प्लॉट में खेल रहे मासूम को खूंखार कुत्तों ने नोंच कर मार डाला
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तहसील प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही से बहेड़ी में एक और मासूम खूंखार कुत्तों का निवाला बन गया। सोमवार सुबह साढ़े पांच बजे खाली प्लाट में खेलते वक्त 12 से ज्यादा कुत्तों ने उस पर हमला कर नोच डाला, फिर खून से लथपथ मासूम को कुछ दूर तक घसीटा भी।
बच्चे की मौत से घर में कोहराम मच गया। मां गश खाकर गिर गई। वहीं लोगों के बताए जाने पर भी प्रशासनिक अफसरों ने बच्चे के घर जाने की जरूरत तक नहीं समझी।
अमरिया (पीलीभीत) के चठिया मुगलाखेड़ा गांव के रहने वाले मुहम्मद जुबैर यहां मोहल्ला सकलैनी में तीन साल से किराए के मकान में रह रहे हैं। वह शादी ब्याह में बुकिंग पर कार चलाते हैं। रविवार रात वह बुकिंग पर गए थे।
घर पर पत्नी फरहाना, पांच वर्षीय बेटा मोहम्मद आमिर और ढाई साल की बेटी उमैरा थे। सुबह साढ़े पांच बजे आमिर सो कर उठा और बिस्किट लेने दुकान पर जाने की जिद करने लगा।
मां ने मना किया तो पास के मोहल्ले मदार नगर में रहने वाली नानी के घर ले जाने की बात कही। मां ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद वह अचानक घर से बाहर निकल गया और पचास मीटर दूरी पर खाली प्लाट में खेलने लगा।
वहां 12 से ज्यादा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। शोरगुल सुनने पर आसपास के लोग दौड़े तो कुत्ते बच्चे के शव को घसीटते हुए ले गए। जैसे-तैसे कुत्तों को भगाया गया मगर तब तक आमिर की मौत हो चुकी थी।
मोहल्ला मदार नगर में रहने वाली उसकी नानी शाहिदा बी और नाना जमील अहमद भागते हुए वहां पहुंचे। दोपहर बाद आमिर की दादी शमीम बेगम और दादा अब्दुल वहीद बहेड़ी पहुंचे तो बदहवास हो गए।
नहीं मिल सकता मुआवजा
पीड़ित को किसी तरह का मुआवजा भी नहीं मिल सकता है। सरकार की ओर से इस तरह के कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। इसमें नगर पालिका की कोई गलती नहीं हैं। आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए जब भी अभियान चलाया जाता है कि लोग हर कुत्ते को पालतू बता देते हैं।
-पारसनाथ मौर्या एसडीएम
आवारा कुत्तों के खिलाफ पालिका ने समय-समय पर अभियान चलाया है। अचानक ये हादसा हो गया इससे मैं बेहद आहत हूं। पीड़ित परिवार को जिस तरह की मदद चाहिए होगी उसे दी जाएगी। -अंजुम रशीद नगर पालिका अध्यक्ष
ये आवारा कुत्ते हैं। अगर जंगली कुत्ते होते तो वन विभाग इन्हें पकड़ने के लिए अभियान चलाता।ेे अभियान तो नगर पालिका और जिला पंचायत को चलाना होगा। इसमें वन विभाग कुछ नहीं कर सकता।
-गोविंद राम, डिप्टी रेंजर वन विभाग