DRDO: घातक क्रूज मिसाइल विकसित कर रहा डीआरडीओ, पनडुब्बी से जमीन और पोत पर हमला करने में होगी सक्षम
DRDO: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली एक क्रूज मिसाइल बना रहा रहा है, जो जमीन और पोत पर हमला करने में सक्षम होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली एक क्रूज मिसाइल बना रहा रहा है, जो जमीन और पोत पर हमला करने में सक्षम होगी। मिसाइल का परीक्षण इस साल फरवरी में 402 किलोमीटर की रेंज पर किया गया था और इसने परीक्षण में मिशन के सभी लक्ष्यों को हासिल किया था।
स्वदेशी जैमर पॉड विकसित करने की परियोजना काम कर रही आईएएफ
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) एलसीए मार्क 1ए लड़ाकू विमान के लिए एक स्वदेशी जैमर पॉड विकसित करने की परियोजना पर काम कर रही है। वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि उसके बेस रिपेयर डिपो को अपने लड़ाकू और परिवहन विमानों और अन्य हथियार प्रणालियों पर आवश्यक कई उपकरणों का स्वदेशीकरण करने और आयात में कटौती करने का काम सौंपा गया है।
निजी उद्योग ने भारतीय सेना को सौंप मल्टीमोड हैंड ग्रेनेड
सोलर ग्रुप इकोनॉमिक एक्सप्लोसिवलिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट कर्नल विक्रम ने कहा, मल्टीमोड हैंड ग्रेनेड पहला उत्पाद है जिसे एक एक निजी उद्योग ने स्वदेशी रूप में निर्मित किया और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों अलावा भारतीय सेना को सौंपा। हमने पहले ही दस लाख की मात्रा में इन्हें बनाया है और इन्हें सफलतापूर्व भारतीय सेना को सौंपा है। यह एक हैंड ग्रेनेड का बहुत ही सुरक्षित और उन्नत प्रोटोटाइप है।
उन्होंने कहा, इसमें सुरक्षा विशेषताएं भी जोड़ी गई हैं और इसकी क्षमता पूर्ववर्ती एचई 36 हैंड ग्रेनेड की तुलना में बहुत अधिक है। इसे भारतीय सेना द्वारा अच्छे तरीके से रिसीव किया गया है और हम जल्द ही अगले ऑर्डर की उम्मीद कर रहे हैं।
सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) की निदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने कहा, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यू एंड सी) मुख्य रूप से एयर-टू-एयर चीजों का पता लगाने के लिए है। यह आने वाले विमानों का पता लगाएगा। जबकि आई-स्टार का इस्तेमाल मुख्य रूप से घुसपैठ की तरह है। यह मुख्य रूप से सीमा पार क्या हो रहा है इसकी निगरानी करेगा।
उन्होंने आगे कहा, अच्छे इमेजिंग रडार की मांग है..हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग रडार। इसलिए डीआरडीओ ने एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना शुरू की थी और हम पहले ही उसमें प्रगति कर चुके हैं और जिस तकनीक की जरूरत है, वह भी प्रगति में है। समानांतर वायुसेना भी आई-स्टार कार्यक्रम को लेकर आगे बढ़ चुकी है।