नक्सलियों पर भारी पड़ा लॉकडाउन, खाने और पैसे की सप्लाई चेन टूटी तो करने लगे लूटपाट
- लॉकडाउन में नक्सलियों कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है
- कमाई का अहम जरिया यानी अफीम की खेती और इंडस्ट्री से अवैध वसूली हुई बंद
- ट्रांसपोर्ट न होने से जंगलों में अंदर रह रहे नक्सलियों की भूखे मरने की नौबत
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इन दोनों राज्यों में निर्माण स्थलों और इंडस्ट्री से जो अवैध वसूली होती थी, वह भी अब बंद हो गई है। खाने-पीने के सामान और पैसे की सप्लाई चेन टूट चुकी है, इसलिए अब उन्होंने ग्रामीणों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वहां से खाने-पीने का सामान और पैसा लूटा जा रहा है।
ग्रामीणों को धमकी दी जा रही है कि उन्हें सामान या रुपये-पैसे देने से इंकार किया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। हर घर से दो सौ रुपये मांगे जा रहे हैं। सीआरपीएफ के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, लॉकडाउन 1.0 में नक्सलियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
खासतौर पर, उनकी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है। पहले ये लोग एक माह का अग्रिम राशन जमा कर लेते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस बार उनके राशन की सप्लाई नहीं हो सकी। नतीजा, जंगलों में बहुत अंदर रह रहे नक्सलियों को खाने-पीने के सामान की किल्लत महसूस होने लगी।
अब 15 अप्रैल से लॉकडाउन 2.0 शुरू हो गया है, ऐसे में 3 मई से पहले उन्हें सामान की सप्लाई नहीं हो सकती। साथ ही उनकी कमाई का अहम जरिया यानी अफीम की खेती और इंडस्ट्री से अवैध वसूली, यह सब बंद हो चला है। रोड ट्रांसपोर्ट चालू न होने के कारण अफीम को इधर-उधर नहीं पहुंचाया जा रहा है।
ऐसे में अब नक्सलियों ने ग्रामीण क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इन गांवों में जो लोग इनकी सप्लाई चेन जारी रखने में मदद करते थे, अब उन्हीं के जरिए लोगों को धमकी दिलाई जा रही है कि वे अनाज और दूसरा राशन एकत्रित कर गांव के बाहर रख दें।
इसके अलावा हर घर से दो सौ रुपये भी मांगे जा रहे हैं। सुरक्षाबलों के अनुसार, जो लोग ऐसा नहीं करते, नक्सली रात को वहां पहुंचकर लूटमार करने लगते हैं। दंतेवाड़ा के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से चूंकि नक्सलियों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, इसलिए वे बौखला गए हैं।
इसी के चलते वे ग्रामीणों का राशन लूट रहे हैं। अरनपुर, बारसूर और कटेकल्याण थाना क्षेत्र से राशन लूटने की शिकायतें मिली हैं। हालांकि ये कोई तीन क्षेत्रों की बात नहीं है, हमें सूचना मिली है कि ये लूटपाट बड़े पैमाने पर हो रही है।
डर के चलते ज्यादातर ग्रामीण मुंह नहीं खोल रहे हैं। सुरक्षाबल और लोकल पुलिस के जवान अपने स्तर पर ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।