आतंकी हमला: ड्रोन तकनीक पाकिस्तान के जरिए अब जम्मू तक पहुंच गई, इसमें मास्टर है चीन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्मेनिया-अजरबैजान की लड़ाई में इस्तेमाल हुई ड्रोन तकनीक अब पाकिस्तान के जरिए जम्मू तक पहुंच गई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की जमीन पर ऐसे बहुत से ड्रोन आ चुके हैं। चूंकि चीन ऐसे ड्रोन बनाने का मास्टर है तो पाकिस्तान के लिए इनकी उपलब्धता बहुत आसान हो जाती है।
दिक्कत यह है कि ऐसे ड्रोन की मदद से सैन्य प्रतिष्ठानों और मुख्यालयों के अलावा पब्लिक सेक्टर की इकाइयों को भी निशाना बनाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञ, कर्नल रोहित देव (रिटायर्ड) के अनुसार, यह ड्रोन पावर प्लांट, डैम और सामरिक महत्व वाले पुलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अफगानिस्तान में तालिबानी और अमेरिकी सेनाओं ने एक-दूसरे के खिलाफ ऐसे ड्रोन से जमकर हमले किए हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन से यह पहला हमला है। इसका निशाना कुछ भी हो सकता है। ये जरूरी नहीं है कि ड्रोन से केवल सैन्य ठिकानों या सुरक्षा एजेंसियों पर ही हमला किया जाएगा। इसकी मदद से सेना के हेलीकॉप्टर और विमानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
भीड़ वाले बाजार या दूसरे सार्वजनिक स्थान भी जोखिम के दायरे में आ जाते हैं। रक्षा विशेषज्ञ कर्नल रोहित देव कहते हैं कि अगर कोई शत्रु राष्ट्र या आतंकी समूह ड्रोन तकनीक से हमला करने की योजना बनाता है तो उसके लिए 24 घंटे नजर रखनी होगी। मजबूत संचार तकनीक के जरिए भी ड्रोन को कुछ हद तक रोका जा सकता है।
तालिबान और आईएसआईएस इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। यूएस फोर्स ने अफगानिस्तान के अलावा आर्मेनिया में बड़े स्तर पर ड्रोन के जरिए हमले किए हैं। आजकल ऐसे ड्रोन भी आ रहे हैं जिनकी मदद से कम रेंज वाली मिसाइल भी छोड़ी जा सकती है। आईईडी अटैक या हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए ड्रोन तकनीक बहुत सरल मानी जाती है।
सुरक्षा एजेंसियों को ध्यान लगाना होगा
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड) के अनुसार, अभी इस मामले की जांच चल रही है। पाकिस्तान का इस हमले में हाथ संभव है। वहां की सेना या आईएसआई ने ऐसा हमला करने की योजना बनाई हो, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी ड्रोन की मदद से भारतीय सीमा में एके 47 जैसे घातक हथियार गिराए गए हैं।
पंजाब में कई जगह ऐसे मामले सामने आए हैं। ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद के अलावा ड्रग्स भी आते रहे हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इसका स्थायी तोड़ निकालना होगा। चूंकि अभी ड्रोन के इस्तेमाल की अच्छी-बुरी बातें सामने आ रही हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को उनके दुरुपयोग की तरफ ज्यादा ध्यान लगाना होगा।
आतंकियों की मदद कर रहा पाकिस्तान
भारत पाकिस्तान सीमा पर भले ही सीज फायर है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को बराबर मदद पहुंचाई जा रही है। एयरपोर्ट पर कोई प्रमुख युद्धक विमान नहीं था, लेकिन वहां एमआई 17 हेलीकॉप्टर और वायुसेना के मालवाहक विमान थे। ड्रोन वहां तक भी पहुंच सकता था।
ड्रोन हमले से यह सबक लेना चाहिए कि अब आमने-सामने की बजाए तकनीक की लड़ाई होगी। सेना के हर मोर्चे को ड्रोन हमले से बचाना होगा। साथ ही दूसरे प्रतिष्ठानों और आम जनता को भी ड्रोन हमले की जद से बाहर रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।