फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Economy of India is positive but employment number is not positive

7.2 फीसदी रहेगी भारत की जीडीपी, 81 लाख नौकरियों की है कमीः सीएसओ

Tue, 29 Jan 2019 04:19 PM IST
paliwal पालीवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Tue, 29 Jan 2019 04:19 PM IST
विज्ञापन
सार
  • कामकाजी महिलाओं की संख्या में भारी गिरावट।
  • हर साल कम से कम 81 लाख नौकरियां पैदा करना बेहद जरूरी।
  • दवा एवं स्वास्थ्य कंपनियों में सबसे बेहतर सैलरी पैकेज।
  • बेहतर वेतन में बंगलूरू आगे। 
loader
Economy of India is positive but employment number is not positive
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

लोकसभा चुनाव से पहले विश्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार होने के कारण अर्थव्यवस्था में बीते साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक बीते साल वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी। इस साल पहली तिमाही में इसके 7.2 फीसदी होने की संभावना है।



सीएसओ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2018- 19 के लिए आर्थिक वृद्धि की दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि परिषद का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन के तय लक्ष्य से दूर नहीं हुआ जा सकता है लेकिन इसके साथ ही सामाजिक क्षेत्र में ध्यान देना भी जरूरी है। 


परिषद का कहना है कि अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक कारक मजबूत बने हुए हैं लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। इनमें कई चुनौतियां ढांचागत क्षेत्र से जुड़ी हैं। इसमें कहा गया है, "विश्व अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि के लिए बहुत अच्छी संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं, खासतौर से विकसित देशों में इसकी संभावनाएं बेहतर नहीं है जबकि उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि के लिए काफी गुंजाइश दिखती है।" 

वहीं विश्व बैंक ने भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ता हुआ तो बताया ही है, साथ ही मानसून और महंगाई तक पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। लेकिन इस ओर एक चुनौती ये भी है कि आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के लिए हर साल 81 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी। भारत की रोजगार दर बढ़ सके, इसके लिए रोजगार बढ़ाने की आवश्यकता होगी। ये बात विश्व बैंक की रिपोर्ट में कही गई है। 

विश्व बैंक परिदृश्य समूह के निदेशक आह्यान कोसे का कहा है, "निवेश में तेजी आने तथा उपभोग के मजबूत बने रहने से हमारा अनुमान है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2018-19 में 7.3 फीसदी की दर से तथा 2019 और 2020 में 7.5 फीसदी की औसत दर से वृद्धि हो सकती है। भारत ने कारोबार सुगमता रैंकिंग में भी सुधार दर्ज किया है। भारत में वृद्धि की संभावनाएं हैं।" 

निवेश और निर्यात बढ़ाने की जरूरत

रिपोर्ट में भारत को लेकर कहा गया है कि यहां की वृद्धि दर 2019 में बढ़कर 7.3 फीसदी हो सकती है। यह निरंतर तभी आगे बढ़ेगी जब निजी निवेश और निजी खपत में सुधार आएगा। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक वृद्धि का फायदा उठाने के लिए निवेश और निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता है।

महिलाओं के लिए रोजगार की कमी

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास के दौरान महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं रही है। इस दौरान महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में रोजगार पैदा नहीं हो रहा है। बीते सालों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दशक पहले ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 44 फीसदी था। जो अब महज 27.4 फीसदी ही रह गया है। 

भारत के अलावा महिलाओं के रोजगार के मामले में पाकिस्तान (25 प्रतिशत) और अरब देशों (23 प्रतिशत) की स्थिति खराब है। वहीं पड़ोसी देश नेपाल की स्थिति काफी बेहतर है। यहां 80 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है। बांग्लादेश में भी भारत से बेहतर स्थिति है। यहां 57.4 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है, चीन में 64 फीसदी और अमेरिका में 56.3 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Indian Economy

कहां है सबसे बेहतर सैलरी पैकेज?

अगर सबसे अच्छे सैलरी पैकेज वाले सेक्टर की बात करें तो इस मामले में दवा एवं स्वास्थ्य कंपनियां सबसे ऊपर हैं। यहां सभी स्तरों पर  औसतन 9.6 लाख रुपये का सैलरी पैकेज है। इस मामले में दूसरे नंबर पर प्रोफेशनल सर्विसेज है। इस सेक्टर में औसतन सालाना सैलरी पैकेज 9.4 लाख रुपये है। तीसरे नंबर पर एफएमसीजी सेक्टर है। यानी रोजाना उपयोग की जाने वाली वस्तुओं वाला क्षेत्र। यहां औसतन सालाना वेतन 9.2 लाख रुपये है। चौथे नंबर पर 9.1 लाख औसतन सालाना वेतन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र है और पांचवें नंबर पर 9 लाख रुपये औसत पैकेज मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर, रियल एस्टेट एवं निर्माण क्षेत्र हैं।

निजी निवेश में कई बाधाएं

देश में निजी निवेश बढ़ने की राह में भी कई बाधाएं आ रही हैं। इनमें कंपनियों पर बढ़ता कर्ज, नियामक और नीतिगत चुनौतियां आदि शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका में बढ़ते ब्याज से भी भारत के निजी निवेश पर नकारात्मक प्रभाव होगा। बीते 18 महीने में थोक महंगाई दर सबसे कम रही है।

इस वहज से 81 लाख नौकरियां पैदा करना जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर महीने 13 लाख नए लोग कामकाज करने की उम्र में प्रवेश करते हैं। अब इनकी संख्या आने वाले समय के साथ बढ़ती जा रही है। ऐसे में देश को अधिक नौकरियां पैदा करना बेहद जरूरी है। विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के प्रमुख अर्थशास्त्री मार्टिन रामा का कहना है कि साल 2025 तक कामकाज की दुनिया में प्रवेश करने वाले लोगों का आंकड़ा 18 लाख से भी अधिक हो जाएगा। ऐसे में अभी से हर साल कम से कम 81 लाख नौकरियां पैदा करना बेहद जरूरी है। ये नौकरियां 2005-2015 के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार लगातार गिर रही हैं।

बेहतर वेतन में बंगलूरू आगे 

रैंडस्टैंड इंडिया के शोध एवं विश्लेषण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार देश में आईटी सेक्टर की बजाय हेल्थ सेक्टर में लोगों को बेहतर सैलेरी और राेजगार मिल रहा है। सबसे ज्यादा वेतन देने वाले शहर में बंगलूरू सबसे आगे है। इस रिपोर्ट के अनुसार औसत सैलरी पैकेज बंगलूरू में 10.8 लाख रुपये, पुणे में 10.3 लाख रुपये, मुंबई में 9.2 लाख रुपये, चेन्नई में 08 लाख रुपये, हैदराबाद में 7.9 लाख रुपये, कोलकाता में 7.2 लाख रुपये और दिल्ली एनसीआर में 9.9 लाख रुपये है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed