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मनी लॉन्ड्रिंग: ज्यादा रिटर्न के बहाने निवेशकों को ठग रही थी मोबाइल एप कंपनी, ED ने जब्त की 51 करोड़ की धनराशि
Wed, 14 Dec 2022 09:20 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 14 Dec 2022 09:20 PM IST
सार
ईडी ने एक बयान में कहा, एमपीएफ ऐप एक 'स्कैम इंवेस्टमेंट एप्लिकेशन' है जिसने बहुत अधिक रिटर्न देने का वादा किया। पूरे देश के भोले-भाले निवेशकों को अपनी मेहनत की कमाई को उच्च रिटर्न की झूठी उम्मीद में निवेश करने का लालच दिया गया।
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प्रवर्तन निदेशालय।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक मोबाइल ऐप कंपनी से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। एजेंसी ने बताया कि उसने धन शोधन रोधी कानून के तहत 51.11 करोड़ रुपये की धनराशि जब्त की है। आरोप था कि ऐप कंपनी ने कथित रूप से 'बहुत ज्यादा' रिटर्न देने के बहाने निवेशकों (इंवेस्टर्स) को ठगा है।
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एजेंसी ने शुक्रवार 9 दिसंबर को मैट्रिक्स पार्टनर्स फंड (एमपीएफ) ऐप और उससे जुड़े कुछ अन्य ऐप के 'दुरुपयोग' के मामले में नोएडा, पुणे और बेंगलुरु के ठिकानों पर तलाशी ली। दरअसल, नवंबर 2021 में मेघालय पुलिस ने एपीएफ ऐप के पीछे के संस्थानों और व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्राथमिकी से धन शोधन का मामला सामने आया।
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ईडी ने एक बयान में कहा, एमपीएफ ऐप एक 'स्कैम इंवेस्टमेंट एप्लिकेशन' है जिसने बहुत अधिक रिटर्न देने का वादा किया। पूरे देश के भोले-भाले निवेशकों को अपनी मेहनत की कमाई को उच्च रिटर्न की झूठी उम्मीद में निवेश करने का लालच दिया गया।
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उन्होंने कहा, जांच के दौरान यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में कंपनियां इस ऐप से जुड़ी हुईं थीं, जो निवेश स्कैम, ऋण, सट्टेबाजी, रम्मी आदि से संबंधित कई अन्य ऐप चलाती थीं।
एजेंसी ने आगे कहा, ये संस्थाएं जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कंपनियों रजिस्टर्ड करती थी और इन संस्थाओं का डमी डायरेक्टर, मोबाइल ऐप बनाती थी। फिर विभिन्न भुगतान माध्यमों से धन एकत्र करती थी और ऐप्स के लिए व्यापास से जुड़ी प्रकृति की गलत घोषमा करती थीं।
निदेशालय ने कहा, ये संस्थाएं ऐप बनाने और बैंक खाते खोलने के बाद बिजनेसमैन के रूप में खुद को विभिन्न भुगतान गेटवे पर रजिस्टर्ड करती थीं। शुरुआत में लोगों को अच्छा रिटर्न या रिवॉर्ड मिलता था और वे ज्यादा पैसा लगाते थे। एक अवधि के बाद जब बड़ी मात्रा में धन इकट्ठा हुआ तो इन ऐप्स के पीछे के लोगों ने उन्हें निष्क्रिय कर दिया और अवैध धन के साथ गायब हो गए।
बयान में आगे कहा गया, जांच में यह भी पाया गया कि ये कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) की वेबसाइट या रिजस्टर्ड पते पर दिए गए पतों से काम नहीं कर रही थीं और इनके नकली डायरेक्टर्स की तरह नकली पते थे।