फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ED Gujrat IAS officer had fixed bribe rates as collector, used to take 50 per cent share

ED: आईएएस अधिकारी ने कलेक्टर रहते तय की थीं रिश्वत की दर, लेते थे 50 फीसदी हिस्सा

Sun, 04 Jan 2026 08:31 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद। Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 04 Jan 2026 08:31 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुजरात के सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर और आईएएस अधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल पर भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) मंजूरी के बदले सुनियोजित तरीके से रिश्वत वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का गंभीर आरोप लगाया है।

विज्ञापन
ED Gujrat IAS officer had fixed bribe rates as collector, used to take 50 per cent share
ED - फोटो : ANI

विस्तार

भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके आईएएस अधिकारी और गुजरात के सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदातल में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।  ईडी ने अदालत को बताया कि आईएएस अधिकारी और गुजरात के सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल ने कथित तौर पर जमीन के इस्तेमाल में बदलाव (सीएलयू) के आवेदनों को मंजूरी देने के लिए 5 रुपये से 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक रिश्वत की दरें तय की थीं। पिछले दिनों ईडी ने राजेंद्रकुमार पटेल को गिरफ्तार किया था। 

विज्ञापन


निजी सहायक को भेजी जाती थी रिश्वत की रकम
ईडी ने 2 जनवरी को अहमदाबाद में एक विशेष पीएमएलए अदालत में पेश की गई रिमांड आवेदन में बताया कि सीएलयू आवेदन को जल्दी आगे बढ़ाने के लिए स्पीड मनी के तौर पर सुनियोजित तरीके से रिश्वत मांगी और वसूली गई। इसे गुजरात में जिला कलेक्टर के कार्यालय से काम करने वाले बिचौलियों के एक नेटवर्क के जरिये भेजा गया। डिजिटल सबूतों के अनुसार, रिश्वत के संग्रह का एक खाता था और उसे समय-समय पर जिला कलेक्टर के निजी सहायक को भेजा जाता था।
विज्ञापन


हर किसी का तय था हिस्सा
कुल रिश्वत में से कथित तौर पर 50 प्रतिशत पटेल को मिला, 10 प्रतिशत एक बिचौलिए ने रखा और बाकी रकम कलेक्टर कार्यालय के दूसरे अधिकारियों में बांटी गई, जिसमें रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर, एक मामलतदार और एक क्लर्क शामिल थे। अदालत ने पटेल को 7 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। जांच में अब तक 800 से अधिक सीएलयू आवेदनों का पता चला है, जिनमें कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी। इससे 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई, जो अपराध की कुल कमाई का एक हिस्सा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ईडी ने कोर्ट में कहा कि 2015 बैच के आईएएस अधिकारी और तत्कालीन सुरेंद्रनगर कलेक्टर पटेल सीएलयू मंजूरी से जुड़े रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट में मुख्य लाभार्थी और अंतिम फैसला लेने वाले थे। इस मामले में ईडी की ओर से एक डिप्टी मामलतदार (राजस्व अधिकारी) चंद्रसिंह मोरी को उनके कार्यालय से गिरफ्तार किए जाने के एक हफ्ते पहले पटेल का बिना किसी पोस्टिंग के ट्रांसफर कर दिया गया था। जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद पटेल, मोरी और अन्य लोगों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू कर की थी।

ये भी पढ़ें: लालकिला धमाके में खुलासा: 'घोस्ट सिम' के जरिए पाकिस्तानी आकाओं से कनेक्ट थे आतंकी, जानें कैसे करती है ये काम

अधिकारों का किया गलत इस्तेमाल
ईडी के मुताबिक, सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स ऑर्डिनेंस, 1949 तथा गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड, 1879 के तहत सीएलयू मंजूरी देने का अंतिम अधिकार जिला कलेक्टर के पास होता है। इसी पद का इस्तेमाल कर पटेल ने आवेदनों की गति और नतीजों को प्रभावित किया। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित धन का स्रोत तो प्राथमिक तौर पर सामने आ गया है, लेकिन उसकी लेयरिंग, छिपाने और वैध रूप में दिखाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।

ईडी के मुताबिक, सौराष्ट्र घरखेड़, टेनेंसी सेटलमेंट और एग्रीकल्चरल लैंड्स ऑर्डिनेंस, 1949 तथा गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड, 1879 के तहत सीएलयू मंजूरी देने का अंतिम अधिकार जिला कलेक्टर के पास होता है। इसी पद का इस्तेमाल कर पटेल ने आवेदनों की गति और नतीजों को प्रभावित किया। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित धन का स्रोत तो प्राथमिक तौर पर सामने आ गया है, लेकिन उसकी लेयरिंग, छिपाने और वैध रूप में दिखाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।


पटेल के निजी सहायक जयराजसिंह जाला ने अपने बयान में कहा कि वह समय-समय पर रिश्वत वसूली का विवरण कलेक्टर को देता था और कुल रकम का 50 फीसदी हिस्सा पटेल को सौंपा जाता था। इससे पहले मोरी ने भी कहा था कि जाला उससे कलेक्टर का हिस्सा लेकर पटेल तक पहुंचाता था।मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों में व्हाट्सऐप चैट, पीडीएफ फाइलें और तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें रिश्वत के हिसाब और उसके ट्रांसफर का रिकॉर्ड मौजूद है। मोरी के फोन से मिली चैट के आधार पर ईडी का दावा है कि पूरा नेटवर्क कलेक्टर के निर्देशों पर संचालित हो रहा था।

ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि अहमदाबाद में खरीदा गया एक फ्लैट पटेल के नाम पर है, लेकिन उसका किराया उनकी मां के बैंक खाते में जाता था। एजेंसी का यह भी दावा है कि पटेल अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं देते थे, जिससे संदेह है कि घरेलू खर्च नकद और बेहिसाब पैसे से चलाए जा रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed