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दिव्यांग महिला पर्वतारोही को मंदिर में नहीं करने दिया गया दर्शन, निकलीं बाहर
एजेंसी / उज्जैन (मध्य प्रदेश)
Updated Tue, 26 Dec 2017 04:05 AM IST
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Arunima Sinha
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जिस दिव्यांग महिला के इरादे को माउंट एवरेस्ट जैसा विशालकाय पर्वत भी न डिगा सका, उसके विश्वास को इस देश की व्यवस्था ने तोड़ दिया। राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर में ऐसा मजाक हुआ कि उन्हें यह कहना पड़ गया कि उनकी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है।
उन्होंने बताया कि 'मैं दो अन्य लोगों के साथ रविवार तड़के साढ़े चार बजे मंदिर पहुंची। राज्य की एक मंत्री के मेहमान के रूप में नाम दर्ज होने के कारण उम्मीद थी अच्छे से दर्शन हो जाएंगे। मगर उन्हें एलईडी स्क्रीन पर भस्मारती देखनी पड़ी और तो और गर्भगृह के दर्शन के लिए जाने के दौरान भी उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। परिचय और दिव्यांग होने के बारे में बताने पर भी वे नहीं माने। काफी देर तक बहस के बाद अकेले ही जाने की अनुमति दी। वहीं नंदी हॉल में जाने लगी तो फिर रोका। बार-बार परिचय देने पर बमुश्किल दर्शन हुए।'
पढ़ें- इंडोनेशिया की शीर्ष चोटी पर भी अरुणिमा ने लहराया तिरंगा
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अरुणिमा ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में कई विपदा देखीं पर कभी आंसू नहीं आए। सिन्हा ने कहा कि 'मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मुझे दर्शन करने में एवरेस्ट पर चढ़ने से भी अधिक दर्द हुआ। वहां पर मेरी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है।'
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उन्होंने बताया कि 'मैं दो अन्य लोगों के साथ रविवार तड़के साढ़े चार बजे मंदिर पहुंची। राज्य की एक मंत्री के मेहमान के रूप में नाम दर्ज होने के कारण उम्मीद थी अच्छे से दर्शन हो जाएंगे। मगर उन्हें एलईडी स्क्रीन पर भस्मारती देखनी पड़ी और तो और गर्भगृह के दर्शन के लिए जाने के दौरान भी उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। परिचय और दिव्यांग होने के बारे में बताने पर भी वे नहीं माने। काफी देर तक बहस के बाद अकेले ही जाने की अनुमति दी। वहीं नंदी हॉल में जाने लगी तो फिर रोका। बार-बार परिचय देने पर बमुश्किल दर्शन हुए।'
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अरुणिमा ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में कई विपदा देखीं पर कभी आंसू नहीं आए। सिन्हा ने कहा कि 'मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मुझे दर्शन करने में एवरेस्ट पर चढ़ने से भी अधिक दर्द हुआ। वहां पर मेरी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है।'
मंदिर प्रशासन बना रहा अनजान :
अरुणिमा सिन्हा
- फोटो : amar ujala
उन्होंने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री कार्यालय और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय को भी टैग किया। वहीं महाकाल मंदिर के प्रशासक अवधेश शर्मा ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला। उन्होंने कहा कि अरुणिमा ने पुलिस या मंदिर प्रशासन के पास कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है। उन्होंने आगे कहा कि यहां पर दिव्यांग लोगों के लिए एक रैंप है और मैं सुरक्षाकर्मियों से पूछूंगा कि उन्होंने सिन्हा को क्यों रोका? इसके साथ ही हम सीसीटीवी फूटेज का जांच करके दोषियों का पता लगाएंगे।
ट्रेन में लूटपाट का विरोध करने पर गवा दी थी एक टांग :
राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकीं सिन्हा के अपंग होने की कहानी दुखद होने के साथ ही उनकी बहादुरी के बारे में बताती है। अप्रैल, 2011 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया जिसमें उन्होंने घुटने के नीचे से अपना एक पैर गवां दिया। इसके दो साल बाद उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और देश की पहली दिव्यांग पर्वतारोही बन गईं जिसने एवरेस्ट फतह किया है।
ट्रेन में लूटपाट का विरोध करने पर गवा दी थी एक टांग :
राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकीं सिन्हा के अपंग होने की कहानी दुखद होने के साथ ही उनकी बहादुरी के बारे में बताती है। अप्रैल, 2011 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया जिसमें उन्होंने घुटने के नीचे से अपना एक पैर गवां दिया। इसके दो साल बाद उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और देश की पहली दिव्यांग पर्वतारोही बन गईं जिसने एवरेस्ट फतह किया है।