25 साल पहले आया भूकंप यहां के लोगों को आज भी झकझोर कर रख देता है
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महाराष्ट्र के लातूर जिले में किल्लारी गांव के निवासी हर साल 30 सितंबर को ‘काला दिन’ के रूप में देखते हैं। 25 साल पहले इसी दिन लातूर-उस्मानाबाद क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप आया था जिसमें करीब 10 हजार लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इतने लंबे समय बाद भी इस भयावह आपदा में बचे कुछ लोग बड़े पैमाने पर हुई क्षति के मुआवजे की बाट जोह रहे हैं।
तुलजापुर से कांग्रेस के पांच दफा के विधायक मधुकर चौहान का कहना है कि बहुत मदद की गई लेकिन लोगों के घावों को कभी नहीं भरा जा सकता है। प्रभावित लोग वापस रोजमर्रा की जिंदगी में लौट रहे हैं। किल्लारी के उप सरपंच अशोक पोतदार ने बताया कि क्षेत्र में अक्तूबर 1992 से जून 1993 तक भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
अब तक न भर सके जख्म
विनाशकारी भूकंप ने वहां के खेतिहर मजदूर सूर्यवंशी तानाजी को दोहरी क्षति पहुंचाई थी। तानाजी ने न केवल अपने परिजनों को खोया बल्कि सरकार ने उनकी 6.5 एकड़ जमीन को पुनर्वास के नाम पर ले लिया। अब वह पत्नी और 13 साल के बेटे के साथ टिन की छत वाली झोपड़ी में रहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला।
सूर्यवंशी का कहना है कि 30 सितंबर का दिन किल्लारी के लोगों के लिए ‘काला दिन’ है। भयानक त्रासदी की सालगिरह पर पूरा गांव इस दिन बंद हो जाता है। इस आपदा को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह गणेश विसर्जन के जुलूस में थे जब यह प्राकृतिक आपदा आई थी। वह घर की तरफ भागे, लेकिन उनका घर मलबे में तब्दील हो चुका था।
उन्होंने किसी तरह पत्नी, मां और भाई को मलबे से बाहर निकाला लेकिन उनके पिता, 10 साल का बेटा, उसके भाई के तीन बच्चे और भाभी की मौत हो चुकी थी। बाद में उसके भाई और मां ने भी दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि वह अदालत भी गए लेकिन न्याय नहीं मिल सका।
किल्लारी के एक अन्य निवासी प्रशांत हरांगुले का घर भी इस आपदा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया था। उनके परिवार के सदस्य घायल हो गए थे। वह बताते हैं कि उस वक्त हर पांच मिनट में भूकंप के झटके महसूस हो रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता साहसी व्यक्ति थे। वह कहते थे भगवान पर भरोसा रखो और जिंदगी में आगे बढ़ो।