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ट्रंप की युद्ध नीति पर संसद में संग्राम: ईरान पर सांसदों का शिकंजा, इस्राइल को बम देने पर रोक, बवाल क्यों?
Thu, 17 Sep 2026 03:49 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 17 Sep 2026 03:49 AM IST
सार
ट्रंप प्रशासन इस्राइल को 2.8 अरब डॉलर के हथियार देने की तैयारी में है, जिसमें 40 हजार 2,000 पाउंड के भारी बम शामिल हैं। प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के शीर्ष डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स ने आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बिक्री को मंजूरी देने से इनकार किया है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आपातकालीन राष्ट्रीय सुरक्षा प्रक्रिया के जरिए सामान्य कांग्रेस समीक्षा को दरकिनार कर सकते हैं। यह प्रस्ताव गाजा युद्ध के बीच इस्राइल की सैन्य क्षमता बढ़ाने के अमेरिकी कदमों की कड़ी का हिस्सा है।
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डोनाल्ड ट्रंप , अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की इस्राइल को 2.8 अरब डॉलर के भारी हथियार बेचने की योजना पर सवाल उठ गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति में शीर्ष डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। न्यूयॉर्क से सांसद मीक्स ने बुधवार को कहा कि उन्हें गंभीर और अभी तक दूर नहीं हुई चिंताएं हैं कि इन शक्तिशाली बमों का इस्तेमाल गाजा और लेबनान के घनी आबादी वाले इलाकों में कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, 'ट्रंप प्रशासन ने पर्याप्त भरोसा नहीं दिलाया है कि नेतन्याहू सरकार इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी कानून के मुताबिक और आम नागरिकों की उचित सुरक्षा के साथ करेगी। इसलिए मैं इस समय इस बिक्री को मंजूरी नहीं दूंगा।'
इस बिक्री में कितने और किस तरह के बम शामिल हैं?
प्रस्तावित 2.8 अरब डॉलर के पैकेज में 40 हजार ऐसे भारी बम शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक का वजन 2,000 पाउंड है। इन बमों को लेकर पहले भी चिंता सामने आ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 2,000 पाउंड वाले बमों की एक खेप को इस आशंका के चलते रोक दिया था कि इनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर लोगों की जान जा सकती है।
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क्या अब हथियारों की बिक्री रुक जाएगी?
मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए मीक्स की आपत्ति से बिक्री पर रोक लगने की संभावना नहीं है। सांसदों को इस प्रस्तावित सौदे की अनौपचारिक सूचना मंगलवार को दी गई थी। औपचारिक रूप से कांग्रेस को सूचना दिए जाने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सामान्य कांग्रेस समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यह तय करना होगा कि यह सौदा तत्काल राष्ट्रीय सुरक्षा हित से जुड़ा हुआ है।
ट्रंप प्रशासन के लिए यह सौदा इतना अहम क्यों?
यह प्रस्ताव इस्राइल की सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में ट्रंप प्रशासन के हालिया कदमों की शृंखला का हिस्सा है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब गाजा में युद्ध को लेकर इस्राइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। यह युद्ध 7 अक्तूबर 2023 को हमास के घातक हमले के बाद शुरू हुआ था। संघर्ष में गाजा में दसियों हजार फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है और पूरा इलाका बुरी तरह तबाह हो गया है। अमेरिका की मध्यस्थता से एक नाजुक संघर्षविराम हुआ था, लेकिन हिंसा जारी रही है।
यह भी पढ़ें: चांद पर दो साल पहले हुई जोरदार टक्कर: अब मिला 728 फीट का गड्ढा; हैरान क्यों हैं वैज्ञानिक?
अमेरिकी संसद युद्ध के विरुद्ध?
