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डिफेंस में FDI, बॉर्डर विवाद और महिला जवानों की तैनाती, सीतारमण के सामने हैं ये बड़े चैलेंज
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल
Updated Mon, 04 Sep 2017 10:37 AM IST
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nirmala sitaraman
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बुधवार को निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला रक्षा मंत्री के तौर पर पदभार ग्रहण करेंगी। पदभार ग्रहण करने के बाद निर्मला सीतारमण के पास 3 बड़े चैलेंज होंगे, जिन्हें पूरा करने के लिए उनको काफी काम करना होगा।
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इन तीन चैलेंज में पहला पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के साथ दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद को हल करना पहली प्राथमिकता होगी। चीन के साथ अभी हाल ही में डोकलाम विवाद का हल सरकार ने किया है। इसके साथ ही चीन अरुणाचल और लद्दाख पर भी अपना हक जता रहा है।
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पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ भी जम्मू-कश्मीर में सीमा और नियंत्रण रेखा से हो रही घुसपैठ और गोलीबारी के विवाद को हल करना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही डिफेंस सेक्टर में सेनाओं को लिए गोला बारूद की आपूर्ति, उनके सैन्य सामान की खरीद और निर्माण में मेक इन इंडिया को देखना और एफडीआई को भी देखना होगा।
महिला जवानों की सीमा पर तैनाती
देश में पहली बार किसी महिला को पूर्णकालिक तौर पर रक्षा मंत्री के पद की जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में सेना के तीनों अंगों में काम कर रही महिला जवानों को आशा है कि उन्हें भी पुरुषों के समान सीमा पर तैनाती मिलेगी। अभी महिला जवानों को सीमा पर तैनात करने के अलावा बाकी सभी विभागों में महिलाएं काम कर रही हैं।
मंत्रिपरिषद विस्तार से पहले चर्चा थी कि निर्मला सीतारमण को मंत्रीपद से हटाकर संगठन में भेजा जाएगा। लेकिन विस्तार और फेरबदल की इस प्रक्रिया में निर्मला ने ही सबसे लंबी छलांग मारी।
ये रही रक्षा मंत्री बनाने की बड़ी वजह
बतौर वाणिज्य मंत्री निर्मला ने 2015 में वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) सम्मेलन में किसानों के हित में भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दबाव का अकेले सामना किया और सरकार के एजेंडे से नहीं डिगीं।
माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही वह पीएम मोदी की नजर में चढ़ गई थीं। इस फैसले के बाद निर्मला ने कहा कि वह अभिभूत और विनम्र हैं। उन्होंने इस कदर भरोसा जताने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। निर्मला ने कहा कि देश सेवा हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है और अब यह काम और बेहतर कर पाएंगी।