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डीएससी के जवानों ने फिर किया सीधा मौत का सामना
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 31 May 2016 07:59 PM IST
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आयुध डिपो में हुई 16 मौतों में 14 डीएससी जवानों ने गंवाई जान
- फोटो : ani
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सेना के गोला बारूद डिपो समेत वायु सेना और नौसेना के संवेदनशील ठिकानों की पहली सुरक्षा पंक्ति माने जाने वाली डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) के जवानों ने एक बार फिर मौत का सीधा सामना किया है। पुलगांव के सेंट्रल एमुनेशन डिपो लगी आग से मरने वाले 16 जवानों में 14 डीएससी के जवान हैं।
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घायलों में भी डीएससी के जवान ज्यादा हैं। इससे पहले पठानकोट एयरबेस की सुरक्षा में तैनात डीएससी के जवानों ने ही जैश आतंकवादियों की पहली गोलियों का सामना किया था। 2 जनवरी को हुए पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए आतंकियों के इस हमले में शहीद हुए सात सैन्य अधिकारियों में पांच डीएससी के थे।
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- आयुध डिपो में हुई 16 मौतों में 14 डीएससी जवानों ने गंवाई जान
- पठानकोट आतंकी हमले में भी आतंकियों की गोली का पहला शिकार हुए डीएससी के जवान
करीब 32000 की संख्या वाली डीएससी सेना की छठी बड़ी यूनिट है। इसका काम सेना के संवेदनशील आयुध डिपो और वायुसेना व नौसेना के ठिकानों की सुरक्षा करना है। लेकिन इसे सेना की बुढ़ी यूनिट के नाम से जाना जाता है। क्योंकि डीएससी में सेना से रिटायर हुए नॉन कमिशन अधिकारियों को चुना जाता है।
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सेना सूत्रों के मुताबिक यह चर्चा आम है कि डीएससी पर सैन्य ठिकानों की सुरक्षा का अहम दायित्व है। लेकिन बल की औसत आयु 45 साल होने की वजह से उनके फिटनेस लेवल पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक यही वजह है कि किसी बड़े हादसे के समय डीएससी के जवानों के मौत की संभावना ज्यादा होती है।