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ED की रेड: अफ्रीकी खदानों में 1035 करोड़ रुपये के निवेश का रिकॉर्ड गायब, एमडी को हर महीने 17000 रुपये वेतन
Wed, 24 Jun 2026 05:44 PM IST
Rahul Kumar
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 24 Jun 2026 05:44 PM IST
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ED
- फोटो : ED
ईडी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के तहत बंगलूरू और मुंबई में 9 जगहों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। फेमा, 1999 के नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े लोगों की चल रही जांच के सिलसिले में कई अहम दस्तावेज सामने आए हैं। अफ्रीकी खदानों में 1035 करोड़ रुपये के निवेश का रिकॉर्ड गायब है तो वहीं मैनेजिंग डायरेक्टर 'एमडी' को हर महीने मात्र 17000 रुपये का वेतन दिया जाना, ये सब बातें ईडी की रेड में पता चली हैं।
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जांच में कई अन्य बातें सामने आई हैं, जिनमें विदेशी लेन-देन का रिकॉर्ड न होना, आरईएल अपने विदेशी लेन-देन (जैसे आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़ी लेन-देन की रकम की वसूली और भुगतान) से जुड़े दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रही, जिससे इन लेन-देन की असलियत की पुष्टि करना लगभग नामुमकिन हो गया। उदाहरण के लिए, अफ्रीकी खदानों में 1035 करोड़ रुपये के निवेश के दावे से जुड़े उस समय के रिकॉर्ड और दस्तावेज़ न तो मिले और न ही कंपनी ने अब तक उपलब्ध कराए हैं।
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लगभग 3000 करोड़ रुपये के विदेशी व्यापार से जुड़े भुगतान और वसूली के बीच अस्पष्ट नेटिंग / सेट-ऑफ कंपनी यूएई और विदेशों में मौजूद संदिग्ध पार्टियों के साथ व्यापार से जुड़े भुगतान एवं वसूली को आपस में एडजस्ट (सेट-ऑफ) करने में शामिल पाई गई है। तलाशी के दौरान स्टॉक की फिजिकल जांच से पता चला कि फैक्ट्री के रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और मौके पर मिले असल स्टॉक के बीच लगभग 40% का अंतर था।
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मुख्य अधिकारियों को बहुत कम या बहुत ज़्यादा वेतन/पारिश्रमिक दिया जा रहा था। कंपनी के मुख्य बिजनेस इंडिकेटर्स से पता चला कि कामकाज के सामान्य तरीकों से काफी अलग चीजें हो रही थीं। उदाहरण के लिए, कंपनी के कामकाज के पैमाने की तुलना में सीनियर मैनेजमेंट को दिया जाने वाला वेतन असामान्य रूप से कम था। चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर को हर महीने सिर्फ़ 17,000 रुपये मिलते थे, जबकि कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दिखाया था।
संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और शेयरों में भी हेरफेर मिली है। जांच में आरईएल के शेयरों में कुछ लोगों द्वारा किए गए संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड का पता चला है। इन लोगों के नाम 'इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स' द्वारा जारी लीक दस्तावेजों में भी शामिल हैं, जिससे विदेश में छिपे हुए संभावित कनेक्शन का संकेत मिलता है। इनकी जांच की जा रही है। उदाहरण के लिए, पता चला कि एनआरआई बेनामीदारों का इस्तेमाल करके शेयरों में हेरफेर के ज़रिए भारत से 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम बाहर भेजी गई। तलाशी की कार्रवाई के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं।