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सख्ती: न्यूयार्क में तैनात इस महिला आईपीएस को सरकार ने दिखाया अनुशासनात्मक कार्रवाई और त्यागपत्र का भय

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 17 Jul 2021 06:14 PM IST

सार

दिल्ली पुलिस में संयुक्त पुलिस आयुक्त रहीं गरिमा भटनागर को तीन साल पहले प्रतिनियुक्ति पर न्यूयार्क भेजा गया था। वहां पर उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति सेना ऑपरेशन, विभाग में चीफ मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट सेक्शन पी5, में तैनाती मिली थी। उन्हें जुलाई 2021 में वापस दिल्ली पुलिस में लौटना था...
आईपीएस गरीमा भटनागर
आईपीएस गरीमा भटनागर - फोटो : File Photo
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विस्तार

केंद्र सरकार में 'डीओपीटी' द्वारा 'एजीएमयूटी कैडर' की एक महिला आईपीएस, जो इस वक्त न्यूयार्क में प्रतिनियुक्ति पर हैं, एक्सटेंशन के मामले को लेकर उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई और त्यागपत्र का भय दिखाया गया है। यह मामला आईपीएस लॉबी में चर्चा का विषय बना हुआ है। उक्त महिला आईपीएस दिल्ली में 2017 के दौरान ज्वाइंट सीपी 'यातायात' रह चुकी हैं। खास बात ये है कि डीओपीटी द्वारा जो पत्र जारी किया गया है, उसमें लिखा है, अगर उक्त अधिकारी प्रतिनियुक्ति खत्म होने के फौरन बाद अपने मूल कैडर में ज्वाइन नहीं करती हैं तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। वेतन भत्तों एवं पेंशन में कटौती संभव है। साथ ही यह मान लिया जाएगा कि उक्त अधिकारी ने त्यागपत्र दे दिया है। खास बात है कि एक ही समय में किसी आईपीएस के खिलाफ 'अनुशासनात्मक कार्रवाई और त्यागपत्र' कैसे संभव है, इस बात पर सवाल उठाया जा रहा है।

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बता दें कि दिल्ली पुलिस में संयुक्त पुलिस आयुक्त रहीं गरिमा भटनागर को तीन साल पहले प्रतिनियुक्ति पर न्यूयार्क भेजा गया था। वहां पर उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति सेना ऑपरेशन, विभाग में चीफ मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट सेक्शन पी5, में तैनाती मिली थी। उन्हें जुलाई 2021 में वापस दिल्ली पुलिस में लौटना था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आग्रह पर सक्षम प्राधिकारी ने उनकी विदेश प्रतिनियुक्ति अवधि को तीन माह के लिए यानी 14 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है। डीओपीटी द्वारा इस बाबत जो पत्र जारी किया गया है, उसमें एक बड़ा पैरा लिख दिया गया है। हालांकि एक्सटेंशन के दूसरे मामलों में इस तरह का पैरा देखने को नहीं मिलता। केंद्र सरकार में आए दिन विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में नौकरशाहों के एक्सटेंशन आदेश जारी होते हैं, लेकिन इस तरह का सख्ती वाला पैरा उनके पत्र में दिखाई नहीं पड़ता।

आईपीएस गरिमा भटनागर के एक्सटेंशन लैटर में लिखा है, जिस दिन उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म हो गई है, उसी दिन से उन्हें कार्य मुक्त मान लिया जाएगा। अगर सक्षम प्राधिकारी ने जरूरी मंजूरी लेने के बाद उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि को खत्म होने से पहले बाकायदा लिखित आदेश में न बढ़ाया हो तो वे कार्रवाई के दायरे में आ जाएंगी। अगर वे स्वीकृत प्रतिनियुक्ति अवधि से ज्यादा समय तक वहां रहती हैं, चाहे किसी भी कारण से, तो ऐसी स्थिति में वे अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं। इसके तहत यह प्रावधान भी है कि तय प्रतिनियुक्ति अवधि से अधिक अवधि 'ओवर स्टे' का समय न तो सेवा के लिए काउंट हो सकता है और न ही पेंशन या इंक्रीमेंट के लिए उसे माना जाएगा। पत्र में आगे लिखा है, अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि उक्त अधिकारी ने सेवा से त्यागपत्र दे दिया है। विभाग द्वारा उसके लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

खास बात ये है कि भले ही संबंधित अधिकारी ने त्यागपत्र न दिया हो, लेकिन त्यागपत्र मानकर कार्रवाई शुरू कर देंगे। अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें कई तरह के आर्थिक एवं सेवाकाल से जुड़े दंड शामिल हैं, उसके साथ ही त्यागपत्र भी मान लिया जाएगा।  

यहां दोनों कार्रवाई एक ही साथ करने की बात कही गई है। अगर त्यागपत्र मान लिया जाता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का क्या फायदा होगा। उसकी रिपोर्ट जैसी भी आए, उसका कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। वजह, संबंधित अधिकारी तो उस वक्त तक सेवा से बाहर हो ही जाएगा। डीओपीटी के एक अधिकारी के मुताबिक, कई बार प्रतिनियुक्ति पर गए अधिकारी तय समय पर अपने मूल कैडर में वापसी नहीं करते। इससे काम प्रभावित होता है। विदेश में प्रतिनियुक्ति पर गए अधिकारियों को अपनी प्रतिनियुक्ति खत्म होते ही तुरंत मूल कैडर में ज्वाइन करना चाहिए। अगर कोई अधिकारी विभाग के नियमों का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई भी संभव है।
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