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RBI: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का दावा- प. एशिया संकट का भारत पर असर, घरेलू तेल और गैस बढ़ाया गया उत्पादन
Tue, 21 Apr 2026 03:07 AM IST
Nirmal Kant
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 21 Apr 2026 03:07 AM IST
सार
RBI: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का भारत पर असर है, क्योंकि यह क्षेत्र निर्यात, तेल आयात और विदेशी धन का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने बताया कि भारत घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ा रहा है और अर्थव्यवस्था मजबूत नीतियों के कारण स्थिर है। आरबीआई अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। पढ़िए रिपोर्ट-
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संकट भारत को काफी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यहां से लगभग एक-छठा निर्यात होता है। आधा कच्चा तेल आयात होता है और लगभग दो-पांचवां विदेशी धन (रेमिटेंस) आता है।
आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
■ आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 18 अप्रैल को प्रिंसटन विश्वविद्यालय में संबोधन दिया।
■ उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले दशक में लगातार मजबूत हुई है।
■ संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत नीतियों, वित्तीय स्थिरता और बेहतर राजकोषीय व्यवस्था से यह मजबूती आई है।
■ उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक नींव पिछले वर्षों में और अधिक स्थिर हुई है।
■ गवर्नर ने बताया कि नीतिगत सुधारों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है।
'घरेलू तेल और गैस का उत्पादन बढ़ा रहा भारत'
उन्होंने कहा, संकट के बीच भारत अपने देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ा रहा है। साथ ही आयात के स्रोत भी अलग-अलग देशों से लिए जा रहे हैं, ताकि निर्भरता कम हो। गवर्नर ने कहा, तेल की कोई कमी नहीं है, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त भंडार हैं। लेकिन औद्योगिक उपयोग के लिए गैस का सीमित वितरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि तेल की कीमतों का कुछ बोझ सरकार और तेल कंपनियों ने संभाला है। लेकिन गैस की कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाला गया है।
'पिछले 10 वर्षों में 6.1 फीसदी रहा भारत का आर्थिक विकास'
मल्होत्रा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत की औसत आर्थिक वृद्धि 6.1 फीसदी रही है। जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.2 फीसदी रही। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि चीन की वृद्धि 5.6 फीसदी और इंडोनेशिया की 4.2 फीसदी रही है।
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'भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती नीतियों और भरोसे का परिणाम'
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती मजबूत नीतियों और भरोसेमंद संस्थानों का परिणाम है। मल्होत्रा ने कहा, पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर इसलिए अधिक है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के निर्यात, आयात, उर्वरक और विदेशी धन प्रवाह का बड़ा हिस्सा है।
'लंबे समय तक बाधाओं का पड़ सकता है स्थायी असर'
उन्होंने कहा कि ऐसे झटकों में मौद्रिक नीति को तत्काल सख्त कदम नहीं उठाने चाहिए, बल्कि पहले असर को समझना चाहिए, जब तक यह दीर्घकालिक मुद्रास्फीति (महंगाई) न पैदा करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आपूर्ति बाधाएं लंबे समय तक बनी रहीं तो कीमतों पर स्थायी असर पड़ सकता है, जिसे रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आरबीआई को डाटा के आधार पर निर्णय लेना चाहिए और स्थिति के अनुसार नीति बदलनी चाहिए।
ये भी पढ़ें: मार्च में आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 0.4% की गिरावट, उर्वरक क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
वेट एंड वॉच की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक: गवर्नर संजय मल्होत्रा
मल्होत्रा ने बताया कि अभी आरबीआई 'वेट एंड वॉच' यानी इंतजार और निगरानी की स्थिति में है और नीति में लचीलापन बनाए रखा गया है। आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजकोषीय घाटा नियंत्रित हुआ है और कर संग्रह की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने कीमतों के दबाव को कम करने के लिए मौद्रिक नीति के साथ-साथ आपूर्ति आधारित उपाय भी अपनाए हैं।
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आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा?
■ आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 18 अप्रैल को प्रिंसटन विश्वविद्यालय में संबोधन दिया।
■ उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले दशक में लगातार मजबूत हुई है।
■ संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत नीतियों, वित्तीय स्थिरता और बेहतर राजकोषीय व्यवस्था से यह मजबूती आई है।
■ उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक नींव पिछले वर्षों में और अधिक स्थिर हुई है।
■ गवर्नर ने बताया कि नीतिगत सुधारों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है।
'घरेलू तेल और गैस का उत्पादन बढ़ा रहा भारत'
उन्होंने कहा, संकट के बीच भारत अपने देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ा रहा है। साथ ही आयात के स्रोत भी अलग-अलग देशों से लिए जा रहे हैं, ताकि निर्भरता कम हो। गवर्नर ने कहा, तेल की कोई कमी नहीं है, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त भंडार हैं। लेकिन औद्योगिक उपयोग के लिए गैस का सीमित वितरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि तेल की कीमतों का कुछ बोझ सरकार और तेल कंपनियों ने संभाला है। लेकिन गैस की कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाला गया है।
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'पिछले 10 वर्षों में 6.1 फीसदी रहा भारत का आर्थिक विकास'
मल्होत्रा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत की औसत आर्थिक वृद्धि 6.1 फीसदी रही है। जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.2 फीसदी रही। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि चीन की वृद्धि 5.6 फीसदी और इंडोनेशिया की 4.2 फीसदी रही है।
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'भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती नीतियों और भरोसे का परिणाम'
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती मजबूत नीतियों और भरोसेमंद संस्थानों का परिणाम है। मल्होत्रा ने कहा, पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर इसलिए अधिक है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के निर्यात, आयात, उर्वरक और विदेशी धन प्रवाह का बड़ा हिस्सा है।
'लंबे समय तक बाधाओं का पड़ सकता है स्थायी असर'
उन्होंने कहा कि ऐसे झटकों में मौद्रिक नीति को तत्काल सख्त कदम नहीं उठाने चाहिए, बल्कि पहले असर को समझना चाहिए, जब तक यह दीर्घकालिक मुद्रास्फीति (महंगाई) न पैदा करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आपूर्ति बाधाएं लंबे समय तक बनी रहीं तो कीमतों पर स्थायी असर पड़ सकता है, जिसे रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आरबीआई को डाटा के आधार पर निर्णय लेना चाहिए और स्थिति के अनुसार नीति बदलनी चाहिए।
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वेट एंड वॉच की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक: गवर्नर संजय मल्होत्रा
मल्होत्रा ने बताया कि अभी आरबीआई 'वेट एंड वॉच' यानी इंतजार और निगरानी की स्थिति में है और नीति में लचीलापन बनाए रखा गया है। आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजकोषीय घाटा नियंत्रित हुआ है और कर संग्रह की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने कीमतों के दबाव को कम करने के लिए मौद्रिक नीति के साथ-साथ आपूर्ति आधारित उपाय भी अपनाए हैं।