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Earthquake: पूर्वोत्तर में कांपी धरती, रिक्टर स्केल पर 5.8 रही तीव्रता, असम के उदलगुरी में था भूकंप का केंद्र

Sun, 14 Sep 2025 05:26 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 14 Sep 2025 05:26 PM IST
सार

भूकंप के झटके बांग्लादेश, नेपाल, भारत, म्यांमार, भूटान और दक्षिण चीन के कई हिस्सों तक पहुंचे। कई स्थानों पर लोग अचानक तेज झटकों से घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि झटके कई सेकंड तक महसूस किए गए। 

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Earthquake of 5.8 magnitude hits parts of north-east
earthquake भूकंप - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रविवार शाम पूर्वोत्तर और उससे सटे पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद डेढ़ घंटे के भीतर तीन और झटके आए, जिससे असम में कम से कम दो लोग घायल हो गए और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। 5.8 तीव्रता का पहला झटका शाम 4.41 बजे, 3.1 तीव्रता का दूसरा झटका शाम 4.58 बजे और उसके बाद 2.9 तीव्रता का एक और झटका शाम 5.21 बजे महसूस किया गया। उन्होंने बताया कि चौथा झटका 2.7 तीव्रता का था और शाम 6.11 बजे दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि तीसरे भूकंप का केंद्र असम का सोनितपुर था, जबकि बाकी तीन भूकंप पड़ोसी उदलगुरी जिले में आए।

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छात्रावास की छत गिरी
असम राज्य आपदा प्रबंधन (एएसडीएमए) ने कहा कि उदलगुरी में एक छात्रावास की छत गिरने से दो लड़कियां घायल हो गईं और राज्य के विभिन्न हिस्सों में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। जिले के अमगुरी इलाके में एक घर की छत गिर गई। सोनितपुर में दो घर और एक दुकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि विश्वनाथ जिले में कुछ घरों की दीवारों में हल्की दरारें आ गईं। दरांग और नलबाड़ी जिलों में भी कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। बताया गया होजई जिले में एक इमारत में दरारें आ गईं। 
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प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की पूर्वोत्तर यात्रा के बाद कोलकाता पहुंचे थे। बताया गया उन्होंने मुख्यमंत्री सरमा से हालात की जानकारी ली। साथ ही केंद्र की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हालात नियंत्रण में हैं और आपदा प्रबंधन दल नुकसान का आकलन करने में लगे हुए हैं। असम सरकार ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1079, 1070, 9401044617 और 1077 जारी किए हैं।

अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में झटके
भूकंप का असर अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी देखा गया। ईटानगर में लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। राज्य आपदा प्रबंधन सचिव दानी सुलु ने बताया कि अब तक कोई बड़ी क्षति या हताहत की खबर नहीं मिली है। मणिपुर के पश्चिमी हिस्सों में भी हल्के झटके दर्ज किए गए।

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पश्चिम बंगाल तक महसूस हुए झटके
असम से सटे पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों, खासकर सिलीगुड़ी में भी झटके महसूस किए गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमीन कुछ सेकंड तक हिली और लोग सतर्कता के तौर पर घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने पारंपरिक मान्यताओं के तहत शंख भी बजाए। राज्य सरकार ने साफ किया कि किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

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जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा। 
 
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

कितनी तबाही लाता है भूकंप?
रिक्टर स्केल
   असर
0 से 1.9    सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9    हल्का कंपन
3 से 3.9    कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर
4 से 4.9    खिड़कियां टूट सकती हैं और दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9    फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9    इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9     इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9     इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा     पूरी तबाही, कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।


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