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ईरान में हिजाब नियमों पर क्यों थम रही सख्ती?: बिना सिर ढके निकल रहीं महिलाएं, कट्टरपंथी चाह रहे कार्रवाई
Thu, 17 Sep 2026 01:39 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, दुबई
पीटीआई, दुबई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:39 AM IST
सार
ईरान में अनिवार्य हिजाब को लेकर सरकार के भीतर ही सख्ती और संयम के बीच मतभेद उभर रहे हैं। तेहरान में कई महिलाएं अब बिना सिर ढके सार्वजनिक स्थानों पर नजर आती हैं और पहनावे से जुड़े पुराने प्रतिबंधों को चुनौती दे रही हैं। कट्टरपंथी नेता इसे सामाजिक और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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ईरान में कट्टरपंथी कर रहे सख्ती की मांग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
ईरान की राजधानी तेहरान में महिलाएं बिना सिर ढके खुले कैफे में बैठ रही हैं और छोटे टॉप पहन रही हैं। पार्कों में पुरुष शॉर्ट्स और महिलाएं लेगिंग पहनकर साथ में व्यायाम कर रही हैं। सड़क किनारे होने वाले संगीत कार्यक्रमों में महिलाएं नाचती दिखाई दे रही हैं और खुले बालों के साथ नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए तेहरान के इन दृश्यों से पता चलता है कि इस्लामी गणराज्य में सामाजिक पाबंदियों को लागू करने में हाल के वर्षों में काफी ढील आई है।
इस बदलाव की एक बड़ी वजह 16 सितंबर 2022 को 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शन हैं। अमीनी को कथित तौर पर सही तरीके से सिर पर स्कार्फ नहीं पहनने के आरोप में नैतिकता पुलिस ने हिरासत में लिया था।
सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया था। इस कार्रवाई में 500 से अधिक लोग मारे गए और हजारों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, शांति बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने महिलाओं के हिजाब और शालीन कपड़ों से जुड़े नियमों को लागू करने में पीछे हटना शुरू कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या इस ढील को फिर से खत्म किया जा सकता है।
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कट्टरपंथी नेता कर रहे महिलाओं पर सख्ती की मांग
ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में कट्टरपंथी नेता महिलाओं के पहनावे पर फिर सख्ती की मांग कर रहे हैं। लेकिन शीर्ष नेता ऐसे समय में जनता की नाराजगी भड़काने से बचने की चेतावनी दे रहे हैं, जब युद्ध, अमेरिका के हमलों, प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी के कारण पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के ससुर और राजनेता गुलाम अली हद्दाद आदेल ने पिछले सप्ताह हिजाब को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी में कहा, "युद्ध की परिस्थितियों के कारण हम उस मोर्चे में उस तरह प्रवेश नहीं कर सकते, जिस तरह हमें करना चाहिए।"
हिजाब को लेकर क्यों डरी ईरानी सरकार?
तेहरान में रहने वाली कार्यकर्ता और पूर्व राजनीतिक कैदी पूरन नाजेमी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद हिजाब को लेकर मतभेद और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने फोन पर कहा, "वे प्रदर्शनों से डरते हैं।" राजधानी के एक समृद्ध उत्तरी इलाके में रहने वाली 20 साल के शुरुआती दशक की एक विश्वविद्यालय छात्रा ने बताया कि वह सिर पर स्कार्फ नहीं पहनती, लेकिन ऐसे कपड़े पहनती है जो उसके हाथ और पैर का अधिकांश हिस्सा ढकते हैं। उसने कहा, "मुझे लगता है कि मैंने बहुत ज्यादा कपड़े पहन रखे हैं।"
उसने बताया कि उसकी सहेलियां ऐसे टॉप पहनकर बाहर जाती हैं जिनमें उनके कंधे खुले रहते हैं और घुटने तक के शॉर्ट्स पहनती हैं। सुरक्षा कारणों से उसने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर एपी से बात की।
ईरान में हिजाब को लेकर क्या हैं नियम?
