फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   diyas were lit in 10000 villages in child marriage free India campaign Under leadership of Kailash Satyarthi

बाल विवाह मुक्त भारत: कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में चलाया गया जागरुकता अभियान, 10000 गांवों में जलाए गए दीये

Mon, 17 Oct 2022 07:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 17 Oct 2022 07:23 PM IST
सार

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में  ऐतिहासिक ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत जागरुकता अभियान चलाया गया। इसमें जागरुकता फैलाने के लिए दस हजार गावों में दीये जलाए गए। इस भव्य जागरुकता कार्यक्रम में दो करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए। 

विज्ञापन
diyas were lit in 10000 villages in child marriage free India campaign Under leadership of Kailash Satyarthi
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में शुरु हुआ “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान, लड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान बन गया है। इस अभियान के तहत देशभर के 26 राज्यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गावों की 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरुकता कार्यक्रम चलाया गया। इसके तहत दीये जलाकर और कैंडल मार्च निकाल कर लोगों को जागरुक किया गया। दो करोड़ से अधिक लोगों ने आज चलाए गए इस अभियान में हिस्सेदारी कर और बाल विवाह को खत्म करने की शपथ लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।  

विज्ञापन


गौरतलब है कि संख्या और व्यापकता की दृष्टि से बाल विवाह के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर  एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम देश-दुनिया में पहली बार आयोजित हुआ है। इस अभियान के तहत उत्तर में दुनिया के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक लद्दाख के ‘खारदुंग पास’ से लेकर कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध डल झील और देश की राजधानी के ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों राजघाट, इंडिया गेट और कुतुबमीनार पर भी दिए जलाए गए। वहीं, दक्षिण के छोर पर इस अभियान ने कन्याकुमारी के स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल और अंडमान निकोबार में भी अभियान ने दस्तक दी। इसके अलावा पूर्वोत्तर दिशा में मणिपुर, सुंदरबन, भारत-बांग्लादेश सीमा, विक्टोरिया मेमोरियल, पश्चिम में राजस्थान और पंजाब में जलियांवाला बाग व भगत सिंह के गांव में भी इस अभियान के तहत लोगों ने बाल विवाह रोकने की शपथ ली। देश के कोने-कोने और दूरदराज में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, डॉक्टर, प्रोफेशनल्स, महिला नेत्री,  वकील, शिक्षक, शिक्षाविद् और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी जम कर हिस्सा लिया। अभियान में नागरिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया और जमीनी स्तर पर कार्यक्रम भी आयोजित किए।  
विज्ञापन


कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने रविवार शाम को राजस्थान स्थित विराट नगर के बंजारा समुदाय की बहुलता वाले नवरंगपुरा गांव से एक विशाल जनसभा में दीप जलाकर कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर एक और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लाइबेरिया की लेमा जोबोई भी मौजूद थी।   

विज्ञापन
विज्ञापन

diyas were lit in 10000 villages in child marriage free India campaign Under leadership of Kailash Satyarthi
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान - फोटो : अमर उजाला

इस अभियान को सरकार की तरफ से भी भरपूर सहयोग और समर्थन मिल रहा है। कई सरकारी संस्थाओं ने इसमें शिरकत की। 14 राज्य सरकारों के महिला एवं बाल कल्याण विभाग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राज्य विधिक सेवा आयोग सहित रेलवे सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन ने इस अभियान को अपना समर्थन दिया। इन संस्थाओं ने अपने अधिकारियों को इसमें शामिल होने और आंगनवाड़ी जैसी संस्थाओं को कार्यक्रम करने का निर्देश दिया है।
 
बाल विवाह पीड़ितों की दुर्दशा पर चर्चा करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल विवाह मानव अधिकारों और गरिमा का हनन है, जिसे दुर्भाग्य से सामाजिक स्वीकृति प्राप्त है। यह सामाजिक बुराई हमारे बच्चों, खासकर हमारी बेटियों के खिलाफ, अंतहीन अपराधों को जन्म देती है। कुछ सप्ताह पहले मैंने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया था। इसने सदियों पुराने दमनकारी सामाजिक रिवाज से घुटन महसूस कर रही 70 हजार  महिलाओं में वह आग पैदा कर दी कि वे इसे चुनौती देने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं।

इस अवसर पर नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लाइबेरिया की लेमा जेबोई ने भी बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘बाल विवाह वैश्विक स्तर पर एक भयावह बुराई है। हमें मानवाधिकार की हत्या करने वाली इस कुप्रथा का अंत करना ही होगा।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed