फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों से गिरफ्तारी को लेकर ED की शक्तियों पर क्या होगा असर? जानें

Thu, 21 Dec 2023 08:00 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 21 Dec 2023 08:00 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कहा, गिरफ्तारी से पहले प्रवर्तन निदेशालय अगर आरोपी को मौखिक सूचना भी देता है तो इसे पर्याप्त माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक किस आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया जा रहा है, इसकी जानकारी मौखिक रूप से देने के बाद की गई कार्रवाई को मानमाना नहीं माना जाएगा।

विज्ञापन
ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
गिरफ्तारी पर ईडी की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी के समन को नजरअंदाज कर दिया है। एक बार फिर ईडी द्वारा बुलाए जाने के बाद भी केजरीवाल पेशी के लिए नहीं गए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तारी के समय किसी आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के आधार के बारे में मौखिक रूप से सूचित करना पर्याप्त है। हालांकि, 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में देना होगा।  

विज्ञापन

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट का ही गिरफ्तारी को लेकर दिया एक आदेश इससे कुछ इतर था। दो फैसलों की खास बात यह है कि शीर्ष अदालत ने एक ही सवाल पर कानून की व्याख्या दो तरह से की है। दोनों ही मामलों में आरोपी को गिरफ्तारी के आधार का लिखित दस्तावेज मुहैया नहीं कराया गया। इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने कहा कि बिना लिखित प्रमाण के गिरफ्तारी शक्तियों का मनमाना और निरंकुश इस्तेमाल है। हालांकि, दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को सही ठहराया। शुक्रवार के फैसले में शीर्ष अदालत ने ईडी की शक्तियों की अहम व्याख्या की। आइए समझें पूरा मामला...

विज्ञापन

नए आदेश में सुप्रीम कोर्ट क्या कहा है?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कहा, गिरफ्तारी से पहले प्रवर्तन निदेशालय अगर आरोपी को मौखिक सूचना भी देता है तो इसे पर्याप्त माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक किस आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया जा रहा है, इसकी जानकारी मौखिक रूप से देने के बाद की गई कार्रवाई को मानमाना नहीं माना जाएगा।
हालांकि, 24 घंटे के भीतर आरोपी को ग्राउंड की लिखित प्रति मुहैया कराना अनिवार्य होगा। 15 दिसंबर को पारित इस फैसले के बाद तीन अक्तूबर का फैसला निष्प्रभावी हो गया है। अक्तूबर के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ईडी अगर किसी को गिरफ्तार करना चाहती है तो गिरफ्तारी के बुनियादों की प्रति आरोपी को लिखित रूप में मुहैया कराना अनिवार्य शर्त होगी।

ईडी को गिरफ्तारी के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग पर नकेल कसने के लिए पीएमएलए कानून के तहत कार्रवाई करती है। इस कानून की धारा 19 के तहत ईडी को गिरफ्तारी के अधिकार दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि आरोपी को ईडी 'जल्द से जल्द'  लिखित रूप से बताएगी कि किन आधारों पर उसे अरेस्ट किया गया है। इसकी व्याख्या करते हुए शुक्रवार को जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश शर्मा की पीठ ने कहा, 'जल्द से जल्द' को 'यथाशीध्र' या जितनी जल्दी संभव हो समझा जाए।

अदालत ने साफ किया कि यथाशीध्र का अर्थ 'देरी की न्यूनतम गुंजाइश' है। कितना समय लग सकता है? इस पर भी शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने स्पष्ट व्याख्या की। पीठ ने कहा, 'उचित रूप से सुविधाजनक'  या 'जितना उचित रूप से अपेक्षित हो' उतनी अवधि के भीतर ईडी को लिखित दस्तावेज आरोपी को मुहैया कराने होंगे।

विज्ञापन

गिरफ्तारी के लिए ईडी के पास कितनी ताकत?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

