फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ED Director Extension: People celebrating the Supreme Court decision regarding ED Director are in confusion

ED Director Extension: ईडी चीफ पर किसका टूटा 'भ्रम', अमित शाह की बात सही निकली, अब इन्हें रहना होगा 'चौकन्ना'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 27 Jul 2023 06:36 PM IST
विज्ञापन
सार
केंद्र सरकार ने ईडी निदेशक को बार-बार सेवा विस्तार देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, जया ठाकुर और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और साकेत गोखले सहित कई लोग शामिल रहे...
loader
ED Director Extension: People celebrating the Supreme Court decision regarding ED Director are in confusion
Enforcement Directorate - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जब 11 जुलाई को अपने फैसले में कहा था कि ईडी निदेशक, संजय कुमार मिश्रा का तीसरा सेवा विस्तार अवैध है, तो विपक्षी दलों के नेताओं ने खुशी जाहिर की थी। सर्वोच्च अदालत के फैसले को लेकर उन दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ये महत्वपूर्ण नहीं है कि ईडी का निदेशक कौन है, क्योंकि जो कोई भी इस पद पर होगा, वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले परिवारवादियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए भ्रष्टाचार पर नजर रखेगा। ईडी निदेशक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मना रहे लोग विभिन्न कारणों से 'भ्रम' में हैं। इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा, सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) अधिनियम में संशोधन, जिसे संसद की ओर से विधिवत पारित किया गया था, उसे बरकरार रखा गया है।

किसके लिए इस्तेमाल हुआ 'परिवारवाद'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जो बयान दिया था, उसमें एक शब्द बहुत अहम था। उस 'शब्द' को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कई बार विपक्षी खेमे, खासतौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर निशाना साधता रहा है। वह शब्द है 'परिवारवाद'। अमित शाह ने कहा था, जो कोई भी इस पद पर होगा, वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले परिवारवादियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए भ्रष्टाचार पर नजर रखेगा। इस बयान का सीधा मतलब यही था कि राजनीति में ऐसे परिवार, जो कई पीढ़ियों से सत्ता में रहे हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय मिश्रा के सेवा विस्तार को 15 सितंबर तक बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से उनके कार्यकाल को 15 अक्तूबर तक बढ़ाने की अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के अपने फैसले में साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में ईडी निदेशक संजय मिश्रा, 15 सितंबर के बाद अपने पद पर नहीं रहेंगे।  

किसने कहा था, ये फैसला सरकार के मुंह पर तमाचा है

केंद्र सरकार ने ईडी निदेशक को बार-बार सेवा विस्तार देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, जया ठाकुर और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और साकेत गोखले सहित कई लोग शामिल रहे। इन लोगों ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों का दुरुपयोग कर लोकतंत्र की बुनियादी संरचना को नष्ट करने का काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला था। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये फैसला सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है। सरकार का यही मकसद था कि ईडी निदेशक को गैरकानूनी तरीकों से सेवा विस्तार दिया जाए। रणदीप सुरजेवाला ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ करते आ रहे हैं। इसके जरिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं को प्रताड़ित किया गया। प्रजातंत्र की मूलभूत संस्थाओं को हिलाया गया। सुरजेवाला ने कहा था, मेरे विचार में कोर्ट को ईडी व सीबीआई निदेशक के सेवा विस्तार के कानून की वैधता को सही ठहराने वाले निर्णय पर भी पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

जांच एजेंसी के रडार पर विपक्षी नेताओं का आंकड़ा बढ़ा

पिछले दो दशकों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आए गैर-भाजपाई नेताओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियों के फेर में केवल राज्यों के कुछ नेता ही नहीं, बल्कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता से लेकर अनेक विपक्षी नेता आ चुके हैं। बहुत से नेताओं को अभी तक क्लीन चिट नहीं मिली है। किसी के पास पूछताछ के लिए 'समन' जा रहे हैं, तो कोई सलाखों के पीछे पहुंच गया है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, प्रधानमंत्री किसी भी देश के 'फादर फिगर' की तरह होते हैं। चुनाव के बाद अगर कहीं पर किसी की सरकार बन जाती है, तो उसे केंद्र सरकार की ओर से सपोर्ट देने और मिलकर काम करने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होती है। आज 'फादर फिगर' की भूमिका का सही निर्वहन नहीं हो रहा। आप के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को ईडी मामले में जेल जाना पड़ा है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस भी निशाने पर हैं। टीएमसी के नेताओं से भी पूछताछ हो रही है। एनसीपी और आरजेडी के नेता भी जांच एजेंसियों से नहीं बच सके। दिल्ली के शराब नीति केस में ईडी ने के. कविता से पूछताछ की है। कविता ने कहा था, जहां चुनाव होता है, वहां मोदी से पहले प्रवर्तन निदेशालय की टीम पहुंच जाती है।

