मुसीबत का साथी बनने जा है ड्रोन, प्रधानमंत्री कार्यालय के दिशा-निर्देशन में बनी योजना
पीएमओ के दिशा-निर्देशन में नागर विमानन मंत्रालय ने ड्रोन की कार्यप्रणाली, लाइसेंसिंग और क्षेत्र को लेकर अधिसूचना जारी की है। इसे मानवरहित यान प्रणाली (यूएएस) नियम 2020 का नाम दिया गया है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पीएमओ के दिशा-निर्देशन में नागर विमानन मंत्रालय ने ड्रोन की कार्यप्रणाली, लाइसेंसिंग और क्षेत्र को लेकर अधिसूचना जारी की है। इसे मानवरहित यान प्रणाली (यूएएस) नियम 2020 का नाम दिया गया है।
लोगों से एक माह में सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा। कानून मंत्रालय की मंजूरी के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, योजना के शुरू में ड्रोन का इस्तेमाल कृषि (ए), आपदा (डी), स्वास्थ्य (एच) और लॉ एनफोर्समेंट (एल) के क्षेत्र में होगा।
उसके बाद डिलीवरी ड्रोन को लेकर आगे बढ़ा जाएगा। ट्रायल के लिए अभी 13 लोगों को लाइसेंस दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों की देखरेख में कई माह तक ट्रायल चलेगा।
मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, पीएमओ के सीधे निर्देशन में जिन अहम प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, उनमें से ड्रोन भी एक है। यही वजह है कि अब ड्रोन के नियमों को लेकर अधिसूचना जारी की गई है।
सरकार ने अधिसूचना के मुताबिक अभी से ड्रोन की कार्यप्रणाली जांचने के लिए लंबा ट्रायल भी शुरू कर दिया है। इसके कई दौर रहेंगे। विभिन्न एजेंसियों और विभाग इसे अपने स्तर पर परखेंगे।
सरकार का प्रयास है कि ड्रोन का सार्वजनिक इस्तेमाल सबसे पहले उन जगहों पर किया जाए, जहां लोगों का सीधा जुड़ाव है। इसी के चलते शुरु में ड्रोन का इस्तेमाल कृषि, आपदा, स्वास्थ्य और लॉ एनफोर्समेंट के क्षेत्र किया जाएगा।
आपदा और कृषि के क्षेत्र में इसके इस्तेमाल की अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। अभी किसान किसी भी दवा या खाद को पूरे खेत में डाल देता है, जबकि उसकी जरूरत हर टुकड़े पर नहीं होती।
ड्रोन की मदद से किसान को यह पता लग सकेगा कि कहां पर खाद या दवा के छिड़काव की आवश्यकता है। किसी दूसरे देश से आने वाले कीड़ों को ड्रोन की मदद से बॉर्डर पर ही खत्म किया जा सकता है।
यह उपकरण तेजी से पूरे बॉर्डर पर स्प्रे करने में सक्षम है।
इसके अलावा सुनियोजित दंगे, बेकाबू भीड़, नक्सल क्षेत्र या आतंकियों के साथ होने वाले ऑपरेशन में ड्रोन की अहम भूमिका देखी गई है। आपदा के समय में भी इस उपकरण ने शानदार काम किया है।
कहां पर कितना नुकसान या पहले से की गई तैयारी का जायजा लेना हो, तो उसके लिए ड्रोन की मदद कारगर साबित हुई है। आपदा के दौरान हेलीकॉप्टर से सर्वे न केवल महंगा होता है, बल्कि खराब मौसम में वह जोखिम का कारण भी बन जाता है। ऐसे में ड्रोन मददगार साबित होता है।
इसके जरिए अपराधियों को मदद न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। मंत्रालय इस बात को लेकर सचेत है कि जब ड्रोन की मदद से डिलीवरी सिस्टम चालू हो तो नशीले पदार्थों की तस्करी शुरू हो सकती है।
अपराध के कई नए धंधे भी देखने को मिलेंगे। लोगों को घर बैठे बिठाए नशा मिलने लगेगा, इसे रोकने की थ्योरी पर सरकार काम कर रही है।
ड्रोन का लाइसेंस किसे दिया जाए, पायलट की योग्यता, पंजीकरण की श्रेणियां, पट्टे पर देने के नियम और प्रावधान का उल्लंघन होने पर जुर्माना या सजा और दूसरे नियमों की जानकारी सरकारी अधिसूचना में दी गई है।
ड्रोन को उसके वजन के हिसाब से चार श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे कम वजन वाली श्रेणी को नैनो का दर्जा दिया गया है। इसमें 250 ग्राम तक के ड्रोन रहेंगे।
ये अधिकतम 50 फुट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं। दो किलोग्राम, 25 किलो और 150 किलोग्राम तक के ड्रोन को मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। इससे अधिक वजन को लेकर भी योजना बन रही है।