ईरान में सबसे सख्त स्थिति में महिलाओं के लिए बाल ढकने वाला स्कार्फ और पूरे शरीर को छिपाने वाले ढीले कपड़े पहनना जरूरी है। सड़कों पर धार्मिक पुलिस इन नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं पर जुर्माना लगा सकती है, उन्हें परेशान कर सकती है या गिरफ्तार कर सकती है।
पिछले एक दशक में कई महिलाओं ने इन सीमाओं को चुनौती दी है। उन्होंने स्कार्फ को पीछे खिसकाकर अधिक बाल दिखाने शुरू किए और शरीर से चिपके कपड़े पहनने लगीं। 2022 के बाद कई महिलाओं ने पूरी तरह सिर ढकना बंद कर दिया। हाल के समय में तेहरान के कुछ हिस्सों में महिलाएं हाथ, पैर और यहां तक कि पेट भी खुला रखती दिखाई दी हैं।
कट्टरपंथियों के अखबार ने हिजाब हटाने को लेकर क्या कहा?
अमीनी की मौत के चार साल बाद बुधवार को प्रकाशित एक लेख में सुप्रीम लीडर की निगरानी वाले कट्टरपंथी अखबार ने कहा कि हिजाब हटाना "नग्नता और स्वच्छंदता को बढ़ावा देने" में बदल गया है और इसे "सुरक्षा के लिए खतरा" बताया। कायहान अखबार की रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने हिजाब के मामले में "सावधानीपूर्वक और तत्काल कार्रवाई" की मांग की है।
कट्टरपंथी समूह देशभर में रात के समय रैलियां कर रहे हैं। इनमें महिलाएं काले रंग के पारंपरिक ढीले कपड़े और सिर ढकने वाले परिधान पहनकर शामिल होती हैं। हालांकि, इन रैलियों में भी कुछ महिलाएं बिना सिर ढके दिखाई देती हैं। हिजाब के नियम ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में व्यावहारिक रुख रखने वालों और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद का बड़ा मुद्दा बन गए हैं। यह स्थिति अमेरिका के साथ बातचीत करने या युद्ध को और बढ़ाने जैसे सवालों पर मौजूद मतभेदों जैसी है।
क्या सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी चाहते हैं हिजाब को लेकर कार्रवाई?
हिजाब लागू करने की कई मांगें सुप्रीम लीडर के कार्यालय से जुड़े लोगों की ओर से आई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये मांगें खामेनेई के रुख को दर्शाती हैं या नहीं। सुप्रीम लीडर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह पद संभालने के बाद से उनका कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी जारी नहीं हुआ है। अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को इस्राइली हमले में मारे गए थे। वरिष्ठ खामेनेई लंबे समय से हिजाब के सख्त पालन की वकालत करते रहे थे।
28 अगस्त को पूर्वी शहर मशहद में एक धर्मगुरु ने अपने उपदेश में बिना हिजाब वाली महिलाओं और अन्य लोगों को, जिन्हें उन्होंने धर्म से दूर बताया, घरेलू ताकत के रूप में पेश किया, जिसका इस्तेमाल अमेरिका ईरान के खिलाफ कर सकता है। मशहद में शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व करने वाले और प्रांत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अहमद अलामोलहुदा ने अधिकारियों से ऐसे व्यवहार पर रोक लगाने के लिए "अपने सभी संसाधनों" का इस्तेमाल करने को कहा।
ईरानी राष्ट्रपति पर लगे क्या आरोप?
