{"_id":"69ecfdafd8722dd1020e4101","slug":"drdo-armored-vehicles-launch-warship-hydrodynamic-tests-india-defense-indigenous-technology-2026-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"DRDO: भारत में विकसित हुए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म; युद्धपोत परियोजना से जुड़ा हाइड्रोडायनामिक परीक्षण पूरा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
DRDO: भारत में विकसित हुए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म; युद्धपोत परियोजना से जुड़ा हाइड्रोडायनामिक परीक्षण पूरा
Sat, 25 Apr 2026 11:15 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:15 PM IST
सार
डीआरडीओ ने अहिल्यानगर में सेना के लिए दो उन्नत स्वदेशी बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च किए और नौसेना के युद्धपोत का सफल हाइड्रोडायनामिक परीक्षण पूरा किया। ये उपलब्धियां भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और सैन्य मारक क्षमता को वैश्विक मानकों पर मजबूत करती हैं, जिससे सशस्त्र बलों की भविष्य की परिचालन जरूरतें पूरी होंगी।
विज्ञापन
डीआरडीओ ने उन्नत बख्तरबंद प्लेटफार्म का अनावरण किया
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। शनिवार को डीआरडीओ ने न केवल भारतीय सेना के लिए दो उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च किए, बल्कि भारतीय नौसेना के एक आगामी युद्धपोत के लिए महत्वपूर्ण हाइड्रोडायनामिक परीक्षणों को भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
अत्याधुनिक बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण
डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (वीआरडीई) में दो नए बख्तरबंद प्लेटफॉर्म (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण किया। इन वाहनों को भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
इन प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी विशेषता इनमें लगा स्वदेशी 30 मिमी 'क्रूलेस टर्रेट' है। यह टर्रेट न केवल मारक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, इन वाहनों में 7.62 मिमी पीके गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की क्षमता भी मौजूद है। बेहतर गतिशीलता के लिए इनमें हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जिससे ये वाहन कठिन बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं।
विज्ञापन
सुरक्षा के लिहाज से इन्हें अंतरराष्ट्रीय 'स्टेनैग लेवल 4 और 5' मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो इन्हें ब्लास्ट और बैलिस्टिक हमलों से बचाते हैं। साथ ही, हाइड्रो-जेट तकनीक के कारण ये वाहन पानी में भी चलने में सक्षम (उभयचर) हैं। इस परियोजना में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड और कई एमएसएमई इकाइयों ने सहयोग किया है। वर्तमान में इनमें 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है, जिसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है।
ये भी पढ़ें: क्या नहीं थमेगी जंग?: ईरान के रुख से नाराज ट्रंप बोले- विटकॉफ-कुशनर PAK नहीं जाएंगे; US को किस नुकसान की आशंका
नौसेना के युद्धपोत परियोजना में बड़ी कामयाबी
दूसरी ओर, डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के लिए उन्नत हाइड्रोडायनामिक प्रदर्शन आकलन और मॉडल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण कार्य का नेतृत्व विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (एनएसटीएल) ने किया, जिसमें नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का पूरा सहयोग रहा।
इस परीक्षण के दौरान युद्धपोत के डिजाइन की सटीकता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखा गया। इसमें 'कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स' (सीएफडी) सिमुलेशन और प्रायोगिक मॉडल परीक्षण जैसे उच्च स्तरीय मानकों का उपयोग किया गया। डीआरडीओ के अनुसार, इस दौरान जहाज के प्रतिरोध, प्रणोदन (propulsion), समुद्री स्थिरता और संचालन क्षमता जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का व्यापक विश्लेषण किया गया।
परीक्षण के परिणामों को वैश्विक मानकों के बराबर पाया गया है। डॉ. समीर वी. कामत ने इस परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण निष्कर्षों और दस्तावेजों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप प्रोडक्शन और एक्विजिशन नियंत्रक संजय साधु को सौंप दिया है। इन दोनों ही सफलताओं को भारत के रक्षा उत्पादन तंत्र को मजबूत करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
अत्याधुनिक बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण
डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (वीआरडीई) में दो नए बख्तरबंद प्लेटफॉर्म (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण किया। इन वाहनों को भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
विज्ञापन
इन प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी विशेषता इनमें लगा स्वदेशी 30 मिमी 'क्रूलेस टर्रेट' है। यह टर्रेट न केवल मारक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, इन वाहनों में 7.62 मिमी पीके गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की क्षमता भी मौजूद है। बेहतर गतिशीलता के लिए इनमें हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जिससे ये वाहन कठिन बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं।
विज्ञापन
सुरक्षा के लिहाज से इन्हें अंतरराष्ट्रीय 'स्टेनैग लेवल 4 और 5' मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो इन्हें ब्लास्ट और बैलिस्टिक हमलों से बचाते हैं। साथ ही, हाइड्रो-जेट तकनीक के कारण ये वाहन पानी में भी चलने में सक्षम (उभयचर) हैं। इस परियोजना में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड और कई एमएसएमई इकाइयों ने सहयोग किया है। वर्तमान में इनमें 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है, जिसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है।
ये भी पढ़ें: क्या नहीं थमेगी जंग?: ईरान के रुख से नाराज ट्रंप बोले- विटकॉफ-कुशनर PAK नहीं जाएंगे; US को किस नुकसान की आशंका
नौसेना के युद्धपोत परियोजना में बड़ी कामयाबी
दूसरी ओर, डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के लिए उन्नत हाइड्रोडायनामिक प्रदर्शन आकलन और मॉडल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण कार्य का नेतृत्व विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (एनएसटीएल) ने किया, जिसमें नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का पूरा सहयोग रहा।
इस परीक्षण के दौरान युद्धपोत के डिजाइन की सटीकता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखा गया। इसमें 'कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स' (सीएफडी) सिमुलेशन और प्रायोगिक मॉडल परीक्षण जैसे उच्च स्तरीय मानकों का उपयोग किया गया। डीआरडीओ के अनुसार, इस दौरान जहाज के प्रतिरोध, प्रणोदन (propulsion), समुद्री स्थिरता और संचालन क्षमता जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का व्यापक विश्लेषण किया गया।
परीक्षण के परिणामों को वैश्विक मानकों के बराबर पाया गया है। डॉ. समीर वी. कामत ने इस परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण निष्कर्षों और दस्तावेजों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप प्रोडक्शन और एक्विजिशन नियंत्रक संजय साधु को सौंप दिया है। इन दोनों ही सफलताओं को भारत के रक्षा उत्पादन तंत्र को मजबूत करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन