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भूकंपरोधी आवासीय योजनाओं से ही बचेगी भविष्य में करोड़ों की जान

Fri, 26 Oct 2018 06:28 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 26 Oct 2018 06:28 PM IST
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Earthquake relief plans will be left only for crores of lives in the future.
भूकंप - फोटो : अमर उजाला

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में भूंकप से निबटने के लिए प्रोफेशनल तरीके से तैयारी करने की जरूरत है। इसके लिए पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को अपनाए जाने की आवश्यकता है। वहीं केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में बन रहे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की डिजाइनिंग भूकंपरोधी होनी चाहिए।

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विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की तरफ से आयोजित ‘भारत में भूकंप से निबटने की तैयारियां’ विषय पर आयोजित दो दिन की राष्ट्रीय वर्कशॉप में केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि किसी भी प्रोजेक्ट की डिजाइन के दौरान इस क्षेत्र के विशेषज्ञ नीति निर्माताओं को भूकंपरोधी तकनीकों की जानकारी दे सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्यों को चाहिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स की प्रेजेंटेशन तैयार करते समय वे उनके स्ट्रक्चर और डिजाइन को बिल्डिंग मटेरियल्स और टेक्नोलॉजी प्रमोशन काउंसिल के इंजीनियरों को अवश्य दिखाएं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि योजना तैयार करते समय आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, ताकि प्राकृतिक खतरों से निबटा जा सके।
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इसी कार्यशाला में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर संतोष कुमार ने कहा कि देश की सभी बहुत सी पुरानी ईमारतें भूकंप रोधी नहीं हैं, जिन्हें रेट्रोफिटिंग के जरिए भूंकप रोधी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग और शहरी विकास मंत्रालय के साथ मिल कर घरों, सड़कों, पुलों, ड्रेनेज, अस्पतालों और स्कूलों वगैरह में डिजास्टर रिस्क रिडक्शन फीचर शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटीज की फंडिंग के दौरान में पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को अपनाया जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि केरल जैसे राज्य में जब प्राकृतिक आपदा आती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान मध्यम वर्ग का ही होता है, लेकिन ग्रुप इंश्योरेंस के जरिए नुकसान को कम किया जा सकता है।


कार्यक्रम में बॉम्बे आईआईटी के प्रोफेसर रवि सिन्हा ने कहा कि दिल्ली में 1911 में 2 लाख 38 हजार जनसंख्या थी, जो 2018 में बढ़ कर 19 करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में 6 लाख से ज्यादा आबादी केवल झुग्गी क्षेत्रों में रहती है। दिल्ली भूकंप क्षेत्र-5 में आती है, जहां भूकंप से तबाही का ज्यादा खतरा है। क्योंकि दिल्ली के कई इलाके आबादी के लिहाज से बेहद सघन हैं, साथ ही कई ईमारतें भूकंपरोधी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली में भूंकप आता है तो आबादी के लिहाज से कम से कम 6 लाख 61 हजार शेल्टर्स की जरूरत होगी।

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