अगस्त के तीसरे सप्ताह तक डोकलाम गतिरोध दूर होने के आसार
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अगस्त के तीसरे सप्ताह तक भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के दूर हो जाने के आसार हैं। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल वाग्ले ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। वाग्ले ने बृहस्पतिवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के रुख को भारत सरकार का रुख बताते हुए कहा कि डोकलाम गतिरोध को लेकर हमारी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और इसके समाधान के लिए कूटनीतिक चैनल का सहारा लिया जा रहा है। लेकिन सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक भारत और चीन गतिरोध दूर करने के समाधान पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की हाल में हुई चीन यात्रा के दौरान उनकी अपने समकक्ष यांग जेइची और फिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से डोकलाम गतिरोध पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इस भेंट, चर्चा के आधार पर दोनों तरफ से सम्मान जनक हल निकालने का प्रयास चल रहे हैं। दोनों तरफ से इस तरह की कोशिश चल रही है कि ब्रिक्स से पहले इसका समाधान निकाल लिया जाए।
अगस्त के तीसरे सप्ताह तक क्यों ?
-31-4 सितंबर 2017 तक चीन फूचेन प्रांत में श्यामन शहर में ब्रिक्स(ब्राजील,भारत, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। इससे पहले इस गतिरोध को दूर किए जाने की पूरी संभावना है।
-डोकलाम गतिरोध को लेकर चीन पर काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ रहा है। माना यह जा रहा है कि चीन क्षेत्रफल, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, सामरिक, राजनीतिक ताकत समेत अन्य में भूटान की स्थिति कहीं नहीं ठहरती। वहीं चीन भूटान के क्षेत्र में उसे दबा रहा है।
डोकलाम विवाद: चीनी सेना ने भारत को चेताया, कहा- संयम की भी होती है सीमा
चीन का दावा है कि डोकलाम क्षेत्र में पहले भारत के 400 के करीब सैनिक तैनात थे। इस समय 48 सैनिक ही वहां डटे हैं। चीन के राजनयिकों का दावा है कि उन्होंने पूरी पड़ताल कराई है और केवल 48 सैनिक ही डोकलाम क्षेत्र में हैं। सूत्र यह मानकर चल रहे हैं कि ऐसा दोनों देशों के शांति पूर्ण तरीके से समाधान निकालने के कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हो रहा है।
चीन के इस दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुछ भी नहीं कहा है। विदेश मंत्रालय न ही इसकी पुष्टि कर रहा है और न ही खंडन। प्रवक्ता गोपाल वाग्ले इस बारे में केवल इतना कहते हैं कि विदेश मंत्री ने बृहस्पतिवार तीन अगस्त को राज्य सभा में बयान दे दिया है। भारत समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति संवेदनशील है। इसके लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
डोकलाम गतिरोध पर चीन के तीन सवाल
-भारत को इस पर कोई एतराज नहीं है कि डोकलाम क्षेत्र से पहले किसकी सेना हटे। भारत की या चीन की। नई दिल्ली केवल यह गारंटी चाहती है कि भूटान के दावे वाले डोकलाम के इस अधिकार में चीन सीमा विवाद होने तक कोई सडक़ न बनाए। इसलिए यदि चीन अपनी सेना को पीछे पुरानी स्थिति में ले जाने की गारंटी देता है तो भारत की सेना भी पुरानी स्थिति(16 जून के पहले) में लौट आएगी। लेकिन यह कदम चीन के भरोसे के आधार पर उठाया जा सकता है।
-भारत के पास दूसरा विकल्प है कि वहां से धीरे-धीरे अपनी सेना की तैनाती में कटौती करे और भूटान की सेना मोर्चा संभाले। ऐसी दशा में गतिरोध के समाधान होने तक भारत की सेना भूटान के सहयोग में पीछे डटी रहेगी। इस पैंतरे से चीन के ऊपर नैतिक अंतरराष्ट्रीय दबाव की स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
-कदाचित अगस्त के तीसरे सप्ताह तक डोकलाम का हल न हुआ तो फिर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद ही इसका समाधान हो सकेगा। इस अधिवेशन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पांच साल के अगले कार्यकाल मिलने पर मुहर लगने की संभावना है।
चीन के तीन सवाल
-राजनयिक सूत्रों के अनुसार चीन ने मई और जून 2017 में भारतीय विदेश विभाग को दो पत्र लिखा था। इन पत्रों में चीन ने अपनी सडक़ परियोजना पर काम शुरू करने की जानकारी दी थी। पहले पत्र के रिमाइंडर पर भारत की तरफ से कोई राजनयिक विरोध क्यों नहीं जाहिर किया गया?
-चीन के सैनिकों के क्षेत्र में सड़क मार्ग के लिए आने के कद अचानक भारत को क्यों विरोध की याद आई?
-डोकलाम का गतिरोध वाला विवादित क्षेत्र भूटान का हिस्सा है। भारत की सेना दूसरे देश भूभाग पर है। इसलिए पहले भारत की सेनाएं वापस अपने क्षेत्र में लौटें।
भारत-चीन में टकराव
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के राज्यसभा में वक्तव्य से स्पष्ट है कि भारत युद्ध नहीं चाहता। चीन भी धमकी भले दे रहा है लेकिन वह भी युद्ध के मूड में नहीं है। मेजर जनरल(रिटा.) अशोक मेहता को भी इसकी संभावना काफी कम नजर आ रही है। ऐसे में जनरल मेहता का कहना है कि डोकलाम गतिरोध पर ज्यादा से ज्यादा स्थानीय स्तर की झड़प भर हो सकती है। हालांकि इसकी भी संभावना काफी कम है।