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चीनी सट्टा एप संचालित करने वाली कंपनियों पर ईडी का छापा, चार बैंक खाते फ्रीज

Sun, 30 Aug 2020 01:14 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 30 Aug 2020 01:14 AM IST
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ed raids on the companies operating chinese speculative apps
ईडी - फोटो : अमर उजाला

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चीन के ऑनलाइन सट्टा एप और वेबसाइटों का संचालन करने वाली कंपनियों के कई परिसरों पर छापा मारा। इस कार्रवाई के बाद ईडी ने चार एचएसबीसी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। इन खातों में 46.96 करोड़ रुपये जमा हैं।

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ईडी ने एक बयान में कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत शुक्रवार को दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और पुणे में 15 जगहों पर छापा मारा गया।
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यह कार्रवाई ऑनलाइन सट्टा एप के गैरकानूनी ढंग से संचालन में शामिल कंपनियों, उनके निदेशकों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के पंजीकृति कार्यालयों पर की गई। इन एप और वेबसाइटों को देश से बाहर होस्ट किया जा रहा था। छापे के दौरान ईडी ने 17 हार्ड डिस्क, पांच लैपटॉप, फोन, अहम दस्तावेज जब्त किए। साथ ही चार एचएसबीसी बैंक खातों को भी फ्रीज किया।
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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तेलंगाना पुलिस द्वारा इस साल की शुरुआत में हैदराबाद में आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर दर्ज किया है। पुलिस ने डॉकीपे टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, लिंकयून टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य तथा एक चीनी नागरिक समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही पुलिस ने चीनी नागरिक यान हाओ, धीरज सरकार और अंकित कपूर को गिरफ्तार किया था।

भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से बनाई कंपनियां, बाद में चीनी नागरिक बन बैठे निदेशक
जांच एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि जांच में पाया गया कि कुछ भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से कुछ चीनी नागरिकों ने कई भारतीय कंपनियां बना ली हैं। शुरुआत में डमी भारतीय निदेशकों को कंपनियों में शामिल किया गया और कुछ समय बाद चीनी नागरिकों ने यहां आकर इन कंपनियों के निदेशक का पद हासिल कर लिया।

इन लोगों ने कुछ स्थानीय लोगों को भर्ती कर एचएसबीसी बैंक में खाता खुलवाया और पेटीएम, कैशफ्री, रेजरपे आदि में ट्रेड अकाउंट खोला। एजेंसी का आरोप है कि ऑनलाइन वैलेट की निगरानी के प्रभावी तंत्र की कमी और संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट नहीं करने के चलते आरोपियों को देशभर में अपना संचालन करने में मदद मिली।

हजारों करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन
एजेंसी ने कहा कि उसे डॉकीपे टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के दो बैंक खातों की जांच से पता चला कि पिछले साल कंपनी के खाते में 1268 करोड़ रुपये आए और इनमें से 300 करोड़ रुपये पेटीएम पेमेंट गेटवे के जरिए आए और करीब 600 करोड़ रुपये पेटीएम पेमेंट गेटवे के जरिए हस्तांतरित किए गए।

इसी तरह के पैटर्न का खुलासा लिंकयून टेक्नोलॉजी के बैंक खातों की जांच से हुआ। इन खातों से 120 करोड़ रुपये देश से बाहर भी भेजे गए। साथ ही अन्य भारतीय कंपनियों के साथ भी वित्तीय लेनदेन हुआ जिनका कोई स्पष्टीकरण नहीं है। ये कंपनियों भारतीय उपभोक्ताओं के लिए चीनी डेटिंग एप का ऑनलाइन संचालन करती हैं।


अमेरिका के क्लाउडफेयर से होस्ट होती थी एक जैसी दिखने वाली वेबसाइटें
आरोपी कंपनियों ने एक जैसी दिखने वाली कई वेबसाइटें बनाई थी और इन्हें अमेरिका के क्लाउडफेयर से होस्ट किया जाता था। ये वेबसाइटें भोले भाले लोगों को सदस्य बनने के लिए लुभाती थी और विभिन्न ऑनलाइन एप पर सट्टा लगाने के बाद आकर्षक इनाम का लालच देती थीं। इन सट्टे वाले गेम के लिए नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ये कंपनियां एजेंटों के एक नेटवर्क को हायर किया था।


टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए लोगों को लुभाते
नेटवर्क के एजेंट टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप बनाते थे और लाखों भोले भाले भारतीयों को आकर्षित करते थे। नए सदस्यों को आमंत्रित करने के लिए रेफररल कोड का इस्तेमाल करते थे। इसमें उन्हें कमीशन मिलता था।

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