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ED के खुलासे: लाइसेंस खत्म, फिर भी जबरन वसूली और तीन नदियों से अवैध खनन; 'झारखंड टाइगर ग्रुप' नाम का समूह गठित
Mon, 18 Aug 2025 05:58 PM IST
ज्योति भास्कर
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 18 Aug 2025 05:58 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों अपनी जांच में कई अहम खुलासे किए हैं। ED का आरोप है कि लाइसेंस खत्म होने के बाद भी जबरन वसूली और तीन नदियों से अवैध खनन का सिलसिला चलता रहा। यही नहीं 'झारखंड टाइगर ग्रुप' नाम का उग्रवादी समूह भी गठित किया गया। जानिए पूरा मामला
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प्रवर्तन निदेशालय (सांकेतिक)
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने 14/8/2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अंकित राज की 3.02 करोड़ रुपये मूल्य की तीस चल/अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। आरोप है कि अंकित राज ने लाइसेंस खत्म होने के बाद भी झारखंड की तीन नदियों से जमकर अवैध खनन किया। इतना ही नहीं, जबरन वसूली के अलावा अंकित राज ने 'झारखंड टाइगर ग्रुप' उग्रवादी समूह का भी गठन कर दिया।
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ईडी ने झारखंड पुलिस द्वारा 15 दिसंबर, 2023 को दर्ज 16 एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इसमें जबरन वसूली, अवैध रेत खनन, सरकारी काम में बाधा डालने और झारखंड टाइगर ग्रुप नामक एक उग्रवादी समूह संचालित करने के आरोप शामिल हैं। जांच के दौरान, ईडी ने अपराध की आय (पीओसी) से संबंधित साक्ष्य जुटाने के लिए 12 मार्च, 2024, 13 मार्च, 2024 और 4 जुलाई, 2025 को तलाशी ली। अंकित राज के अवैध रेत कारोबार से संबंधित दस्तावेज जुटाने के लिए 18 जुलाई, 2025 को हजारीबाग स्थित जिला खनन कार्यालय में एक सर्वेक्षण भी किया गया।
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ईडी के मुताबिक, गवाहों के बयानों, जिला खनन अधिकारियों के दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर, जांच से पता चला कि अंकित राज ने सोनपुरा घाट के लिए खनन लाइसेंस 2019 में समाप्त होने के बाद भी हाहरो, प्लांडू और दामोदर नदियों से अवैध रूप से रेत निकालना जारी रखा।
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प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, कथित तौर पर, अंकित राज और उसके साथियों ने रेत के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन के लिए एक परिष्कृत, बहुस्तरीय प्रणाली का इस्तेमाल किया।
यह कार्य खनन नियमों की जानबूझकर अवहेलना और लोक प्राधिकरण का दुरुपयोग करके अवैध लाभ को अधिकतम करने के लिए किया गया था। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप, अंकित राज ने पीओसी हासिल कर लिया। जांच एजेंसी ने इस मामले में कुल कुर्की/जब्ती 3.4 करोड़ रुपये की है। मामले में आगे की जांच जारी है।