प्रमोशन में भेदभाव का आरोप, सेना के अधिकारियों ने खटखटाया SC का दरवाजा
रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के पदभार संभालते ही उनके सामने नई मुसीबत आ गई। लगभग 100 लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अधिकारियों का कहना है कि उनके साथ पदोन्नति में अन्याय और भेदभाव हुआ है।
उन्होंने ने बयाता कि सेना और केंद्र सरकार के इस कदम के कारण याचिकाकर्ताओं में अन्याय की भावना पैदा हुई है, जिससे अधिकारियों का मनोबल कमजोर हुआ है, जो सेना और देश दोनों के लिए नुकसानदायक है।
अधिकारियों के इस कदम से सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में आग्रह किया है कि अगर उनके साथ पदोन्नती में ऐसी ही भेदभाव हुआ और उन्हें उनका हक नहीं मिला, तो उन्हें ऑपरेशनल एरिया और युद्ध क्षेत्र में तैनात न किया जाए।
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उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी है कि जो अधिकारी ऑपरेशनल एरिया में तौनात होते हैं, उन्हें भी वैसी ही मुश्किलों को सामना करना पड़ता है जैसी की युद्ध क्षेत्र में तैनात अधिकारी को। उन्होंने सहायक नीला गोलखे के माध्यम से पूछा कि अगर हर अधिकारी को समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो फिर पदोन्नोती में भेदभाव क्यों?
याचिका में कहा गया है कि जिन अधिकारियों ने समर्पित भाव से 10-15 साल तक सेवा की है, पदोन्नोती में भेदभाव के कारण उनका मनोबल टूट रहा है।
रक्षा मंत्री बोलीं- किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सेना तैयार
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बाड़मेर स्थित उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन दौरे पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि, यह चुनना सही नहीं होगा कि भारत को पाकिस्तान और चीन में से बड़ा खतरा किससे है?
उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ इतना ही कहूंगी कि भारत हर स्थिति से निपटने के लिये तैयार है।’ उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता रहेगी कि सैन्य तैयारियों में कोई कमी नहीं रहे और भारतीय सेना को और ज्यादा मजबूती प्रदान करने की दिशा में हरसंभव कदम उठाए जायेंगे।