ED: वीडियोकॉन मोजाम्बिक तेल सौदे में 13 व्यक्तियों/संस्थाओं के विरुद्ध नोटिस जारी, दूसरे कामों में लगाए 2 अरब
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वीएन धूत और 12 अन्य अभियुक्त व्यक्तियों/संस्थाओं के विरुद्ध वीडियोकॉन मोजाम्बिक तेल सौदे मामले में नोटिस जारी किया है। ईडी ने इस मामले में 18 दिसंबर 2024 को विशेष न्यायालय, राउज एवेन्यू, नई दिल्ली के समक्ष अभियोग दायर किया था। जांच से पता चला कि 4.54 अरब अमेरिकी डॉलर की कुल सुविधा में से, 2.02 अरब अमेरिकी डॉलर, वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों द्वारा गैर-इच्छित उद्देश्यों के लिए स्थानांतरित किए गए हैं। वीएन धूत, वीडियोकॉन के पूर्व सीईओ हैं। लोन देने में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करने के केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीएन धूत से एक साथ पूछताछ की थी।
ईडी ने इस मामले की जांच में यह स्थापित किया है कि वीडियोकॉन समूह द्वारा लिए गए विदेशी मुद्रा ऋण, अर्थात एसबीआई के नेतृत्व वाले भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा स्वीकृत एसबीएलसी, जुपिटर और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (एससीबी) सुविधा, को व्यवस्थित रूप से उनके स्वीकृत उद्देश्यों से हटा दिया गया था। इसे विदेशी तेल, गैस परिसंपत्तियों का विकास और पुनर्वित्तपोषण बताया गया था। धन का यह गबन वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों के समग्र नियंत्रण और निर्देशन में, विदेशी समूह संस्थाओं और मध्यस्थों की सक्रिय भागीदारी के साथ किया गया था।
जांच के मुताबिक, कार्यप्रणाली में ऋण राशि को वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड (वीएचएचएल) और उसकी विदेशी तेल एवं गैस सहायक कंपनियों के माध्यम से भेजा गया था। इसके बाद धन को तेल और गैस संचालन से असंबंधित गतिविधियों में संलग्न विदेशी वीडियोकॉन समूह कंपनियों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। इनमें मेसर्स जुपिटर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, वीनस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ईगल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, पैरामाउंट ग्लोबल लिमिटेड, क्वाड्रेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, स्काई बिलियन ट्रेडिंग लिमिटेड और मेसर्स टीजीडीसी ग्वांगडोंग डिस्प्ले कंपनी लिमिटेड, जैसी कंपनियां शामिल थी।
चक्रीय लेन-देन, निर्यात अग्रिमों के समायोजन, अंतर-कंपनी ऋणों और निवेशों के माध्यम से, धनराशि को भारत में वापस भेज दिया गया, जहां इसका उपयोग स्वीकृत उद्देश्यों से पूरी तरह असंबंधित कार्यों के लिए किया गया। इनमें गैर-तेल व्यवसायों के खर्चों को पूरा करना, निवेश करना और व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट संपत्तियों का निर्माण करना शामिल है। हस्तांतरित धनराशि का एक बड़ा हिस्सा वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) और इसकी भारतीय समूह कंपनियों के बही-खातों व बैंक खातों के माध्यम से भारत में वापस लाया गया। इन प्रवाहों को निर्यात अग्रिमों, ऋण चुकौती, निवेश या इक्विटी निवेश के रूप में छिपाया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इससे धन को वैध प्राप्तियों के रूप में छिपाना, एकीकृत करना और प्रदर्शित करना आसान हो गया।
धनराशि के वास्तविक अंतिम उपयोग को छिपाने और ऋण सुविधाओं तक निरंतर पहुंच बनाए रखने के लिए, ऋणदाता बैंकों को झूठे और भ्रामक उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा, मेसर्स वीआईएल और उसकी समूह कंपनियों के खाते 2018 में निष्पादित (एनपीए) हो गए। बैंकों ने एसबीएलसी सुविधा के संबंध में 23647.12 करोड़ रुपये के एनपीए सहित कुल 61,773.02 करोड़ रुपये का दावा दायर किया था। ईडी ने इस मामले में 17.69 करोड़ रुपये और 38.58 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच करने के लिए दो अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए थे। ईडी ने दिसंबर 2024 में वीएन धूत और 12 अन्य आरोपी व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ 1136.49 करोड़ रुपये की अपराध की आय के लिए अभियोजन शिकायत दर्ज की थी।