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ED: सहारा ग्रुप ने खेला पोंजी स्कीम का खेल, लोगों की जमापूंजी से बनाई बेनामी संपत्ति; 1460 करोड़ की जमीन कुर्क
Tue, 15 Apr 2025 03:57 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 15 Apr 2025 03:57 PM IST
सार
Money Laundering Case: सहारा समूह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। बता दें कि, ईडी ने महाराष्ट्र के लोनावाला में 1,460 करोड़ रुपये कीमत की कुल 707 एकड़ की 'एंबी वैली सिटी' कुर्क की है।
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ED
- फोटो : ANI
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय, कोलकाता ने सहारा इंडिया और उसके समूह की संस्थाओं के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत लोनावाला के आंबी वैली सिटी और उसके आसपास की 707 एकड़ जमीन को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य 1460 करोड़ रुपये है। यह जमीन बेनामी प्रॉपर्टी के तहत खरीदी गई थी। इसमें सहारा समूह की संस्थाओं से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया गया था। जमाकर्ताओं को धन जमा करने के लिए धोखा दिया गया। उन्हें सहमति के बिना धन को फिर से जमा करने के लिए मजबूर किया गया था। लोगों ने कई बार परिपक्वता भुगतान की मांग की, लेकिन जमाकर्ताओं को परिपक्वता भुगतान से वंचित कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि समूह ने जमाकर्ताओं और एजेंटों को क्रमशः उच्च रिटर्न और कमीशन का लालच देकर धोखा दिया है।
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तीन राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच
ईडी ने ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस द्वारा मेसर्स हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एचआईसीसीएसएल) और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की धारा 420 और 120बी के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इसके अलावा सहारा समूह की संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ 500 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें से 300 से अधिक पीएमएलए, 2002 के तहत अपराधों के लिए दर्ज की गई थीं। इसमें आरोप लगाया गया था कि जमाकर्ताओं को धन जमा करने के लिए धोखा दिया गया था। उनकी सहमति के बिना धन को फिर से जमा करने के लिए मजबूर किया गया। कई बार परिपक्वता भुगतान की मांग करने के बावजूद उन्हें उनके परिपक्वता भुगतान से वंचित कर दिया गया था।
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कमीशन का लालच देकर दिया गया धोखा
ईडी की जांच से पता चला है कि सहारा समूह, विभिन्न संस्थाओं जैसे एचआईसीसीएसएल, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एससीसीएसएल), सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी (एसयूएमसीएस), स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एसएमसीएसएल), सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल), सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल), सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा समूह की अन्य संस्थाओं के माध्यम से एक पोंजी स्कीम चला रहा था। समूह ने जमाकर्ताओं और एजेंटों को क्रमशः उच्च रिटर्न और कमीशन का लालच देकर धोखा दिया है।
यह भी पढ़ें - IMD: मानसून को लेकर मौसम विभाग ने की भविष्यवाणी, इस साल देश में औसत से 105% अधिक होगी बारिश
किस तरह से की गई धोखाधड़ी?
जमाकर्ताओं की किसी भी जानकारी या नियंत्रण के बिना गैर-विनियमित तरीके से एकत्र धन का उपयोग किया है। इसके अलावा, उन्होंने पुनर्भुगतान से परहेज किया और इसके बजाय जमाकर्ताओं को उनकी परिपक्वता राशि को फिर से जमा करने के लिए मजबूर/प्रलोभित किया। पोंजी योजना को जारी रखने के लिए, उन्होंने मौजूदा परिपक्वता राशि चुकाने में सक्षम न होने के बावजूद नए जमा स्वीकार करना जारी रखा। एकत्रित धन का एक हिस्सा बेनामी संपत्ति बनाने, अपने निजी खर्चों और शानदार जीवनशैली के लिए इस्तेमाल किया गया। जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने सहारा समूह की संपत्तियों का भी निपटान किया है और जमीन की बिक्री के बदले अघोषित नकदी में भुगतान का एक हिस्सा प्राप्त किया है, जिससे जमाकर्ताओं को उनके सही दावे से वंचित किया गया है।
जांच के दौरान, जमाकर्ताओं, एजेंटों, सहारा समूह के कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित विभिन्न व्यक्तियों के बयान पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए हैं। साथ ही, पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई, जिसमें 2.98 करोड़ रुपये की अस्पष्टीकृत नकदी जब्त की गई।
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तीन राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच
ईडी ने ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस द्वारा मेसर्स हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एचआईसीसीएसएल) और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की धारा 420 और 120बी के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इसके अलावा सहारा समूह की संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ 500 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें से 300 से अधिक पीएमएलए, 2002 के तहत अपराधों के लिए दर्ज की गई थीं। इसमें आरोप लगाया गया था कि जमाकर्ताओं को धन जमा करने के लिए धोखा दिया गया था। उनकी सहमति के बिना धन को फिर से जमा करने के लिए मजबूर किया गया। कई बार परिपक्वता भुगतान की मांग करने के बावजूद उन्हें उनके परिपक्वता भुगतान से वंचित कर दिया गया था।
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कमीशन का लालच देकर दिया गया धोखा
ईडी की जांच से पता चला है कि सहारा समूह, विभिन्न संस्थाओं जैसे एचआईसीसीएसएल, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एससीसीएसएल), सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी (एसयूएमसीएस), स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एसएमसीएसएल), सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल), सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल), सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा समूह की अन्य संस्थाओं के माध्यम से एक पोंजी स्कीम चला रहा था। समूह ने जमाकर्ताओं और एजेंटों को क्रमशः उच्च रिटर्न और कमीशन का लालच देकर धोखा दिया है।
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किस तरह से की गई धोखाधड़ी?
जमाकर्ताओं की किसी भी जानकारी या नियंत्रण के बिना गैर-विनियमित तरीके से एकत्र धन का उपयोग किया है। इसके अलावा, उन्होंने पुनर्भुगतान से परहेज किया और इसके बजाय जमाकर्ताओं को उनकी परिपक्वता राशि को फिर से जमा करने के लिए मजबूर/प्रलोभित किया। पोंजी योजना को जारी रखने के लिए, उन्होंने मौजूदा परिपक्वता राशि चुकाने में सक्षम न होने के बावजूद नए जमा स्वीकार करना जारी रखा। एकत्रित धन का एक हिस्सा बेनामी संपत्ति बनाने, अपने निजी खर्चों और शानदार जीवनशैली के लिए इस्तेमाल किया गया। जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने सहारा समूह की संपत्तियों का भी निपटान किया है और जमीन की बिक्री के बदले अघोषित नकदी में भुगतान का एक हिस्सा प्राप्त किया है, जिससे जमाकर्ताओं को उनके सही दावे से वंचित किया गया है।
जांच के दौरान, जमाकर्ताओं, एजेंटों, सहारा समूह के कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित विभिन्न व्यक्तियों के बयान पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए हैं। साथ ही, पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई, जिसमें 2.98 करोड़ रुपये की अस्पष्टीकृत नकदी जब्त की गई।
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