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने या सैन्य कार्रवाई जारी रखने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार को सीमित करने के लिए मंगलवार को तीसरी बार प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के सात सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
डेमोक्रेट सांसद सेठ मॉल्टन ने इसे पेश किया था। इसमें राष्ट्रपति से ईरान के साथ जारी संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को हटाने को कहा गया है। हालांकि, कुछ तय परिस्थितियों में आत्मरक्षा से जुड़ी कार्रवाई की छूट रहेगी। तीसरी बार लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया। इनमें मैरियनेट मिलर-मीक्स, जैक नन और नैन्सी मेस पहली बार ऐसे प्रस्ताव के पक्ष में आए। थॉमस मैसी, टॉम बैरेट, वॉरेन डेविडसन और ब्रायन फिट्जपैट्रिक पहले भी ऐसे प्रयासों का समर्थन कर चुके हैं।
प्रस्ताव का सीनेट से पास होना निश्चित नहीं : जैक नन ने कहा कि वह एक और अनिश्चित अवधि वाले युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे। यह जून और जुलाई के बाद ट्रंप की ईरान संबंधी सैन्य शक्तियों को सीमित करने की तीसरी कोशिश है। प्रस्ताव का सीनेट (ऊपरी सदन) से पारित होना अभी निश्चित नहीं है। इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास जाएगा। एजेंसी
युद्ध से टूट की कगार पर अमेरिकी सेना, हथियारों के घटते भंडार
ईरान के खिलाफ जारी युद्ध ने अमेरिकी सेना को अभूतपूर्व संकट में धकेल दिया है। इस अभियान से जुड़े दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लंबा खिंचता संघर्ष अमेरिकी सैन्य क्षमता को पूरी तरह टूट के कगार पर ले आया है। पेंटागन के बजट, हथियारों के घटते भंडार, बढ़ते हताहतों और नौसैनिक बेड़ों की बदहाली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें युद्ध के अप्रैल की शुरुआत में ही समाप्त होने की बात कही गई थी।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं का बेहद कम आकलन किया था, जिसकी भारी कीमत अब अमेरिकी नौसैनिकों और संसाधनों को चुकानी पड़ रही है।
28 फरवरी को युद्ध के शुरुआती घंटों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने बहरीन के मनामा स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय को नष्ट कर दिया था। कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने माना बेस तबाह हुआ था।
आपूर्ति शृंखला पर असर
फारस की खाड़ी के बंदरगाहों पर नौसेना को अपने 24 से अधिक युद्धपोतों के बेड़े के लिए रसद व्यवस्था हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थानांतरित करनी पड़ी है। वहां से ईंधन और राशन की 2,000 मील लंबी आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने में 14 से 18 दिन का चक्र लग रहा है। इसे बनाए रखना चुनौती है।
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उन्होंने कहा, 'ट्रंप प्रशासन ने पर्याप्त भरोसा नहीं दिलाया है कि नेतन्याहू सरकार इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी कानून के मुताबिक और आम नागरिकों की उचित सुरक्षा के साथ करेगी। इसलिए मैं इस समय इस बिक्री को मंजूरी नहीं दूंगा।'
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इस बिक्री में कितने और किस तरह के बम शामिल हैं?
प्रस्तावित 2.8 अरब डॉलर के पैकेज में 40 हजार ऐसे भारी बम शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक का वजन 2,000 पाउंड है। इन बमों को लेकर पहले भी चिंता सामने आ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 2,000 पाउंड वाले बमों की एक खेप को इस आशंका के चलते रोक दिया था कि इनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर लोगों की जान जा सकती है।
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- प्रस्तावित हथियार सौदे की कीमत 2.8 अरब डॉलर है। पैकेज में 40 हजार 2,000 पाउंड के भारी बम शामिल हैं।
- डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने बिक्री को मंजूरी देने से इनकार किया है। मीक्स ने गाजा और लेबनान में घनी आबादी वाले इलाकों को लेकर चिंता जताई है।
क्या अब हथियारों की बिक्री रुक जाएगी?
मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए मीक्स की आपत्ति से बिक्री पर रोक लगने की संभावना नहीं है। सांसदों को इस प्रस्तावित सौदे की अनौपचारिक सूचना मंगलवार को दी गई थी। औपचारिक रूप से कांग्रेस को सूचना दिए जाने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सामान्य कांग्रेस समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यह तय करना होगा कि यह सौदा तत्काल राष्ट्रीय सुरक्षा हित से जुड़ा हुआ है।
ट्रंप प्रशासन के लिए यह सौदा इतना अहम क्यों?
यह प्रस्ताव इस्राइल की सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में ट्रंप प्रशासन के हालिया कदमों की शृंखला का हिस्सा है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब गाजा में युद्ध को लेकर इस्राइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। यह युद्ध 7 अक्तूबर 2023 को हमास के घातक हमले के बाद शुरू हुआ था। संघर्ष में गाजा में दसियों हजार फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है और पूरा इलाका बुरी तरह तबाह हो गया है। अमेरिका की मध्यस्थता से एक नाजुक संघर्षविराम हुआ था, लेकिन हिंसा जारी रही है।
यह भी पढ़ें: चांद पर दो साल पहले हुई जोरदार टक्कर: अब मिला 728 फीट का गड्ढा; हैरान क्यों हैं वैज्ञानिक?
अमेरिकी संसद युद्ध के विरुद्ध?
दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने या सैन्य कार्रवाई जारी रखने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार को सीमित करने के लिए मंगलवार को तीसरी बार प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के सात सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
डेमोक्रेट सांसद सेठ मॉल्टन ने इसे पेश किया था। इसमें राष्ट्रपति से ईरान के साथ जारी संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को हटाने को कहा गया है। हालांकि, कुछ तय परिस्थितियों में आत्मरक्षा से जुड़ी कार्रवाई की छूट रहेगी। तीसरी बार लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया। इनमें मैरियनेट मिलर-मीक्स, जैक नन और नैन्सी मेस पहली बार ऐसे प्रस्ताव के पक्ष में आए। थॉमस मैसी, टॉम बैरेट, वॉरेन डेविडसन और ब्रायन फिट्जपैट्रिक पहले भी ऐसे प्रयासों का समर्थन कर चुके हैं।
प्रस्ताव का सीनेट से पास होना निश्चित नहीं : जैक नन ने कहा कि वह एक और अनिश्चित अवधि वाले युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे। यह जून और जुलाई के बाद ट्रंप की ईरान संबंधी सैन्य शक्तियों को सीमित करने की तीसरी कोशिश है। प्रस्ताव का सीनेट (ऊपरी सदन) से पारित होना अभी निश्चित नहीं है। इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास जाएगा। एजेंसी
युद्ध से टूट की कगार पर अमेरिकी सेना, हथियारों के घटते भंडार
ईरान के खिलाफ जारी युद्ध ने अमेरिकी सेना को अभूतपूर्व संकट में धकेल दिया है। इस अभियान से जुड़े दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लंबा खिंचता संघर्ष अमेरिकी सैन्य क्षमता को पूरी तरह टूट के कगार पर ले आया है। पेंटागन के बजट, हथियारों के घटते भंडार, बढ़ते हताहतों और नौसैनिक बेड़ों की बदहाली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें युद्ध के अप्रैल की शुरुआत में ही समाप्त होने की बात कही गई थी।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं का बेहद कम आकलन किया था, जिसकी भारी कीमत अब अमेरिकी नौसैनिकों और संसाधनों को चुकानी पड़ रही है।
28 फरवरी को युद्ध के शुरुआती घंटों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने बहरीन के मनामा स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय को नष्ट कर दिया था। कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने माना बेस तबाह हुआ था।
आपूर्ति शृंखला पर असर
फारस की खाड़ी के बंदरगाहों पर नौसेना को अपने 24 से अधिक युद्धपोतों के बेड़े के लिए रसद व्यवस्था हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थानांतरित करनी पड़ी है। वहां से ईंधन और राशन की 2,000 मील लंबी आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने में 14 से 18 दिन का चक्र लग रहा है। इसे बनाए रखना चुनौती है।