कुछ रूढ़िवादी नेताओं और मीडिया ने व्यावहारिक रुख वाले राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पर सख्त हिजाब नीति लागू करने से रोकने का आरोप लगाया है। सुप्रीम लीडर के नियंत्रण वाले विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों की देखरेख करने वाली सरकारी संस्था के प्रमुख अब्दोल हुसैन खोसरोपनाह ने पिछले सप्ताह अधिकारियों के साथ हिजाब को लेकर बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "जैसे ही हम कुछ कहते हैं, वे कहते हैं कि युद्ध चल रहा है, परेशानी पैदा न करें।"
अधिकारियों ने तेहरान के कुछ कैफे और सार्वजनिक स्थानों को हिजाब नियमों के उल्लंघन के कारण थोड़े समय के लिए बंद किया है, लेकिन यह अभियान व्यापक रूप नहीं ले सका है। ईरानी नेता खास तौर पर अमेरिका के बढ़े हुए प्रतिबंधों के बीच सावधानी बरत रहे हैं। उनका कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य लोगों में असंतोष भड़काना है।
क्या हिजाब नियमों में ढील की वजह है आर्थिक संकट?
जनवरी में मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए थे। इन प्रदर्शनों में इस्लामी गणराज्य को सत्ता से हटाने की मांग भी उठी। इसके बाद हुई कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए। महिलाओं को अब उन जगहों पर भी बिना सिर ढके जाने की गुंजाइश मिल रही है, जहां पहले उन्हें सबसे ज्यादा सावधान रहना पड़ता था।
तेहरान की 30 साल की एक महिला ने बताया कि हाल ही में वह एक सरकारी कार्यालय में बिना सिर ढके गई थी। ऐसे सरकारी कार्यालयों में आम तौर पर हिजाब के नियमों को सख्ती से लागू किया जाता है। सुरक्षा कारणों से उसने फोन पर एपी से बात करते हुए अपनी पहचान उजागर नहीं की।
तेहरान में एपी के संपर्क में आई तीन महिलाओं ने बताया कि सड़क पर सुरक्षा जांच चौकियों से गुजरते समय सुरक्षा बलों ने उनके हिजाब न पहनने पर कोई टिप्पणी नहीं की। इन चौकियों पर अक्सर नैतिकता से जुड़े नियम लागू करने वाला और प्रदर्शनों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्वयंसेवी बल बसीज भी मौजूद रहता है।
हिजाब नियम को लागू कराने वाले बल बसीज के प्रमुख क्या बोले?
बसीज के नए प्रमुख और कट्टरपंथी धर्मगुरु हुसैन ताएब ने पिछले सप्ताह कमांडरों की एक बैठक में चेतावनी दी कि हिजाब के मुद्दे को इस तरह उठाया जाना चाहिए जिससे "आंतरिक एकजुटता" को नुकसान न पहुंचे। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने यह जानकारी दी।
यह बयान पिछले महीने खामेनेई के उस रुख के अनुरूप था, जिसमें उन्होंने युद्ध को दूसरे मुद्दों से ऊपर प्राथमिकता दी थी।
हालांकि, महिलाओं को नैतिकता से जुड़े आरोपों में अब भी निशाना बनाया जा रहा है। गायिका हिवा सेफीजादे ने 19 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि पिछले साल राजधानी में सार्वजनिक संगीत कार्यक्रम करने के बाद उन्हें चार साल जेल की सजा सुनाई गई।
ईरान में हिजाब का मुद्दा कितना पुराना?
ईरान के आधुनिक इतिहास में हिजाब का मुद्दा कई बड़े बदलावों से जुड़ा रहा है। 1930 के दशक में ईरानी राजशाही ने समाज को पश्चिमी रूप देने के अभियान के तहत महिलाओं को सिर से स्कार्फ हटाने के लिए मजबूर किया था। 1979 में शाह के सत्ता से हटने के बाद अनिवार्य हिजाब धर्मगुरुओं के शासन की पहचान बन गया। वकील और पूर्व राजनीतिक कैदी सिदीघेह वास्माघी ने उत्तरी ईरान से फोन पर कहा, "जो महिलाएं इसे नहीं पहनतीं, वे एक तरह से सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा कर रही हैं।"
अमीनी और पहनावे से जुड़े नियमों के कारण निशाना बनाई गई अन्य महिलाओं की मौत के बाद वास्माघी ने 2023 में हिजाब पहनना छोड़ दिया। इससे पहले वह दशकों तक हिजाब पहनती रही थीं। वास्माघी इस्लामी कानून की विद्वान हैं और इस्लाम में महिलाओं की स्थिति पर व्यापक रूप से लिख चुकी हैं।
उन्होंने कहा, "सिर पर स्कार्फ उतारना आसान नहीं था, खासकर मेरे जैसे व्यक्ति के लिए।" 2024 में उन्हें हिरासत में लिया गया था। उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि इस्लाम में अनिवार्य हिजाब का कोई आधार नहीं है। वास्माघी को आशंका है कि युद्ध के बाद अधिकारी हिजाब पर फिर से सख्त कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले किए गए प्रयास नाकाम रहे हैं। कार्यकर्ता नाजेमी ने कहा, "लोग फिर उस स्थिति में नहीं लौटने वाले हैं, जैसी पहले थी। वे ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं।"
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इस बदलाव की एक बड़ी वजह 16 सितंबर 2022 को 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शन हैं। अमीनी को कथित तौर पर सही तरीके से सिर पर स्कार्फ नहीं पहनने के आरोप में नैतिकता पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया था। इस कार्रवाई में 500 से अधिक लोग मारे गए और हजारों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, शांति बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने महिलाओं के हिजाब और शालीन कपड़ों से जुड़े नियमों को लागू करने में पीछे हटना शुरू कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या इस ढील को फिर से खत्म किया जा सकता है।
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कट्टरपंथी नेता कर रहे महिलाओं पर सख्ती की मांग
ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में कट्टरपंथी नेता महिलाओं के पहनावे पर फिर सख्ती की मांग कर रहे हैं। लेकिन शीर्ष नेता ऐसे समय में जनता की नाराजगी भड़काने से बचने की चेतावनी दे रहे हैं, जब युद्ध, अमेरिका के हमलों, प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी के कारण पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के ससुर और राजनेता गुलाम अली हद्दाद आदेल ने पिछले सप्ताह हिजाब को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी में कहा, "युद्ध की परिस्थितियों के कारण हम उस मोर्चे में उस तरह प्रवेश नहीं कर सकते, जिस तरह हमें करना चाहिए।"
हिजाब को लेकर क्यों डरी ईरानी सरकार?
तेहरान में रहने वाली कार्यकर्ता और पूर्व राजनीतिक कैदी पूरन नाजेमी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद हिजाब को लेकर मतभेद और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने फोन पर कहा, "वे प्रदर्शनों से डरते हैं।" राजधानी के एक समृद्ध उत्तरी इलाके में रहने वाली 20 साल के शुरुआती दशक की एक विश्वविद्यालय छात्रा ने बताया कि वह सिर पर स्कार्फ नहीं पहनती, लेकिन ऐसे कपड़े पहनती है जो उसके हाथ और पैर का अधिकांश हिस्सा ढकते हैं। उसने कहा, "मुझे लगता है कि मैंने बहुत ज्यादा कपड़े पहन रखे हैं।"
उसने बताया कि उसकी सहेलियां ऐसे टॉप पहनकर बाहर जाती हैं जिनमें उनके कंधे खुले रहते हैं और घुटने तक के शॉर्ट्स पहनती हैं। सुरक्षा कारणों से उसने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर एपी से बात की।
ईरान में हिजाब को लेकर क्या हैं नियम?
ईरान में सबसे सख्त स्थिति में महिलाओं के लिए बाल ढकने वाला स्कार्फ और पूरे शरीर को छिपाने वाले ढीले कपड़े पहनना जरूरी है। सड़कों पर धार्मिक पुलिस इन नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं पर जुर्माना लगा सकती है, उन्हें परेशान कर सकती है या गिरफ्तार कर सकती है।
पिछले एक दशक में कई महिलाओं ने इन सीमाओं को चुनौती दी है। उन्होंने स्कार्फ को पीछे खिसकाकर अधिक बाल दिखाने शुरू किए और शरीर से चिपके कपड़े पहनने लगीं। 2022 के बाद कई महिलाओं ने पूरी तरह सिर ढकना बंद कर दिया। हाल के समय में तेहरान के कुछ हिस्सों में महिलाएं हाथ, पैर और यहां तक कि पेट भी खुला रखती दिखाई दी हैं।
कट्टरपंथियों के अखबार ने हिजाब हटाने को लेकर क्या कहा?
अमीनी की मौत के चार साल बाद बुधवार को प्रकाशित एक लेख में सुप्रीम लीडर की निगरानी वाले कट्टरपंथी अखबार ने कहा कि हिजाब हटाना "नग्नता और स्वच्छंदता को बढ़ावा देने" में बदल गया है और इसे "सुरक्षा के लिए खतरा" बताया। कायहान अखबार की रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने हिजाब के मामले में "सावधानीपूर्वक और तत्काल कार्रवाई" की मांग की है।
कट्टरपंथी समूह देशभर में रात के समय रैलियां कर रहे हैं। इनमें महिलाएं काले रंग के पारंपरिक ढीले कपड़े और सिर ढकने वाले परिधान पहनकर शामिल होती हैं। हालांकि, इन रैलियों में भी कुछ महिलाएं बिना सिर ढके दिखाई देती हैं। हिजाब के नियम ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में व्यावहारिक रुख रखने वालों और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद का बड़ा मुद्दा बन गए हैं। यह स्थिति अमेरिका के साथ बातचीत करने या युद्ध को और बढ़ाने जैसे सवालों पर मौजूद मतभेदों जैसी है।
क्या सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी चाहते हैं हिजाब को लेकर कार्रवाई?
हिजाब लागू करने की कई मांगें सुप्रीम लीडर के कार्यालय से जुड़े लोगों की ओर से आई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये मांगें खामेनेई के रुख को दर्शाती हैं या नहीं। सुप्रीम लीडर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह पद संभालने के बाद से उनका कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी जारी नहीं हुआ है। अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को इस्राइली हमले में मारे गए थे। वरिष्ठ खामेनेई लंबे समय से हिजाब के सख्त पालन की वकालत करते रहे थे।
28 अगस्त को पूर्वी शहर मशहद में एक धर्मगुरु ने अपने उपदेश में बिना हिजाब वाली महिलाओं और अन्य लोगों को, जिन्हें उन्होंने धर्म से दूर बताया, घरेलू ताकत के रूप में पेश किया, जिसका इस्तेमाल अमेरिका ईरान के खिलाफ कर सकता है। मशहद में शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व करने वाले और प्रांत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अहमद अलामोलहुदा ने अधिकारियों से ऐसे व्यवहार पर रोक लगाने के लिए "अपने सभी संसाधनों" का इस्तेमाल करने को कहा।
ईरानी राष्ट्रपति पर लगे क्या आरोप?
कुछ रूढ़िवादी नेताओं और मीडिया ने व्यावहारिक रुख वाले राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पर सख्त हिजाब नीति लागू करने से रोकने का आरोप लगाया है। सुप्रीम लीडर के नियंत्रण वाले विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों की देखरेख करने वाली सरकारी संस्था के प्रमुख अब्दोल हुसैन खोसरोपनाह ने पिछले सप्ताह अधिकारियों के साथ हिजाब को लेकर बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "जैसे ही हम कुछ कहते हैं, वे कहते हैं कि युद्ध चल रहा है, परेशानी पैदा न करें।"
अधिकारियों ने तेहरान के कुछ कैफे और सार्वजनिक स्थानों को हिजाब नियमों के उल्लंघन के कारण थोड़े समय के लिए बंद किया है, लेकिन यह अभियान व्यापक रूप नहीं ले सका है। ईरानी नेता खास तौर पर अमेरिका के बढ़े हुए प्रतिबंधों के बीच सावधानी बरत रहे हैं। उनका कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य लोगों में असंतोष भड़काना है।
क्या हिजाब नियमों में ढील की वजह है आर्थिक संकट?
जनवरी में मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए थे। इन प्रदर्शनों में इस्लामी गणराज्य को सत्ता से हटाने की मांग भी उठी। इसके बाद हुई कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए। महिलाओं को अब उन जगहों पर भी बिना सिर ढके जाने की गुंजाइश मिल रही है, जहां पहले उन्हें सबसे ज्यादा सावधान रहना पड़ता था।
तेहरान की 30 साल की एक महिला ने बताया कि हाल ही में वह एक सरकारी कार्यालय में बिना सिर ढके गई थी। ऐसे सरकारी कार्यालयों में आम तौर पर हिजाब के नियमों को सख्ती से लागू किया जाता है। सुरक्षा कारणों से उसने फोन पर एपी से बात करते हुए अपनी पहचान उजागर नहीं की।
तेहरान में एपी के संपर्क में आई तीन महिलाओं ने बताया कि सड़क पर सुरक्षा जांच चौकियों से गुजरते समय सुरक्षा बलों ने उनके हिजाब न पहनने पर कोई टिप्पणी नहीं की। इन चौकियों पर अक्सर नैतिकता से जुड़े नियम लागू करने वाला और प्रदर्शनों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्वयंसेवी बल बसीज भी मौजूद रहता है।
हिजाब नियम को लागू कराने वाले बल बसीज के प्रमुख क्या बोले?
बसीज के नए प्रमुख और कट्टरपंथी धर्मगुरु हुसैन ताएब ने पिछले सप्ताह कमांडरों की एक बैठक में चेतावनी दी कि हिजाब के मुद्दे को इस तरह उठाया जाना चाहिए जिससे "आंतरिक एकजुटता" को नुकसान न पहुंचे। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने यह जानकारी दी।
यह बयान पिछले महीने खामेनेई के उस रुख के अनुरूप था, जिसमें उन्होंने युद्ध को दूसरे मुद्दों से ऊपर प्राथमिकता दी थी।
हालांकि, महिलाओं को नैतिकता से जुड़े आरोपों में अब भी निशाना बनाया जा रहा है। गायिका हिवा सेफीजादे ने 19 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि पिछले साल राजधानी में सार्वजनिक संगीत कार्यक्रम करने के बाद उन्हें चार साल जेल की सजा सुनाई गई।
ईरान में हिजाब का मुद्दा कितना पुराना?
ईरान के आधुनिक इतिहास में हिजाब का मुद्दा कई बड़े बदलावों से जुड़ा रहा है। 1930 के दशक में ईरानी राजशाही ने समाज को पश्चिमी रूप देने के अभियान के तहत महिलाओं को सिर से स्कार्फ हटाने के लिए मजबूर किया था। 1979 में शाह के सत्ता से हटने के बाद अनिवार्य हिजाब धर्मगुरुओं के शासन की पहचान बन गया। वकील और पूर्व राजनीतिक कैदी सिदीघेह वास्माघी ने उत्तरी ईरान से फोन पर कहा, "जो महिलाएं इसे नहीं पहनतीं, वे एक तरह से सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा कर रही हैं।"
अमीनी और पहनावे से जुड़े नियमों के कारण निशाना बनाई गई अन्य महिलाओं की मौत के बाद वास्माघी ने 2023 में हिजाब पहनना छोड़ दिया। इससे पहले वह दशकों तक हिजाब पहनती रही थीं। वास्माघी इस्लामी कानून की विद्वान हैं और इस्लाम में महिलाओं की स्थिति पर व्यापक रूप से लिख चुकी हैं।
उन्होंने कहा, "सिर पर स्कार्फ उतारना आसान नहीं था, खासकर मेरे जैसे व्यक्ति के लिए।" 2024 में उन्हें हिरासत में लिया गया था। उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि इस्लाम में अनिवार्य हिजाब का कोई आधार नहीं है। वास्माघी को आशंका है कि युद्ध के बाद अधिकारी हिजाब पर फिर से सख्त कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले किए गए प्रयास नाकाम रहे हैं। कार्यकर्ता नाजेमी ने कहा, "लोग फिर उस स्थिति में नहीं लौटने वाले हैं, जैसी पहले थी। वे ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं।"