सामने आई डॉ. कफिल अहमद की लापरवाही, BRD मेडिकल कॉलेज में सभी ड्यूटी से हटाया गया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रविवार को बीआरडी अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट और वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर कफील खान को हटा दिया गया है। कफील को अस्पताल की सभी ड्यूटी से हटा दिया गया है। डॉक्टर कफील खान बीआरडी अस्पताल में इंसेफेलाइटिस विभाग के इंचार्ज थे। साथ ही उनके पास कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल और अस्पताल अधीक्षक की भी जिम्मेदारी थी।
वहीं इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, किसी भी डॉक्टर पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। जांच चालू है और जो भी अपराधी है, उसे बचाया नहीं जाएगा।
Don't want to make personal comments on any doctor. Probe is on & whosoever be the culprit, won't be spared: KP Maurya on Dr. Kafeel Khan pic.twitter.com/Q8NBLXbdj0
विज्ञापन विज्ञापन— ANI UP (@ANINewsUP) August 14, 2017
डॉ. कफील चर्चा में क्यों आए
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो दिनों के भीतर लगभग 30 बच्चों की मौत की घटना पिछले दिनों से सुर्खियों में है। गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बाल्यरोग विभाग के इंचार्ज डॉ. कफील अहमद को हटा दिया गया है। शनिवार की रात वॉर्ड में जब ऑक्सीजन की कमी हुई तो वॉर्ड डॉ. कफील अहमद की ही निगरानी में था।
ये भी पढ़ें- गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार, 29 बच्चों सहित 50 की मौत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 30 बच्चों की मौत की घटना के बाद डॉ. कफील का नाम चर्चा में आया। जिस वार्ड में बच्चों की मौत हुए उसके इंचार्ज डॉ. कफील थे। ऑक्सीजन की सप्लाई का जिम्मा भी इन्हीं के पास था। डॉ. कफील को दो साल पहले कॉन्ट्रैक्ट पर बाल रोग विभाग में तैनात किए गए थे। छह महीने पहले वह आयोग से चयनित होकर दोबारा कॉलेज में आए। पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र ने उन्हें इंसेफेलाइटिस वार्ड का नोडल अधिकारी बनाया था।
गुरुवार रात के दो बजे इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील अहमद को सूचना दी कि अगले एक घंटे बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी। इस सूचना के बाद ही डॉक्टर की नींद उड़ गई। वह अपने कार से मित्र डॉक्टर के अस्पताल गए और वहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर शुक्रवार को तीन बजे सीधे बीआरडी पहुंचे। तीन सिलेंडरों से बाल रोग विभाग में करीब 15 मिनट ऑक्सीजन सप्लाई हो सकी।
डॉ. कफील पर ऑक्सीजन सिलेंडर में हेर-फेर का आरोप
डॉ. कफील पर ऑक्सीजन सिलेंडर में हेर-फेर का आरोप
डॉ. कफील अहमद 11-12 अगस्त को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 30 बच्चों की मौत के लिए सुर्खियों में रहे। ऑक्सीजन खत्म होने पर एक बार फिर वार्ड में हालात बेकाबू होने लगे। मरीज तड़प रहे थे, तीमारदार व्याकुल होने लगे, वार्ड में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी परेशान होने लगे। उधर, ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप आने में करीब दो घंटे देर थी। रिपोर्ट बताती है कि अहमद अपने निजी क्लिनिक के लिए अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर चुरा रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी मौत की वजह का एक कारण था, क्योंकि वह चुपके से कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर अपने क्लिनिक में ले जाया करते थे। माना जाता है कि शनिवार को बर्खास्त हुए प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा ने भी अहमद के साथ मिलकर काम किया करते थे। जब 11 अगस्त की रात मामला नियंत्रण से बाहर हुआ तो डॉ. कफिल अहमद ने जल्द ही अपने क्लिनिक से अस्पताल में तीन ऑक्सीजन सिलिंडरों को भेजा।
डॉ. कफील मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष तथा नीओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) के प्रमुख थे। उन पर मेडिकल कॉलेज से छुट्टी लेकर निजी अस्पताल चलाने सहित कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।