कई विपक्षी दलों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली कई विपक्षी पार्टियों ने कुछ माह पहले प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इनमें टीएमसी, आप, आरजेडी, नेशनल कांफ्रेंस, केसीआर की पार्टी, सपा और उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) आदि दल शामिल थे। इन सभी दलों के नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा, हमारे देश के प्रधानमंत्री ने ठान लिया है कि अगर भाजपा को वोट नहीं दोगे और किसी दूसरी पार्टी को वोट दोगे तो उस सरकार को किसी भी हाल में काम नहीं करने दिया जाएगा। किसी राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार बनती है तो उसके नेताओं के पीछे ईडी और सीबीआई छोड़ दी जाती है। विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं। किसी राज्य में विपक्षी पार्टी को ही तोड़ देते हैं तो कहीं सरकार गिरा देते हैं।

इन विपक्षी नेताओं पर है जांच एजेंसियों का जाल

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेता, जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। कांग्रेस नेता एवं मौजूदा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से ईडी पूछताछ कर चुकी है। आगे भी पूछताछ संभव है। खरगे ने कहा था, केंद्र सरकार जांच एजेंसियों की मदद से विपक्ष को एकत्रित नहीं होने दे रही। केंद्र सरकार के खिलाफ जो बोलता है, वह टारगेट पर आ जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी ईडी का सामना कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। शिवसेना के संजय राउत ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। वे भी जेल में रह कर आए हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक से भी पूछताछ जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी ने पूछताछ की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस रहा है। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का नाम भी माइनिंग घोटाले में आया था। पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से अवैध रेत खनन मामले में ईडी पूछताछ कर चुकी है। चारा घोटाले में सजा होने के बाद लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में जमीन लेकर नौकरी देने का मामले की जांच शुरु हो गई है।

केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई से बच जाते हैं वे नेता

आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय भी जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी ईडी की नजर है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के करीबियों पर ईडी छापा मार चुकी है। ममता बनर्जी के खिलाफ चिट फंड मामला है, तो कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी ईडी के निशाने पर आ चुके हैं। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के भाई भी केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर रहे हैं। ऐसे में कब और किस नेता को जांच एजेंसी अपनी गिरफ़्त में ले ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, विपक्ष के जो नेता मुंह बंद कर लेते हैं या भाजपा ज्वाइन कर लेते हैं, वे केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई से बच जाते हैं। उन्होंने इस सूची में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, नारायण राणे, रमन सिंह, मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी, आदि नेताओं का नाम गिनाया है।

45 फीसदी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की

बतौर माकन, इन नेताओं के पीछे जांच एजेंसी पड़ी रहती थी। आज उनसे जांच एजेंसी पूछताछ क्यों नहीं कर रही। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट बताती है कि गत आठ वर्ष में लगभग 225 चुनावी उम्मीदवारों ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। 45 फीसदी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की है। पार्टी छोड़ने वालों में हार्दिक पटेल, अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, गुलाम नबी आजाद, जयवीर शेरगिल, ज्योतिरादित्या सिंधिया, सुनील जाखड़, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव, कीर्ति आजाद, अदिति सिंह, कैप्टन अमरिंदर सिंह, उर्मिला मातोंडकर, हिमंत बिस्व सरमा, हरक सिंह रावत, जयंती नटराजन, एन बिरेन सिंह और अजित जोगी आदि शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के मुताबिक, मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की है, उनमें 95 फीसदी विपक्ष के नेता हैं। इसमें सबसे ज्यादा रेड तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के घरों और दफ्तरों पर की गई हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि 2024 से पहले विपक्ष के अनेक नेता, केंद्रीय जांच एजेंसियों के जाल में फंस सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed