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देश में 2022 तक 1.5 लाख कैंसर कल्याण केंद्र खुलेंगे : हर्षवर्धन
Thu, 01 Aug 2019 03:15 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 01 Aug 2019 03:15 AM IST
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केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन
- फोटो : PTI
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने राज्यसभा में बुधवार को बताया कि सरकार कैंसर को लेकर गंभीर है और 2022 तक देश भर में 1.5 लाख कैंसर कल्याण केंद्र खोले जाएंगे। केंद्रीय मंत्री कैंसर रोगियों के लिए सुविधाओं पर चर्चा के दौरान सपा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव के सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि अभी देश में कैंसर का उपचार करने वाले 482 केंद्र और 695 टेलीथेरेपी मशीने हैं।
हर्षवर्धन ने कहा, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा है। सरकार 31 दिसंबर 2022 तक देशभर में डेढ़ लाख कल्याण केंद्र स्थापित करना चाहती है। जिनमें 20 हजार स्थापित हो गए हैं और 31 मार्च 2020 तक इनकी संख्या 40 हजार हो जाएगा।
उन्होंने कहा, पीएम मोदी खुद नेशनल कैंसर ग्रिड की निगरानी कर रहे हैं, इस ग्रिड में 177 संस्थान, कार्यकर्ता, मरीज और वकालत समूह शामिल हैं। अभी आठ संस्थाएं सिर्फ कैंसर की रोकथाम के लिए काम कर रही हैं जिनमें दो ओडिशा और बिहार में काम कर रही हैं। हर्षवर्धन ने बताया कि भारत में सामान्य तौर पर पाए गए 60 से 70 फीसदी तक कैंसर का उपचार संभव है बस इनका पता समय रहते चलना चाहिए।
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हर्षवर्धन ने कहा, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा है। सरकार 31 दिसंबर 2022 तक देशभर में डेढ़ लाख कल्याण केंद्र स्थापित करना चाहती है। जिनमें 20 हजार स्थापित हो गए हैं और 31 मार्च 2020 तक इनकी संख्या 40 हजार हो जाएगा।
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उन्होंने कहा, पीएम मोदी खुद नेशनल कैंसर ग्रिड की निगरानी कर रहे हैं, इस ग्रिड में 177 संस्थान, कार्यकर्ता, मरीज और वकालत समूह शामिल हैं। अभी आठ संस्थाएं सिर्फ कैंसर की रोकथाम के लिए काम कर रही हैं जिनमें दो ओडिशा और बिहार में काम कर रही हैं। हर्षवर्धन ने बताया कि भारत में सामान्य तौर पर पाए गए 60 से 70 फीसदी तक कैंसर का उपचार संभव है बस इनका पता समय रहते चलना चाहिए।
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सभी जिलों में कैंसर जांच केंद्र खोलने की मांग उठी
इस बीच राज्यसभा में विभिन्न पार्टियों के सदस्यों ने बुधवार को देश के सभी जिला अस्पतालों में कैंसर जांच केंद्र स्थापित करने की मंाग की ताकि बीमारी से पीड़ित गरीबों को महंगी जांच में राहत मिले। सदस्यों ने सरकार के समक्ष हर जिले में सरकारी कैंसर उपाचार केंद्र खोलने की भी मांग रखी। सांसदों ने देश में कैंसर के हालातों से निपटने के लिए कई सुझाव दिए। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च बढ़ाने, कैंसर उपचार में सुधार और इसे सस्ता बनाने, जांच केंद्रों की सुविधा बढ़ाने शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ ने भी अपनी एक रिपोर्ट में आगाह किया था कि भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ेंगे। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 2025-30 के बीच मधुमेह, कैंसर और हाईपरटेंशन देश के लिए बड़ी मुसीबत होंगे और आबादी का बड़ा वर्ग इनकी चपेट में होगा। उन्होंने सरकार से इन बीमारियों की रोकथाम के लिए अधिक फंड उपलब्ध कराने की मांग की।
मेडिकल उपकरणों के नियमन का कानून बने : आनंद शर्मा
वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बुधवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार से देश में मेडिकल उपकरणों के नियमन का कानून बनाने की मांग की। शर्मा ने कहा, बीते एक दशक में बड़ी संख्या में कूल्हा प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को गलत उपकरण बेचे गए।
इन्हें यूएस फार्मा दिग्गज जॉनसन एंड जॉनसन ने बनाया था। इनकी वजह से संक्रमण, कोबाल्ट और क्रोमियम रिसाव से खून में जहर बनने जैसी समस्याएं हुईं जिसके बाद कई मरीजों की मौत भी हो गई। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका पहले ही इन उपकरणों पर 2010 में ही प्रतिबंध लगा चुके हैं लेकिन भारत में कमजोर कानून के चलते इन्हें धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ ने भी अपनी एक रिपोर्ट में आगाह किया था कि भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ेंगे। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 2025-30 के बीच मधुमेह, कैंसर और हाईपरटेंशन देश के लिए बड़ी मुसीबत होंगे और आबादी का बड़ा वर्ग इनकी चपेट में होगा। उन्होंने सरकार से इन बीमारियों की रोकथाम के लिए अधिक फंड उपलब्ध कराने की मांग की।
मेडिकल उपकरणों के नियमन का कानून बने : आनंद शर्मा
वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बुधवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार से देश में मेडिकल उपकरणों के नियमन का कानून बनाने की मांग की। शर्मा ने कहा, बीते एक दशक में बड़ी संख्या में कूल्हा प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को गलत उपकरण बेचे गए।
इन्हें यूएस फार्मा दिग्गज जॉनसन एंड जॉनसन ने बनाया था। इनकी वजह से संक्रमण, कोबाल्ट और क्रोमियम रिसाव से खून में जहर बनने जैसी समस्याएं हुईं जिसके बाद कई मरीजों की मौत भी हो गई। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका पहले ही इन उपकरणों पर 2010 में ही प्रतिबंध लगा चुके हैं लेकिन भारत में कमजोर कानून के चलते इन्हें धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।