एक सवाल पूछने के लिए डीएसपी देवेंद्र ने सतीश बाबू को 13 बार बुलाया था सीबीआई मुख्यालय
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सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार, जिसे भ्रष्टाचार के आरोप में सोमवार को गिरफ़्तार कर लिया गया है, उसने शिकायतकर्ता सतीश बाबू को 13 बार सीबीआई मुख्यालय बुलाया था। हर बार एक ही सवाल पूछा जाता कि बताओ मोईन अख़्तर क़ुरैशी के साथ तुम्हारा क्या संबंध है। सतीश ने उसे कई बार जवाब दिया कि वह एक निवेशक बैंकर है। उसने मोईन की कंपनी में पचास लाख रुपये निवेश किए हैं। पहली पेशी से लेकर आखिरी पेशी तक उसने यही जवाब मौखिक तौर पर और लिखित रुप से दिया, लेकिन केस का जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार कुछ मानने को तैयार नहीं था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, देवेंद्र कुमार ने सबसे पहले 9 अक्तूबर 2017 को सतीश बाबू के पास नोटिस भेजा था। उसमें लिखा था कि बाबू को तीन दिन बाद यानी 12 अक्तूबर को सीबीआई मुख्यालय में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना है। सवाल वही था कि आपका मोईन से क्या संबंध है। दिनभर यही सवाल चलता रहा। शाम को सतीश अपने घर के लिए रवाना हो गया। इसके बाद 17 अक्तूबर को दूसरा नोटिस आ गया।
23 अक्तूबर को वह देवेंद्र कुमार के सामने पेश हुआ। तीसरी पेशी एक नवंबर 2017 को हुई। इस बार उसकी स्टेंटमेंट रिकॉर्ड की गई। सतीश को लगा कि अब लंबे समय तक कोई नोटिस नहीं आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 30 नवंबर को फिर नोटिस आ गया। इसके बाद 13 फरवरी 2018 को डीएसपी देवेंद्र ने एक और नोटिस भेज दिया। सतीश 19 नवंबर को पेश हुआ, तब तक बतौर रिश्वत 2.95 करोड रुपये दिये जा चुके थे। शिकायतकर्ता ने सोचा कि अब तो नोटिस मिलने का सिलसिला थम जाएगा। उसका यह भ्रम दो दिन में ही टूट गया। 21 फ़रवरी को देवेंद्र कुमार ने नोटिस भेज दिया। इस बार सतीश को कोई जरूरी काम था तो वह सीबीआई मुख्यालय नहीं पहुंचा। 26 फरवरी को डीएसपी का मेल आया कि वह अपने बैंक खाते की डिटेल और कुछ अन्य दस्तावेज भेज दे। इसका जवाब भी दे दिया गया। डीएसपी ने पांच जून को फिर से नोटिस थमा दिया। उसमें लिखा था कि नौ जून को उसे जांच अधिकारी के सामने पेश होना है।
सतीश को बुखार था तो उसने पेशी के लिए छूट मांगी। तब तक देवेंद्र कुमार ने उसे यह भी नहीं बताया था कि उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हो चुका है। 25 सितंबर 2018 को जब वह पेरिस जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा तो उसे पता चला कि उसके नाम का लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया है। डीएसपी ने उसके सभी तर्क दरकिनार करते हुए 27 सितंबर को सीबीआई मुख्यालय में हाजिर होने का आदेश दे दिया। वह एक अक्तूबर को पेश हुआ।चूं कि अब डीएसपी के पास जानने के लिए कुछ बचा नहीं था तो उसने सतीश को ज्वाइंट डायरेक्टर से मिलवाया।इतना कुछ होने के बाद भी डीएसपी शांत नहीं हुआ। उसने 3 अक्तूबर को आने के लिए दोबारा से नोटिस भेज दिया। हालांकि 15 अक्तूबर को सतीश ने करीब 36 लाख रुपये दे दिये, मगर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। अंत में उसे सीबीआई निदेशक के समक्ष सारा मामला रखना पड़ा।
आठ मोबाइल फ़ोन खोलेंगे कई राज
गिरफ़्तारी के वक्त सीबीआई ने डीएसपी के घर से आठ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। सूत्रों का कहना है कि ये वही फोन हैं, जिन्हें डीएसपी देवेंद्र विदेश में बैठे लोगों से सेटिंग करने के लिए इस्तेमाल करता था। बताया जा रहा है कि इनमें मोईन केस से जुड़े सोमेश, मनोज प्रसाद और कई दूसरे लोगों के अहम राज छिपे हैं। जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि देवेंद्र के पास से बरामद हुए मोबाइल फोन रॉ के एक बड़े अफसर की भी पोल खोल सकते हैं। मोबाइल फोन में से छह फॅोन स्मार्ट फोन की श्रेणी में आते हैं, जबकि दो फोन सामान्य हैं। इनमें केवल कॉल की सुविधा है, नेट नहीं है। कई फ़ोन ऐसे भी हैं, जिनके व्हाट्सएप पर लम्बी वीडियो कॉल हुई हैं।