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DNPA: क्या डिजिटल कंटेंट और उससे होने वाली आमदनी के बीच असंतुलन खत्म होगा? केंद्रीय मंत्री दे रहे इसके संकेत
Sat, 21 Jan 2023 06:13 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Sat, 21 Jan 2023 06:13 AM IST
सार
#e4mDNPADigitalMedia: डीएनपीए और एक्सचेंज फॉर मीडिया की तरफ से शुक्रवार को हुए सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने नए कानून के बारे में बताया, जो डिजिटल मीडिया में विषमताओं और असंतुलन को दूर करने में मददगार होगा।
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MoS IT Rajeev Chandrasekhar
- फोटो : ANI
विस्तार
''हम ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। इसके लिए कुछ कानून जरूरी हैं। हम डिजिटल डाटा संरक्षण विधेयक लेकर आए हैं। इसके कानून बनने के बाद नागरिकों को अपने डाटा के संरक्षण का अधिकार मिलेगा। दूसरा महत्वपूर्ण प्रयास यह है कि मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी कानून आने वाले महीनों में नए और प्रासंगिक डिजिटल इंडिया कानून में तब्दील होगा। इन्हीं दो प्रयासों के आधार पर डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल के पारिस्थितिक तंत्र को दिशा मिलेगी।'' यह कहना है केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर का, जो शुक्रवार को 'फ्यूचर ऑफ डिजिटल मीडिया' विषय पर हुए सम्मेलन के समापन सत्र में संबोधित कर रहे थे।
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यह सम्मेलन डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स असोसिएशन (डीएनपीए) और एक्सचेंज फॉर मीडिया की तरफ से हुआ था। डीएनपीए देश के 17 अग्रणी समाचार प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयों का संगठन है। यह डिजिटल परिवेश में समाचार संगठनों और बड़ी टेक कंपनियों के बीच समानता के साथ-साथ निष्पक्षता को बढ़ावा देता है।
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'असंतुलन और विषमता के मुद्दे पर ध्यान देंगे'
केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि डिजिटल मीडिया में विज्ञापनों की ताकत बढ़ी है। विज्ञापनों से होने वाली आमदनी और मुद्रीकरण ने पूरे तंत्र में असंतुलन पैदा किया है। छोटे समूहों और डिजिटल सामग्री बनाने वाले लाखों लोगों को इससे नुकसान हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व संचार मंत्री पॉल फ्लेचर ने जो बातें कहीं, हम भी इस विषय को इसी तरह देखते हैं। अभी डिजिटल सामग्री बनाने वालों का कंटेंट के मुद्रीकरण (मॉनेटाइजेशन) पर नियंत्रण नहीं है। कंटेंट से होने वाली कमाई को लेकर उनकी जरूरतों और बड़ी टेक कंपनियों के पास जो ताकत है, उसे लेकर विषमता और असंतुलन है। हमें उम्मीद है कि डिजिटल इंडिया कानून में हम इस मुद्दे पर ध्यान दे पाएंगे।
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उन्होंने कहा कि इंटरनेट के करोड़ों उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है। इंटरनेट पर पक्षपातपूर्ण और गलत खबरें सही और सटीक समाचारों की तुलना में बहुत तेजी से फैलती हैं। यह सरकार ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी चुनौती है।
'चैट जीपीटी और AI डिजिटल मीडिया को बदलकर रख देगा'
उन्होंने कहा कि मैंने तीन दशक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुजारे हैं, लेकिन हम अभी सबसे दिलचस्प दौर में जी रहे हैं। चैट जीपीटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चीजें कई मायनों में डिजिटल मीडिया को बदलकर रख देंगी। आज भारत में 80 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट जमावड़ा है। 2025-26 तक हो सकता है कि देश में 100 करोड़ लोग इंटरनेट जुड़े जाएंगे। इंटरनेट भी अब बदल चुका है। यह 10 वर्ष पहले जैसा इंटरनेट नहीं है। भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक उपकरण, क्लाउड, डिजिटल इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों के जरिए भारत में इंटरनेट का विकास होगा।
'इंटरनेट के बाजार में बड़े समूहों का दबदबा एक चुनौती'
उन्होंने कहा कि 2014 में हम सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर ही ज्यादा निर्भर थे, अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा व्यापक हो चुका है। 2014 से पहले हम जिसे डिजिटल अर्थव्यवस्था मानते थे, आने वाले वर्षों में वह वैसी नहीं रहेगी। पिछले एक दशक में इंटरनेट के बाजार में पहले से ज्यादा खुलापन है। अब इंटरनेट बाजार में बड़े समूहों के दबदबे की चुनौती है। सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं। इंटरनेट के करोड़ों उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है। इंटरनेट पर पक्षपातपूर्ण और गलत खबरें सही और सटीक समाचारों की तुलना में बहुत तेजी से फैलती है। यह न सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी एक चुनौती है।
'डिजिटल मीडिया का नेतृत्व करेगा भारत'
प्रारंभिक सत्र में ऑस्ट्रेलिया के सांसद और पूर्व संचार मंत्री पॉल फ्लेचर ने प्रमुख उद्बोधन दिया। फ्लेचर ने ऑस्ट्रेलिया में 'न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड' कानून लाकर डिजिटल युग में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में भारत डिजिटल की दुनिया में सबसे आगे होगा। अगले 10 साल के दौरान डिजिटल क्षेत्र में बहुत कुछ बदल जाएगा। इस दौरान हमें कई अहम पहलुओं पर न सिर्फ नजर रखनी होगी, बल्कि डिजिटल व्यवसाय और कंटेंट के लिहाज से बेहद जागरूक भी रहना होगा। ऑस्ट्रेलिया ने अपने डिजिटल अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और सफलता हासिल की। उसी तरह भारत को भी अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़नी होगी।
फ्लेचर ने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए डिजिटल मीडिया के अधिकारों के लिए गूगल और फेसबुक न्यूज मीडिया पब्लिशर्स के साथ व्यावसायिक डील पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि तमाम जद्दोहद के बाद ऑस्ट्रेलिया में न्यूज मीडिया पब्लिशर्स आज पहले के मुकाबले गूगल से लगभग 20 गुना और मेटा से 13 गुना ज्यादा कारोबार करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल मीडिया को लेकर संभावनाएं सबसे ज्यादा हैं। आने वाले दिनों में उसकी पहुंच सबसे ज्यादा होगी। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि भारत सरकार ने जिस तरह डिजिटल अपनाया और देश के लोगों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया, वह बेहद अहम कदम है।