और संबंधित पक्षों को अनुचित लाभ हुआ। नतीजा, सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हुआ। इन अनुचित वित्तीय लाभों को कुछ फर्जी कंपनियों/फर्मों के माध्यम से छुपाया गया है, जो केतन कदम, भूपेंद्र पुरोहित, प्रशांत रामगुडे और अन्य निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से बनाई गई थीं।
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तलाशी के दौरान ईडी ने 7 लाख रुपये नकद जब्त किए और 22 बैंक खाते/एफडीआर तथा 01 डीमैट खाते को फ्रीज कर दिया। अब तक जब्त/फ्रीजिंग पीओसी की कुल राशि 1.25 करोड़ रुपये (लगभग) से अधिक है। इसके अलावा, तलाशी के दौरान कुछ डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जो पीएमएलए, 2002 के तहत आगे की कार्यवाही के लिए प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।

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