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ईडी: अफगानिस्तान-पाकिस्तान-दुबई से चल रहा ड्रग तस्करी सिंडिकेट, आतंकी गतिविधियों के लिए दिए 76 करोड़ रुपये
Sat, 24 Oct 2026 02:42 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:42 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। जांच में खुलासा हुआ है कि नशे की काली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद को वित्तपोषित करने में हो रहा था।
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ईडी की कार्रवाई
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुख्यालय ने शुक्रवार को बनीत सिंह तलवार को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी नशीले पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी के मामले में की गई है। इसमें नशीले पदार्थों को सेमी प्रोसेस्ड टैल्क के भीतर छिपाकर रखा गया था। इसके साथ ही दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी नशीले पदार्थों की बरामदगी भी हुई है। आरोपी बनीत सिंह तलवार को तीस हजारी कोर्ट में स्पेशल जज (पीएमएलए) ने पांच दिनों की ईडी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़े तार
ईडी की यह जांच, एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य लोगों के खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों के संबंध में यूएपीए (1967), एनडीपीएस एक्ट (1985) और आईपीसी (1860) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। इससे पहले एनआईए ने इस मामले में छह चार्जशीट दाखिल की थीं, जिनमें कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से चलने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
आतंकवाद को फंडिंग में इस्तेमाल हुई नशे की काली कमाई
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' है, जो एक वांटेड आरोपी है। इसके साथ पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट और अफगान नागरिक भी शामिल थे। जांच से यह भी पता चला है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से हुई 76 करोड़ रुपये की कमाई को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजा गया। इसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फंड देने के लिए किया गया।
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कैसे रची गई साजिश?
ईडी द्वारा अब तक की गई वित्तीय जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित सामानों की तस्करी, ड्रग्स की बिक्री से हुई कमाई को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजने और अन्य सामानों के रूप में कुल 89 करोड़ रुपये की 'अपराध से प्राप्त रकम' जुटाई गई। इस प्रक्रिया में और कितनी 'अपराध से प्राप्त रकम' जुटाई गई है, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। बनीत सिंह तलवार, हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। हरप्रीत सिंह तलवार ने मास्टरमाइंड 'राजू दुबई' के साथ मिलकर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद की थी। जांच से पता चला है कि हरप्रीत सिंह तलवार के एनआईए केस में गिरफ्तार होने के बाद भी, बनीत सिंह तलवार उन व्यावसायिक इकाइयों को संभालता और चलाता रहा, जो हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थीं।
बनीत सिंह तलवार ने 'मैजेंट इंडिया' नाम की एक कंपनी को 55 लाख रुपये से ज्यादा की रकम दी। यह कंपनी हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थी। वित्तीय विश्लेषण से पता चला है कि इसमें कई बार 'राउंड-ट्रिपिंग' (फंड को घुमा-फिरा कर वापस लाना) की गई। इसमें हरप्रीत सिंह तलवार ने 'अपराध से प्राप्त रकम' को अलग-अलग व्यावसायिक इकाइयों में डाला, जो बाद में कई स्तरों के लेन-देन के जरिए वापस बनीत सिंह तलवार के पास पहुंच गई। इन लेन-देनों में अलग-अलग कंपनियों के बीच एक जैसी और मिलती-जुलती एंट्री पाई गईं, जो फंड के एक सुनियोजित प्रवाह की ओर इशारा करती हैं।
बनीत सिंह ने बेनामी इकाइयों के नाम पर वाहन खरीदने के लिए नकद जमा का इस्तेमाल किया, जिन्हें ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है। इसके अलावा, बनीत सिंह तलवार ने हरप्रीत सिंह तलवार से मिली रकम का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में किया था, जिनका फायदा आज भी हरप्रीत सिंह तलवार और उनका परिवार उठा रहा है। ईडी की यह गिरफ्तारी, ड्रग तस्करी के रैकेट और इसमें शामिल ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अपनाई गई 'सरकार की सामूहिक रणनीति' का हिस्सा है। ईडी, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की आर्थिक व्यवस्था की अखंडता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़े तार
ईडी की यह जांच, एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य लोगों के खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों के संबंध में यूएपीए (1967), एनडीपीएस एक्ट (1985) और आईपीसी (1860) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। इससे पहले एनआईए ने इस मामले में छह चार्जशीट दाखिल की थीं, जिनमें कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से चलने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
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आतंकवाद को फंडिंग में इस्तेमाल हुई नशे की काली कमाई
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' है, जो एक वांटेड आरोपी है। इसके साथ पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट और अफगान नागरिक भी शामिल थे। जांच से यह भी पता चला है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से हुई 76 करोड़ रुपये की कमाई को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजा गया। इसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फंड देने के लिए किया गया।
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कैसे रची गई साजिश?
ईडी द्वारा अब तक की गई वित्तीय जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित सामानों की तस्करी, ड्रग्स की बिक्री से हुई कमाई को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजने और अन्य सामानों के रूप में कुल 89 करोड़ रुपये की 'अपराध से प्राप्त रकम' जुटाई गई। इस प्रक्रिया में और कितनी 'अपराध से प्राप्त रकम' जुटाई गई है, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। बनीत सिंह तलवार, हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। हरप्रीत सिंह तलवार ने मास्टरमाइंड 'राजू दुबई' के साथ मिलकर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद की थी। जांच से पता चला है कि हरप्रीत सिंह तलवार के एनआईए केस में गिरफ्तार होने के बाद भी, बनीत सिंह तलवार उन व्यावसायिक इकाइयों को संभालता और चलाता रहा, जो हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थीं।
बनीत सिंह तलवार ने 'मैजेंट इंडिया' नाम की एक कंपनी को 55 लाख रुपये से ज्यादा की रकम दी। यह कंपनी हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थी। वित्तीय विश्लेषण से पता चला है कि इसमें कई बार 'राउंड-ट्रिपिंग' (फंड को घुमा-फिरा कर वापस लाना) की गई। इसमें हरप्रीत सिंह तलवार ने 'अपराध से प्राप्त रकम' को अलग-अलग व्यावसायिक इकाइयों में डाला, जो बाद में कई स्तरों के लेन-देन के जरिए वापस बनीत सिंह तलवार के पास पहुंच गई। इन लेन-देनों में अलग-अलग कंपनियों के बीच एक जैसी और मिलती-जुलती एंट्री पाई गईं, जो फंड के एक सुनियोजित प्रवाह की ओर इशारा करती हैं।
बनीत सिंह ने बेनामी इकाइयों के नाम पर वाहन खरीदने के लिए नकद जमा का इस्तेमाल किया, जिन्हें ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है। इसके अलावा, बनीत सिंह तलवार ने हरप्रीत सिंह तलवार से मिली रकम का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में किया था, जिनका फायदा आज भी हरप्रीत सिंह तलवार और उनका परिवार उठा रहा है। ईडी की यह गिरफ्तारी, ड्रग तस्करी के रैकेट और इसमें शामिल ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अपनाई गई 'सरकार की सामूहिक रणनीति' का हिस्सा है। ईडी, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की आर्थिक व्यवस्था की अखंडता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।