दो दशक पहले बनाए गए कानून- धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए 2002) की धारा 19 ईडी को अधिकार देती है। इसके तहत आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है। अधिकृत ईडी अधिकारियों को सबूतों या संदेह के आधार पर गिरफ्तारी की ताकत मिलती है। इस धारा के तहत लगे आरोप के बाद ईडी भरोसा कर सकती है कि आरोपी ने इस कानून के तहत दंडनीय अपराध किया है। कानून में स्पष्ट किया गया है कि ईडी को संदेह और गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे। गिरफ्तारी के आधार के बारे में आरोपी को 'जितनी जल्दी हो सके' जानकारी दी जाएगी। गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर आरोपी को विशेष अदालत, न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के पास ले जाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या पर चर्चा क्यों? तीन महीने में दो अलग आदेश क्यों?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीएम केजरीवाल पर क्या असर होगा - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, 15 दिसंबर को जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आदेश पारित किया उसमें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने रियल-एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के संस्थापक राम किशोर अरोड़ा की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पंकज बंसल मामले में 3 अक्तूबर को पारित फैसला इस मामले में लागू नहीं होगा। आदेश पारित होने से पहले हुई गिरफ्तारी के खिलाफ राहत की अपील में इसे आधार नहीं बनाया जा सकता। बता दें कि अरोड़ा की गिरफ्तारी 26 जून को हुई थी।

शीर्ष अदालत ने कहा, तीन अक्तूबर का फैसला दो- न्यायाधीशों की पीठ ने पारित किया। इससे पहले 27 जुलाई को विजय मंडनलाल चौधरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मुकदमे में तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला पारित किया। इस आधार पर तीन अक्तूबर का फैसला निष्प्रभावी किया जा सकता है।

अरोड़ा ने दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी पीएमएलए की धारा 19(1) और उनके अन्य मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। दलीलों को खारिज करते हुए 15 दिसंबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विजय मदनलाल के मामले में भी अदालत ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार पर स्पष्ट टिप्पणी की है। इसमें भी कहा गया है कि 'मौखिक रूप से सूचित करना पर्याप्त है।' 

विजय मदनलाल चौधरी के मामले में क्या है फैसला ?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार, जस्टिस एएम खानविलकर (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने ईडी की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की थी। अदालत ने पीएमएलए के प्रावधानों की वैधता बरकरार रखी थी। 27 जुलाई को कोर्ट ने 540 पेज का विस्तृत आदेश पारित किया। लगभग हर पहलू पर सरकार की दलीलों को स्वीकार कर शीर्ष अदालत ने कहा, पीएमएलए कानून की धारा 19 असंवैधानिक नहीं है। अदालत ने माना कि प्रावधान का पीएमएलए के उद्देश्य के साथ उचित संबंध है।

कानून को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा था; 

  • वित्त अधिनियम (फाइनांस एक्ट) के तहत मनी बिल के रूप में पीएमएलए कानून से जुड़े संशोधन पारित करना गलत है।
  • गिरफ्तारी से जुड़ी ईडी की शक्तियां मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
  • जमानत के आदेश में आरोपी को निर्दोष माना जाना चाहिए।

हालांकि अदालतों ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया। इसके बाद हालिया मामला पंकज बंसल का है। इसमें दो जजों की पीठ ने फैसला सुनाया। जस्टिस एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार ने तीन अक्तूबर को पारित फैसले में भी जुलाई में तीन जजों की पीठ की व्याख्या को स्वीकार नहीं किया।

पंकज बंसल मामला कैसे अलग है?

ED powers of Arrest PMLA Act Section 19 Supreme Court Verdict Arvind Kejriwal Fate
कानून से मिली शक्तियों की शीर्ष अदालत में व्याख्या - फोटो : सोशल मीडिया
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार के बारे में सूचित करना होगा। गिरफ्तारी के लिए लिखित आधार की प्रति बिना किसी अपवाद के आरोपी को दिए जाएं। खंडपीठ ने कहा, 'अब से यह अनिवार्य होगा'  कहने का मतलब तीन अक्तूबर के बाद हुई गिरफ्तारी के मामलों पर ही यह व्याख्या लागू होगी।

पंकज बंसल और आरके अरोड़ा के मामलों में समान तथ्य यह हैं कि आरोपियों को गिरफ्तारी के समय लिखित आधार की प्रति नहीं दी गई। विशेष अंतर यह था कि पहले के फैसले में ईडी की कार्रवाई को 'शक्तियों का मनमाना और निरंकुश' इस्तेमाल बताकर गलत माना गया। वहीं सिर्फ तीन महीने बाद एक अन्य आदेश में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने ईडी की कार्रवाई को सही ठहराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed