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अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली महिला सैन्य अधिकारी के साथ न हो उत्पीड़न: सुप्रीम कोर्ट
Wed, 23 Jan 2019 08:33 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 23 Jan 2019 08:33 PM IST
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- फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने सेना से कहा है कि तबादले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली दो वर्षीय बच्चे की लेफ्टिनेंट कर्नल मां का किसी तरह उत्पीड़न न किया जाए। महिला सैन्य अधिकारी ने यह कहते हुए तबादले पर विरोध जताया था कि तबादले वाली जगह पर क्रेच तक की व्यवस्था नहीं है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एडिशनल सॉलिसिर जनरल(एएसजी) माधवी दीवान को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के कारण महिला लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा के साथ उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि महिला अधिकारी ने अपने अधिकार का उपयोग किया है।
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पीठ ने एएसजी द्वारा यह कहने पर कि जिस जगह पर अनु डोगरा का तबादला किया गया है वहां से कुछ दूर पर क्रेच की सुविधा मौजूद है। महिला उस क्रेच में अपने बच्चे को रखकर अपना काम कर सकती हैं। हालांकि एएसजी ने कहा कि अनु डोगरा के पति (सैन्य अधिकारी) का तबादला उस जगह करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद अनु डोगरा की ओर से पेश वकील एश्वर्या भाटी ने एएसजी के सुझाव को स्वीकार कर लिया।
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अपनी याचिका में महिला अधिकारी में कहा था कि दो वर्षीय बच्ची की कामकाजी मां का तबादला ऐसी जगह नहीं किया जा सकता जहां क्रेच व उसकी देखभाल की सुविधा न हो। साथ ही महिला सैन्य अधिकारी ने सेना को राष्ट्रीय बाल नीति, 2013 का अनुपालन का निर्देश देने की भी गुहार लगाई थी।
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