क्या भारत जीत पाएगा कोरोना वैक्सीन की ये अंतरराष्ट्रीय रेस? कोवाक्सिन पर टिकी देश की उम्मीद
- केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ‘ड्रग डिस्कवरी हैकेथोन’ (#DrugDiscoveryHackathon 2020) की शुरूआत की
- दुनिया की जो कोरोना वैक्सीन सबसे पहले बनाएगी, उस कंपनी को मिलेगा पुरस्कार
- भारत बायोटेक कंपनी की वैक्सीन कोवाक्सिन को जुलाई माह में मानव परीक्षण करने की अनुमति मिली
विस्तार
कोरोना वैक्सीन के विकास के मामले में ऑक्सफोर्ड की स्थिति सबसे बेहतर बताई गई है, जो पहले ही मानव परीक्षण के स्टेज में पहुंच चुकी है। लेकिन भारत की एक कंपनी को भी इस दौड़ में बेहतर स्थिति में बताया गया है।
भारत बायोटेक नाम की इस कंपनी की वैक्सीन कोवाक्सिन (Covaccene) को जुलाई माह में मानव परीक्षण करने की अनुमति मिल चुकी है।
जानकारी के मुताबिक़ भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (NIV) के सहयोग से कोरोना की वैक्सीन कोवाक्सिन (Covaxin) बना लेने का दावा किया है।
इसी जुलाई माह में पूरे देश में इसका मानव परीक्षण किया जाएगा। प्री-क्लीनिकल स्टेज में इस दवा का काफी बेहतर परिणाम बताया गया है। इस स्टेज के परिणामों के आधार पर ही कंपनी को कोवाक्सिन का मानव परीक्षण करने की अनुमति मिली है।
अगर कोवाक्सिन का मानव परीक्षण के दौरान ट्रायल सफल रहता है, तो कोरोना के बड़े खतरे से निबटना आसान हो जायेगा।
डॉ. हर्षवर्धन ने भी कहा है कि जल्दी ही वैक्सीन का आविष्कार कर लिया जाएगा और कोरोना भी एड्स जैसी बीमारियों की तरह एक सामान्य बीमारी बनकर रह जाएगी, जो पहले तो बहुत खतरनाक साबित हुई थीं, लेकिन बाद में एक सामान्य बीमारी बनकर रह गईं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इस साल के अंत तक कोरोना की वैक्सीन का आविष्कार किया जा सकता है।
अन्य कंपनियां भी दौड़ में शामिल
भारत बायोटेक के अलावा देश की कुछ अन्य बड़ी मेडिकल कम्पनियां भी वैक्सीन बनाने की इस वैश्विक दौड़ में शामिल हैं। इन कंपनियों में मेडिकल क्षेत्र की बड़ी कंपनी जायड्स कैडिला (Zydus Cadila), सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) और पैंसिया बायोटेक (Panacea Biotec) शामिल हैं।
इनकी वैक्सीन का काम भी काफी तेज गति से आगे चल रहा है। हालांकि, इनमें किसी को अभी तक मानव परीक्षण की अनुमति नहीं मिली है।
ऑक्सफोर्ड सबसे आगे
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विभिन्न देशों में इस समय 140 वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है। इसमें 16 वैक्सींस पर काम इनके अंतिम स्टेज में चल रहा है। इन 16 वैक्सींस में चीन में पांच, अमेरिका में तीन, दो इंग्लैंड में और आस्ट्रेलिया, जर्मनी और रूस में एक-एक वैक्सीन पर काम तेजी से चल रहा है।
इसमें ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन एस्ट्रा जेनेका (Astra Zeneka) अभी तक सबसे बेहतर स्थिति में बताई गई है। इसे सबसे कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र के लोगों में भी बेहतर काम करता हुआ बताया गया है।
यह प्रयोग के तीसरे चरण में है और इस समय आठ हजार लोगों पर इसका परीक्षण चल रहा है।
अमेरिका की बायोटेक फर्म इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स की वैक्सीन आईएनओ-4800 भी प्रयोगों के दौरान बेहतर परिणाम देती हुई बताई गई है।
इसे कोरोना वायरस के डीएनए को लक्ष्य करके तैयार किया गया है, जिससे यह संक्रमित लोगों को इस बायर्स से लड़ने में सक्षम बनाती है।
कंपनी ने दावा किया है कि पहले चरण के परिणाम में इसने सकारात्मक असर दिखाया है। अब कंपनी दूसरे और तीसरे चरण के प्रयोग एक साथ करने की रणनीति बनाकर जल्दी से जल्दी वैक्सीन तैयार करने का दावा कर रही है।
जर्मनी की कंपनी जर्मन बायोटेक ने दावा किया है कि उसकी दवा (BNT162b1) का दो दर्जन मरीजों पर परीक्षण सफल रहा है।
दवा के इस्तेमाल के 28 दिन के बाद इन लोगों में कोरोना की प्रतिरोधक क्षमता वाले एंटीबॉडीज बनते हुए पाए गए हैं।
बायोएनटेक और फाइजर (BioNTech-Pfizer) इस वर्ष के अंत तक इस दवा की भारी मात्रा में उत्पादन करने का लक्ष्य लेकर आगे चल रहे हैं।
चीन की दावेदारी भी मजबूत
चीन पर आरोप है कि कोरोना वायरस उसकी गलती से पूरी दुनिया में फैला है। लेकिन चीन इस वायरस की वैक्सीन बनाने के मामले में भी सबसे आगे चल रहा है।
इसकी एक वैक्सीन को चीन की सेना ने अपने सैनिकों पर प्रयोग करना भी शुरू कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की कंपनी कैनसीनो बायोलोजिक्स (CanSino Biologics) की दवा भी बेहतर परिणाम दिखा रही है।
चीन की एक अन्य वैक्सीन (Ad5-nCoV) को कनाडा में मानव परीक्षण की अनुमति भी मिल गई है।