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DRDO: हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल की राह आसान, स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण; तकनीक हासिल करने वाला चौथा देश भारत

Sun, 10 May 2026 02:09 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sun, 10 May 2026 02:09 AM IST
सार

DRDO Achieves Breakthrough: भारत ने ध्वनि की गति से तेज यानी हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में लंबी छलांग लगाई है। हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला डीआरडीएल ने मिसाइलों में लगने वाले स्क्रैमजेट इंजन के मुख्य हिस्से का सफल परीक्षण किया। इसके साथ, उन्नत एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में भारत अग्रणी देशों की कतार में मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।

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DRDO achieves breakthrough in hypersonic missile development programme: Govt
DRDO ने किया स्क्रैमजेट का सफल परीक्षण - फोटो : X @AIRNewsHindi

विस्तार

भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने शनिवार को बताया कि उसने 'एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर' का सफल और लंबी अवधि वाला परीक्षण पूरा कर लिया है। इसे भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए बड़ा तकनीकी मील का पत्थर माना जा रहा है।
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डीआरडीएल हैदराबाद में किया गया परीक्षण
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला यानी डीआरडीएल की हैदराबाद स्थित सुविधा में किया गया। इस दौरान स्क्रैमजेट इंजन ने 1,200 सेकंड यानी करीब 20 मिनट तक लगातार काम किया। इससे यह साबित हुआ कि इंजन अत्यधिक तापमान और दबाव को लंबे समय तक सहन कर सकता है, जो हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बेहद जरूरी होता है।
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20 मिनट तक चला स्क्रैमजेट इंजन
हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज की रफ्तार से पांच गुना या उससे ज्यादा गति से उड़ सकती हैं। इतनी तेज रफ्तार के कारण मिसाइल का तापमान बहुत बढ़ जाता है। ऐसे में 'एक्टिव कूलिंग' तकनीक मिसाइल को सुरक्षित रखने और लंबी दूरी तक उड़ाने में अहम भूमिका निभाती है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इससे पहले जनवरी 2026 में भी इसी तकनीक का 700 सेकंड तक सफल परीक्षण किया गया था, लेकिन अब 1,200 सेकंड तक का रन-टाइम हासिल करना बड़ी उपलब्धि है। यह परीक्षण हैदराबाद की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया। जनवरी में डीआरडीओ ने 700 सेकंड यानी करीब 13 मिनट का परीक्षण किया था। ताजा कामयाबी ने बीते सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। यह स्वदेशी रूप से विकसित इंजन सुपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग तकनीक पर आधारित है, जो मिसाइलों को हाइपरसोनिक बनाने में सक्षम बनाता है। अप्रैल, 2025 में भी इसका छोटा परीक्षण किया गया था।


6,100 किमी की रफ्तार से उड़ान में मिसाइलें सक्षम
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक यानी 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। यह अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन की मदद से संभव होता है। इस सफल परीक्षण ने स्क्रैमजेट इंजन के डिजाइन व परीक्षण सुविधा की क्षमता की पुष्टि की है।

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सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ, उद्योग सहयोगियों और वैज्ञानिक संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस परीक्षण के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास उन्नत हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता है। इसे भविष्य की युद्ध तकनीकों और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की बड़ी प्रगति माना जा रहा है।

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