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नौकरी-निवेश की आड़ में धोखाधड़ी: शिक्षित लोगों के गिरोह ने 641 करोड़ जुटाए; दुबई लिंक और एक पते पर 20 कंपनियां

Thu, 05 Mar 2026 09:06 PM IST
Jyoti Bhaskar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Thu, 05 Mar 2026 09:06 PM IST
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ED Probing Fraud under guise of job and investment Rs 641 crore raised Dubai link 20 companies at one address
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) - फोटो : Adobe Stock

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने साइबर धोखाधड़ी के एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें शिक्षित लोगों के एक गिरोह ने 641 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। ये पैसा, भोले-भाले लोगों, जिन्हें नौकरी की तलाश थी, से धोखाधड़ी कर वसूला गया। अनेक लोग ऐसे भी थे, जो अपने धन को  निवेश करना चाहते थे, उनके साथ भी ठगी की गई। जब करोड़ों रुपये एकत्रित हो गए, तब उन्होंने फर्जी संस्थाओं का जाल बुना। यह इसलिए किया गया ताकि वे पैसे को सही दिखा सकें। वॉलेट के जरिए उस पैसे को विदेश में स्थानांतरित किया गया। भारतीय बैंकों द्वारा जारी वीजा और मास्टर डेबिट कार्डों का उपयोग करके यूएई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म 'पीवाईवाईपीएल' में धन हस्तांतरित किया गया। इस मामले में अब प्रमुख आरोपी सीए अशोक कुमार शर्मा और सीए भास्कर यादव को गिरफ्तार किया गया है। 

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फर्जी संस्थाएं/कंपनियां खोली गई...  
ईडी की दिल्ली शाखा की जांच में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इसमें देश भर के भोले-भाले नागरिकों को निवेश के अवसर देने, अंशकालिक नौकरी योजनाएं, क्यूआर कोड आधारित घोटाला, फिशिंग ऑपरेशनों और अन्य फर्जी डिजिटल प्रलोभनों के बहाने धन हस्तांतरित करने के लिए प्रेरित किया गया। साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त लगभग 641 करोड़ रुपये की राशि को पहले कुछ टेलीग्राम समूहों के सदस्यों द्वारा प्रबंधित और संचालित फर्जी खातों में जमा किया गया। इसके बाद धन के स्रोत को छिपाने और खंडित करने के लिए फर्जी संस्थाएं खोली गई। इन फर्जी संस्थाओं/कंपनियों के जरिए पैसा स्थानांतरित किया गया।
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पीवाईवाईपीएल वॉलेट का इस्तेमाल... 
मनी लॉन्ड्रिंग के बाद, भारतीय बैंकों द्वारा जारी वीजा और मास्टर डेबिट कार्डों का उपयोग करके यूएई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म 'पीवाईवाईपीएल' में धन हस्तांतरित किया गया। यह संस्था, अबू धाबी ग्लोबल मार्केट फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटरी अथॉरिटी (एडीजीएम) द्वारा विनियमित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग किए जाने वाले प्रीपेड कार्ड प्रदान करती है। पीवाईवाईपीएल वॉलेट से, धनराशि को या तो विदेशों में, विशेष रूप से दुबई में एटीएम और पीओएस लेनदेन के माध्यम से निकाला गया। राशि को बाइनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) में परिवर्तित किया गया। धन के लेन-देन को छिपाने और अपराध की आय को बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित करने के लिए कस्टोडियल और नॉन-कस्टोडियल वॉलेट की एक जटिल श्रृंखला के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
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सुशिक्षित पेशेवरों का एक संगठित गिरोह... 
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय और विपिन यादव सहित सुशिक्षित पेशेवरों के एक संगठित गिरोह ने सुनियोजित तरीके से धन शोधन किया है। इस गिरोह ने दिल्ली के बिजवासन स्थित एक ही पते से संचालित होने वाली 20 से अधिक संस्थाओं को गठित और नियंत्रित किया। इनके साझेदार और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एक ही थे। इनके केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी एक समान थे। ये संस्थाएं अवैध धन को व्यवस्थित रूप से कई स्तरों पर जमा करने और फिर उसे भारत से बाहर भेजने के लिए माध्यम के रूप में कार्य करती थीं।

ईडी अधिकारियों पर हमला किया... 
जांच के तहत, 28.11.2024 को अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव के आवास सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली गई। अशोक कुमार शर्मा के आवास पर तलाशी के दौरान, वह जानबूझकर परिसर से भाग गया। कानूनी कार्रवाई से बचने के प्रयास में उसने कथित तौर पर ईडी अधिकारियों पर हमला किया। इस संबंध में, अशोक कुमार शर्मा और उसके भाई सुभाष शर्मा के खिलाफ उक्त गैरकानूनी कृत्यों के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई। भास्कर यादव को जब पता चला कि ईडी के अधिकारी तलाशी लेने के लिए उनके घर पहुंचे हैं, तो वह भी अपने आवास से फरार हो गया। सीए अशोक कुमार शर्मा के आवास से फर्जी कंपनियों के एटीएम कार्ड और चेकबुक जैसे आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। 


जांच से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका ... 
ईडी के मुताबिक, 28.11.2024 से अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव फरार थे। उन्होंने पीएमएलए, 2002 के तहत जांच से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। हालांकि, आरोपों की गंभीरता, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और पीएमएलए, 2002 की धारा 45 की कठोरता को ध्यान में रखते हुए, उनकी याचिकाएं क्रमशः 15.01.2025 को विशेष न्यायालय और 02.02.2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गईं। इसके बाद, भास्कर यादव ने सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की, जिसे 18.02.2026 को संबंधित न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश के साथ खारिज कर दिया गया। आरोपी अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव के आत्मसमर्पण के बाद, उन्हें पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।

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