डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन की तकनीक तो बना ली, लेकिन ब्रह्मास्त्र या पुष्पक विमान बनने में लगेंगे कई साल!
- अमेरिका,रूस, चीन के पास पहले से है तकनीक
- इंजन बनाने में सफलता बड़ी कामयाबी
- अब उपग्रह छोड़ना होगा आसान, पिछले साल अगस्त में इसरो ने किया था परीक्षण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सपने को सपने को पिछले साल इसरो ने एक उम्मीद की किरण दिखाई थी, अब डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंसट्रेशन व्हीकल-एचएसटीडीवी) तकनीक का प्रदर्शन करके हकीकत में बदलने का भरोसा दे दिया है। हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन की तकनीक आने के बाद भविष्य में भारत के अर्जुन द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र और रावण द्वारा इस्तेमाल किए गए पुष्पक विमान को विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। डीआरडीओ के एक पूर्व प्रमुख का कहना है कि हमें यह सपना पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम दिखाया करते थे।
क्या था कलाम का सपना?
पूर्व राष्ट्रपति कलाम रक्षा विज्ञान के उम्दा वैज्ञानिक थे। पृथ्वी, अग्नि, आकाश जैसी मिसाइलों को विकसित करने का दौर उनके समय में आरंभ हुआ था। जब वह डीआरडीओ प्रमुख थे। कलाम ने नौसेना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी कहा था कि आने वाले समय में ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है, जो दुश्मन के लक्ष्य को भेदकर वापस आ जाए। कलाम की इस परिकल्पना के बारे में डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक एम नटराजन ने 2009 में अमर उजाला को बताया था। नटराजन के अनुसार भारत स्क्रैमजेट इंजन की परियोजना पर काम कर रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना है और इसके विकसित होने के अंतरिक्ष में उपग्रह भेजना, दूर देशों की हवाई यात्रा करना तथा दुश्मन के ठिकाने को पलक झपकते ही ध्वस्त कर देना बहुत आसान हो जाएगा। यानी भारत ब्रह्मास्त्र और पुष्पक विमान की तकनीक हासिल कर लेगा।
क्या है स्क्रैमजेट इंजन प्रणाली?
यह एक ऐसा इंजन है, जिसके माध्यम से भविष्य में कोई ध्वनि से भी 6-9 गुना तेज गति वाला नागरिक उड्डयन विमान, फाइटरजेट, उपग्रह ले जाने वाला रॉकेट विकसित किया जा सकता है। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इंजन वायुमंडल से ऑक्सीजन लेकर अपना ईंधन खुद वायुमंडल में ही बनाएगा, इस्तेमाल करेगा और लक्ष्य पूरा करके वापस भी आ सकेगा। इसके लिए स्क्रैमजेट इंजन में पहले से हाइड्रोजन होगी। इस तरह से किसी भी उपग्रह को छोड़ने में न केवल बड़ी सहायता मिलेगी, बल्कि खर्च भी बहुत कम हो जाएगा।
इंजन तो आ गया, ब्रह्मास्त्र और पुष्पक विमान बनने में लगेगा समय
डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन तकनीक का प्रदर्शन किया है। यह एक बहुत बड़ी कामयाबी है। यह तकनीक अमेरिका और रूस के पास काफी पहले से है। वह इसके अगले चरण का अनुसंधान कर रहे हैं। चीन ने भी इसे विकसित कर लिया है। जबकि जापान और जर्मनी जैसे देश भी विकसित करने की कतार में हैं। पिछले साल डीआरडीओ ने 19 अगस्त को स्क्रैमजेट तकनीक को लेकर परीक्षण किया था। एक साल बाद डीआरडीओ ने इस तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। लेकिन अब इंजन तकनीक के विकास के बाद आगे की परियोजनाओं का नतीजा आने में समय लग सकता है। भविष्य में इस तकनीक से ब्रह्मास्त्र जैसा अचूक और लक्ष्य भेदने के बाद योद्धा के तरकश में लौट आने वाला अस्त्र या रावण के पुष्पक विमान की तरह बिना ईंधन के हवा में उड़ने वाला पुष्पक विमान विकसित किया जा सकता है।
साढ़े तीन घंटे में पहुंच सकते हैं लंदन, साढ़े चार घंटे में अमेरिका
अभी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अमेरिका के शिकागो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने में हवाई जहाज से करीब 15-16 घंटे लगते हैं। लंदन जाने में 10 घंटे से अधिक लगते हैं। रक्षा वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में स्क्रैमजेट इंजन प्रोपल्शन प्रणाली आधारित नागरिक उड्डय विमान को विकसित किए जाने के बाद यह दूरी महज साढ़े तीन घंटे (लंदन) और साढ़े चार घंटे में (वाशिंगटन) पूरी की जा सकती है। एक ही स्क्रैमजेट इंजन प्रोपल्शन प्रणाली पर कई उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं मिसाइल को दुश्मन के ठिकाने तक ले जाने प्रणाली के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।