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तालिबान सरकार को झटका: 'इस्लाम और पैसे' को लेकर आपस में दुश्मन बन रहे हैं अफगानिस्तान के मंत्री

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 15 Sep 2021 05:33 PM IST

सार

रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं, पाकिस्तान को पैसे की भूख है। वह चाहता है कि अफगानिस्तान में उसे पूरा हिस्सा मिले। उसके समर्थक आतंकी संगठन, जब तक तालिबान सरकार में रहेंगे, वह अपनी मनमानी करता रहेगा। खलील उर-रहमान को शरणार्थी मामलों का मंत्री बनवा कर पाकिस्तान ने बड़ा खेल खेला है। बहुत जल्द तालिबानी सरकार में बड़ी उथल पुथल देखने को मिल सकती है...
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खलील उर-रहमान और मुल्ला बरादर
खलील उर-रहमान और मुल्ला बरादर - फोटो : Agency
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विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबान की केयरटेकर सरकार का खेल बिगड़ सकता है। सरकार में शामिल आतंकी संगठनों के बीच दूरियां नजर आने लगी हैं। उनके बीच रणनीतिक तौर पर तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। खासतौर से, इस्लामिक एजेंडे को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, उसमें दुनिया के दूसरे देशों की सलाह मानें या न मानें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली आर्थिक मदद का बंटवारा कैसे हो, भविष्य में अमेरिका और नाटो से जुड़े देशों के साथ संबंध कैसे होंगे, इस बाबत तालिबान सरकार में शामिल मंत्रियों में सहमति नहीं बन पा रही है।
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आतंकी संगठन 'आईएसकेपी' और 'अल-कायदा' सख्ती के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, जबकि हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान के निर्देशन में आगे चलना चाहता है। मुल्ला बरादर और खलील उर-रहमान के बीच आपसी कहासुनी होने की खबरें आ रही हैं। खलील उर-रहमान, हक्कानी नेटवर्क का नेता है और शरणार्थी मामलों का मंत्री है। हक्कानी नेटवर्क पर पाकिस्तान की हुकूमत चलती है। ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि उसने अफगानिस्तान के 30 लाख से अधिक लोगों को शरण दी है। आर्थिक मदद में 'पड़ोसी' को बड़ा हिस्सा चाहिए।





तालिबान सरकार को मौजूदा परिस्थितियों में दो तरफा झटका लग रहा है। पहला, सरकार की नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर मंत्रियों के बीच टकराव है। दूसरा, आतंकी संगठन 'इस्लामिक' एजेंडे को अपने मन-मुताबिक तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है। कहा जा रहा है कि तालिबान की केयरटेकर सरकार में फूट पड़ गई है। पाकिस्तान चाहता है कि उसने अफगानिस्तान के लाखों लोगों को शरण दी है। ऐसे में उसे आर्थिक मदद चाहिए। ये दो तरीके से संभव है। एक, अफगानिस्तान के खनिज पदार्थों में हिस्सा और दूसरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली वित्तीय सहायता में उसे हिस्सेदारी चाहिए। शरणार्थियों के नाम पर पैसा लेने के लिए 'आईएसआई' ने खलील उर-रहमान को शरणार्थी मामलों का मंत्री बनवा दिया। बाहरी सुरक्षा के मामलों को देख रही भारतीय एजेंसी के अनुसार, तालिबान सरकार में टकराव का कारण पाकिस्तान बन रहा है। सरकार में उसका हस्तक्षेप ज्यादा बढ़ता जा रहा है।
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